महंत की मौत...SIT ने पूछे 13 घंटे में 70 सवाल:आनंद गिरि बोला- महंत जी खुदकुशी नहीं कर सकते, ये हत्या है; आद्या और संदीप ने कहा- नरेंद्र गिरि नहीं लिख सकते ऐसा सुसाइड नोट

प्रयागराजएक वर्ष पहले

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में नामजद उनके शिष्य आनंद गिरि से SIT ने 13 घंटे में 70 सवाल पूछे। इसके बाद आनंद का आमना-सामना लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी व उसके बेटे संदीप तिवारी से कराया गया। तीनों को साथ बैठा कर लगभग ढाई घंटे तक पूछताछ की गई।

तीनों ने एक ही बात दोहराई कि ये सुसाइड नोट महंत नरेंद्र गिरि ने नहीं लिखा है। वह इतना लिख ही नहीं सकते। पूछताछ में तीनों ने ये भी माना कि महंत से उनके मतभेद थे, लेकिन उनकी मौत के पीछे कोई गहरी साजिश है।

सूत्रों की माने तो घंटों लंबी पूछताछ में आनंद गिरि बस यही बोलता रहा कि 'महंत जी खुदकुशी नहीं कर सकते, ये हत्या है। किसी को उनकी हत्या से फायदा पहुंच रहा था, वह कौन है मुझे नहीं पता। बताया जा रहा है कि तीनों को आज ही अदालत में पेश कर उन्हें पुलिस कस्टडी रिमांड पर देने का अनुरोध किया जाएगा।

मई के बाद से अब तक की घटनाओं पर फोकस
पुलिस लाइन में जहां आनंद से पूछताछ की जा रही है, उसका सुरक्षा घेरा अभेद्य है। SIT के सदस्यों के अलावा पुलिस महकमे के लोगों को भी पूछताछ वाले स्थान की ओर जाने की इजाजत नहीं है। SIT ने वर्ष 2011 से 20 सितंबर 2021 तक आनंद गिरि और उसके गुरु महंत गिरि के बीच के संबंधों की जानकारी ली। इसमें भी मई में गुरु-शिष्य के बीच हुए विवाद पर SIT का फोकस रहा।

SIT ने आनंद का लैपटॉप खंगाला। इसके अलावा उसके मोबाइल की कॉल डिटेल से यह जानकारी जुटाई गई है कि वह हाल ही में जब उत्तराखंड गया तो श्री मठ बाघंबरी गद्दी और प्रयागराज में अन्य किन लोगों से संपर्क में था। आद्या और संदीप से उसकी कब बातचीत हुई। आनंद के पास ऐसा कौन सा वीडियो था, जिसे लेकर महंत नरेंद्र गिरि परेशान थे।

रोया, गिड़गिड़ाया और कहा- मैं बेकसूर हूं
SIT में शामिल एक अफसर ने बताया कि आनंद से मंगलवार की शाम से पूछताछ शुरू की गई। घुमा-फिराकर वह खुद को बेकसूर साबित करने में ही लगा रहा। उसका कहना था कि गुरुजी और उसके बीच बीते मई महीने में जो अनबन हुई थी अब उसका पटाक्षेप हो चुका था। गुरुजी का कथित सुसाइड नोट फर्जी है। वह गुरुजी के सबसे प्रिय शिष्यों में से एक था। इसके साथ ही वह बार-बार रोने और गिड़गिड़ाने लग जा रहा था कि उसका भविष्य बर्बाद हो जाएगा।

मतभेद तो लगे रहते हैं, हम उनका बुरा नहीं चाहते थे
लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी और उसके बेटे संदीप ने SIT से पूछताछ में कहा कि जब हम किसी के नियमित संपर्क में रहते हैं तो मतभेद लगे रहते हैं। हम महंत जी का बुरा नहीं चाहते थे। वह एक बड़ी नामचीन शख्सियत थे। उनसे हमारी कोई तुलना ही नहीं है। सुसाइड नोट दिखाने पर दोनों ने कहा कि यह महंत जी ने नहीं लिखा है। दोनों को फंसाने के लिए सोच-समझ कर यह साजिश रची गई है।

आनंद गिरि को दिखाया गया सुसाइड नोट
खबर है कि आनंद गिरी को महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से बरामद 13 पन्ने के सुसाइड नोट को भी दिखाया गया। नरेंद्र गिरि की हैंड राइटिंग की पहचान कराने की कोशिश की गयी,लेकिन आनंद गिरि लगातार यही कहता रहा कि यह हैंडराइटिंग नरेंद्र गिरि की नही हो सकती। आनंद गिरि का कहना है कि वह ना तो आत्महत्या कर सकते है और ना ही सुसाइड नोट लिख सकते है।

मठ के उतराधिकार को लेकर विवाद पर सवाल
आनंद गिरी और नरेंद्र गिरी के बीच मठ के उतराधिकार को लेकर विवाद पर भी सवाल जवाब हुए। विवाद के सवाल पर आनंद गिरि ने बताया कि 'महंत जी के कहने के बाद जब तक उन्होंने मुझे माफ नहीं कर दिया, मैं बड़े हनुमान जी के मंदिर नहीं गया। आनंद गिरी ने कबूल किया कि हाल में मेरा महंत जी से कोई विवाद नहीं था, महंत जी मुझे कभी परेशान भी नहीं लगे।

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