अयोध्या कनक भवन मंदिर:अपने भक्तों के लिए श्रीराम प्रतिदिन करते हैं 910 KM की पैदल यात्रा, रात्रि निवास तो दिन में MP के ओरछा धाम में देते हैं दर्शन

अयोध्या7 महीने पहले
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अयोध्या के कनक भवन में रात्रि निवास करते हैं तो सुबह आरती के बाद मध्य प्रदेश स्थित ओरछा धाम चले जाते हैं। - Dainik Bhaskar
अयोध्या के कनक भवन में रात्रि निवास करते हैं तो सुबह आरती के बाद मध्य प्रदेश स्थित ओरछा धाम चले जाते हैं।

अयोध्या के विश्व प्रसिद्ध मंदिर कनक भवन मंदिर में विराजमान भगवान श्रीराम भक्तों के लिए प्रतिदिन 910 किलोमीटर की यात्रा करते हैं। वे अयोध्या के कनक भवन में रात्रि निवास करते हैं तो सुबह आरती के बाद मध्य प्रदेश स्थित ओरछा धाम चले जाते हैं। जहां पूरे दिन रहकर सायं आरती के बाद अयोध्या आते हैं। यहां भी माता जानकी के साथ अपने निज महल कनक भवन में रात्रि निवास करते हैं। करीब रात 9:30 बजे आरती भोग के बाद पुजारी द्वारा भगवान श्रीराम व सीता का शयन करा दिया जाता है।

पहले कनक भवन मंदिर फिर ओरछा धाम में श्रीराम
अयोध्या स्थित कनक भवन मंदिर प्रतिदिन सुबह करीब 8:30 बजे दर्शन के लिए खुलता है और पूर्वान्ह 11:00 बजे राजभोग आरती के बाद 11:30 बजे मंदिर की दरवाजे बंद हो जाते हैं। फिर मंदिर शाम 4:30 बजे खुलता है। इसके बाद सायं 7:00 बजे भगवान की आरती होती है। रात 9:30 बजे आरती भोग के बाद पुजारी द्वारा भगवान श्रीराम व सीता का शयन करा दिया जाता है। भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन व ओरछा धाम जाने के कारण अयोध्या व ओरछा मंदिर की आरती में लगभग 15 मिनट का अंतराल भी रखा जाता है। भक्तों का भाव है कि भगवान को एक जगह से दूसरी जगह पर पहुंचने कुछ देर लगती है।

भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन व ओरछा धाम जाने के कारण अयोध्या व ओरछा मंदिर की आरती में लगभग 15 मिनट का अंतराल भी रखा जाता है।
भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन व ओरछा धाम जाने के कारण अयोध्या व ओरछा मंदिर की आरती में लगभग 15 मिनट का अंतराल भी रखा जाता है।

महारानी अयोध्या सरयू नदी से प्राप्त भगवान के विग्रह को पैदल अयोध्या से ओरछा लेकर गई थीं
बताते चलें कि टीकमगढ़ की महारानी गणेश कुंवरि भगवान श्रीराम की परम भक्त थीं। जबकि टीकमगढ़ नरेश भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त थे। टीकमगढ़ नरेश से कहासुनी के बाद महारानी अयोध्या आईं और उन्हें सरयू तट पर तपस्या के बाद भगवान श्रीराम की प्राप्ति सरयू से हुई। इसी विग्रह की स्थापना आज ओरछा धाम में है। महारानी अयोध्या सरयू नदी से प्राप्त भगवान के विग्रह को पैदल अयोध्या से ओरछा लेकर गई थी। वह प्रत्येक माह के पुष्य नक्षत्र में भगवान के विग्रह को लेकर पैदल चलती और फिर 26 दिन वह रुक कर तपस्या करतीं। इस प्रकार भी तपस्या करते हुए पैदल भगवान को सिर पर रखकर ओरछा पहुंचीं। आज ओरछा व अयोध्या का अटूट संबंध है। हनुमत किला गहोई मंदिर के महंत रामलखन शरण, कनक भवन के नियमित दर्शनार्थी विकास मेहरोत्रा का कहना है कि भगवान श्रीराम के श्रद्धालु इन दोनों धामों पर दर्शन अवश्य करते हैं।

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