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अयोध्या के डेवलेपमेंट पर मंथन:70 एकड़ जन्मभूमि परिसर के साथ जोड़कर होगा रामनगरी का विकास; अब तक 1900 करोड़ रुपए खाते में आए

अयोध्या8 महीने पहले
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अयोध्या के सर्किट हाउस में राम मंदिर निर्माण समिति की बैठक में जुटे मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी। - Dainik Bhaskar
अयोध्या के सर्किट हाउस में राम मंदिर निर्माण समिति की बैठक में जुटे मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी व प्रशासनिक अधिकारी।
  • सांस्कृतिक राज्य के तौर पर विकसित की जाएगी अयोध्या, कमिश्नर की टीम ने विजन डॉक्यूमेंट पेश किया
  • पारंपरिक मंदिर निर्माण के श्रेष्‍ठ आर्किटेक्‍ट पद्मभूषण डॉ. नागा स्‍वामी व चेन्‍नई के एम सुब्रमण्‍यम को जोड़ा गया

अयोध्या के सर्किट हाउस में राम मंदिर निर्माण समिति के दूसरे दौर की बैठक आज दोपहर बाद खत्म हो गई। इस दौरान राम जन्मभूमि के 70 एकड़ परिसर के साथ बाहरी इलाके के विकास के बीच तालमेल रखने पर मंथन हुआ। सर्वसम्मति से तय हुआ है कि मंदिर निर्माण में आधुनिक तकनीक के साथ प्राचीन पद्धति के विशेषज्ञों से भी परामर्श लिया जाए। इसके लिए पारंपरिक मंदिर के श्रेष्ठ आर्किटेक्ट पद्भूषण डॉक्टर नागा स्वामी और चेन्नई के एम सुब्रमण्यम को जोड़ा जाएगा। वहीं, मंदिर निर्माण के लिए चल रहा निधि समर्पण अभियान कल यानी 27 फरवरी को समाप्त हो जाएगा। अब तक 1900 करोड़ रुपए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास आ चुके हैं।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि बैठक की अध्यक्षता राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने की। कमिश्नर की टीम ने विकास की जो तस्वीर पेश की वह बेहद सुखद रही है। इसमें प्रभु राम के सांस्कृतिक राज्य की तस्वीर दिखाई देखी। अयोध्या के संपूर्ण परिसर की जो योजना योगी सरकार ने तैयार की है, उसमें एयरपोर्ट से लेकर गरीबी कैसे दूर की जाए? साफ-सफाई व निराश्रित महिलाओं के पुनर्वास तक की योजनाओं को शामिल किया गया है।

ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय राय ने कहा राम मंदिर से ताल मेल बना कर ही अयोध्या का विकास कैसे किया जाए इसको लेकर संबंधित अधिकारियों से प्रस्तावित विकास योजनाओं पर चर्चा की गई है। सिर्फ 70 एकड़ में मंदिर नहीं बनेगा, आस पास इलाके का भी विकास होगा। ताकि कोई भी यात्री आए तो वह दो-तीन ठहरकर यहां भ्रमण कर सके।

आधुनिकता के साथ प्राचीन शैली का होगा समावेश
राम मंदिर निर्माण समिति की बैठक में गुरुवार को L&T और टाटा इंजीनियरिंग सर्विसेज की टीम ने मंदिर निर्माण के विभिन्‍न तकनीकी पहलुओं पर प्रेजेंटेशन किया था। तय किया गया कि मंदिर के निर्माण में श्रेष्‍ठ आधुनिक तकनीक के विशेषज्ञों के साथ देश के जाने-माने मंदिर निर्माण के प्राचीन पद्धति के विशेषज्ञों का भी परामर्श लिया जाए। इसके लिए पारंपरिक मंदिर निर्माण के श्रेष्‍ठ आर्किटेक्‍ट पद्मभूषण डॉ. नागा स्‍वामी व चेन्‍नई के एम सुब्रमण्‍यम को जोड़ा गया है। इनके परामर्श से मंदिर की नींव से लेकर ऊपर के मंदिर का निर्माण होगा।

स्‍वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि 27 फरवरी को समाप्‍त होने वाला राम मंदिर निर्माण को लेकर चल रहा निधि संग्रह अभियान पूरे देश में सफलतापूर्वक चला। इस अभियान में अब तक 1900 करोड़ राशि जमा हो चुकी है। धनसंग्रह का पूरा विवरण अभियान के समापन के बाद कर जारी किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय।
मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय।

नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर परिसर का किया निरीक्षण
इस बीच मंदिर निर्माण समिति के अध्‍यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सुबह मंदिर परिसर में हो रहे निर्माण का निरीक्षण किया। ट्रस्‍ट के सदस्‍यों व मंदिर निर्माण की तकनीकी टीम के इंजीनियरों से अलग-अलग बैठक कर जानकारी हासिल की। वे अभी 27 फरवरी तक यहां ठहर कर मंदिर निर्माण के विभिन्‍न पहलुओं पर मंथन करेंगे।

60 फीसदी नींव की खुदाई का काम पूरा
ट्रस्‍ट के सदस्‍य डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि मंदिर की नींव की खुदाई का काम 60 फीसदी पूरा हो गया है। बाकी 40 फीसदी का काम भी मार्च में पूरा हो जाएगा। उसी के बाद नींव में मटेरियल की भराई का काम शुरू हो जाएगा। अब तक 12 मीटर तक की नींव की खुदाई हो चुकी है। इसमें मजबूत मिट्टी की सतह मिली है। मंदिर निर्माण में कार्यरत इंजीनियरिंग कंपनियां व IIT चेन्नई के विज्ञानी नींव की डिजाइन तैयार कर इसका प्रेजेंटेशन दे रहे हैं। अब इसको अंतिम रूप देना है कि इसमें मलबा हटाने के बाद किस तरह का मजबूत मैटेरियल भरा जाए। इसमें मिर्जापुर के पत्‍थरों का इस्तेमाल किया जाएगा।

राम मंदिर का प्रस्तावित मॉडल।
राम मंदिर का प्रस्तावित मॉडल।

2 माह बाद रिलीज होगी 67 एकड़ परिसर की आर्किटेक्‍ट डिजाइन

डॉक्टर अनिल मिश्र ने बताया कि अभी सारा फो‍कस मुख्‍य मंदिर के निर्माण को लेकर है। नींव का काम तेजी से पूरा करने के बाद परिसर के डिजाइन को भी दो माह के अंदर रिलीज कर दिया जाएगा। जिसमें यह साफ हो जाएगा कि मंदिर में प्रवेश के कितने गेट व रास्‍ते बनेगें और वे किन किन सड़कों से सीधे जुड़ेंगे।

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