जब फफक कर रो पड़े अंबिका चौधरी:3 साल बाद बसपा छोड़ पूर्व मंत्री ने फिर पकड़ा अखिलेश का साथ, बोले- आज का दिन मेरे लिए पुनर्जन्म; मुख्तार के भाई भी हुए सपाई

लखनऊ5 महीने पहले
सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी को सदस्यता दिलाई।

उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी ने बसपा छोड़ वापस समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने उन्हें सदस्यता दिलाई। इसके बाद चौधरी फफक कर रो पड़े। बोले, आज का दिन मेरे लिए पुनर्जन्म के बराबर है। 68 साल के अंबिका को रोते हुए देख अखिलेश भी भावुक हो गए। उन्होंने अंबिका के आंसुओं को पोछा। अंबिका के साथ बसपा के विधायक और बाहुबली मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह और उनके बेटे मन्नू अंसारी ने भी समाजवादी पार्टी जॉइन की है।

लोकसभा चुनाव से पहले सपा छोड़ दी थी
अंबिका चौधरी एक समय में समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं में थे। हालांकि, 2019 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने मनमुटाव के चलते बसपा जॉइन कर ली थी। एक बार फिर से घर वापसी पर अंबिका चौधरी ने कहा, 'मेरे लिए आज का दिन पुनर्जन्म की तरह है। मेरे पास शब्दों का अभाव हो गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि मुझे और मेरे बेटे आनंद के साथ सब को पार्टी में जगह दी।' आगे उन्होंने कहा, 'मेरे मन में एक अभिलाषा है कि 2022 में अखिलेश यादव को दोबारा सीएम बनता देखूं। जो भी उपलब्धियां हैं इसी छांव की है।'

अंबिका और यह बोले-

  • 2022 के विधानसभा चुनाव में हमारे सामने एक मात्र लक्ष्य है कि हमको हमारी सरकार बनानी है। यहां से लेकर गांव तक में सभी लोग अखिलेश यादव के साथ अपना नाम जोड़ना चाहते हैं। अभी की सरकार से सभी लोगों का मन टूटा हुआ है।
  • वह दिन अब दूर नहीं है। चार-छह महीने बाद फिर हमारी तकदीर बदलेगी। हमारी पूरी टीम एक साथ काम करेगी। जब तक अखिलेश यादव को सीएम की कुर्सी पर बैठा नहीं देते। बलिया का एक भी व्यक्ति नहीं बैठने वाला है।

अखिलेश बोले- नेताजी के सभी पुराने साथियों को जोड़ूंगा
अखिलेश यादव ने कहा कि इस लड़ाई में हम एक साथ आ रहे हैं। एक साथ काम करेंगे कि सपा की बहुमत की सरकार बने। मेरी कोशिश होगी कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के जितने साथी हैं, उन सभी को पार्टी से जोड़ा जाए। न जाने क्यों कुछ मजबूत रिश्ते बहुत आसानी से टूट जाते हैं। कोई कारण नहीं होता है। परिस्थितियां होती है, समय होता है। लेकिन खुशी है सब आए। राजनीति में उतार-चढ़ाव बना रहता है। बलिया के लोगों को विशेष बधाई दे देता हूं।

अखिलेश ने कहा, जिला पंचायत के चुनाव में पूरे प्रदेश में सबसे मजबूती के साथ बलिया के लोग खड़े दिखाई दिए। यही बलिया की पहचान है। समाजवादियों का सबसे गहर रिश्ता बलिया से रहा है। लखनऊ में भी सबसे बड़ी पहचान बलिया के लोगों की है। जैसे जेपी, एनआईसी बिल्डिंग। देश में अगर बीच शहर कहीं घूमने की जगह है तो वह अपने छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र के नाम से चल रहे पार्क में है। आजादी का झंडे को देश में सबसे पहले किसने गाड़ा तो जवाब मिलेगा कि बलिया के लोगों ने। जिला अगर लखनऊ से न जुड़े तो विकास संभव नहीं है। पूरे प्रदेश में लोग कहीं से 4 घंटे में लखनऊ आ जाएं।

पार्टी मुख्यालय पर अखिलेश यादव और सपा कार्यकर्ता।
पार्टी मुख्यालय पर अखिलेश यादव और सपा कार्यकर्ता।

सीएम योगी पर साधा निशाना- ये सिर्फ दूसरे काम का फीता काटेंगे

अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो एक्सप्रेस दिया वह समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस वे था। हमारे बाबाजी ने कुछ नहीं किया, उसमें से केवल समाजवादी शब्द हटा दिया। जिस गुणवत्ता और रफ्तार के साथ बनना चाहिए था वो नहीं किया। हम बलिया के लोगों को भरोसा दिलाते हैं कि जब हमारी सरकार बनेगी तो उनका एक्सप्रेस-वे सबसे अच्छा होगा। कहा कि, इनके (सीएम योगी) पास समय नहीं है। यह दूसरे के काम का फीता काटेंगे। अखिलेश ने जिलों के नाम बदलने की राजनीति पर मजाकिया लहजे में तंज कसा। कहा, जरूरी नहीं कि जिस नाम से आए हो अगर मुख्यमंत्री जी को पता चले तो उस नाम से वापस नहीं जाओगे।

कौन है सिबगतुल्लाह अंसारी

अखिलेश यादव के साथ विधायक सिबगतुल्लाह ( अखिलेश के बाएं)।
अखिलेश यादव के साथ विधायक सिबगतुल्लाह ( अखिलेश के बाएं)।

सिबगतुल्लाह अंसारी बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के बड़े भाई हैं। सिबगतुल्लाह भी गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से विधायक रह चुके हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की अलका राय से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अब एक बार फिर से सपा का दामन थामा है। ऐसे में यह लगभग तय है कि उन्हें या उनके बेटे को 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा वहां से टिकट देगी। ऐसे में गाजीपुर की सियासत एक बार फिर से दिलचस्प होने जा रही है।

5 साल पहले भी हुए थे शामिल, अखिलेश ने कर दिया था इंकार
अंसारी परिवार पहले भी सपा का हिस्सा रह चुका है। कौमी एकता दल नाम से राजनैतिक पार्टी भी बनाई थी। 2017 के विधानसभा चुनाव के पहले भी अंसारी परिवार ने कौमी एकता दल का विलय सपा में कर दिया था। लेकिन अखिलेश यादव के विरोध पर पूरे परिवार को बाहर होना पड़ा था। जिसके बाद बसपा ने उन्हें गले लगाया था। साथ ही मऊ की सदर सीट से मुख्तार अंसारी, घोसी सीट से मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी और गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से सिबगतुल्लाह अंसारी को बसपा ने टिकट दिया। लेकिन, मुख्तार के अलावा जीत किसी को भी नसीब नहीं हुई। इसके अलावा 2019 के लोकसभा चुनाव में भी महागठबंधन की ओर से बसपा ने अफजाल अंसारी को गाजीपुर से टिकट दिया था और वो जीते भी।

भाजपा ने अखिलेश पर बोला हमला

भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, समाजवादी पार्टी की साइकिल का पहिया बिना अपराधियों के पैडल मारे नहीं घूम सकता। मुख्तार अंसारी के परिवार को फिर समाजवादी पार्टी में शामिल करके अखिलेश यादव ने इसे प्रमाणित कर दिया है। सपा, बसपा ने उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधी दोनों को बढ़ावा दिया है।

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