इस्तीफे से प्रचार और प्रेशर की राजनीति:रोज एक दो नेताओं का इस्तीफा और उसके अगले दिन सदस्यता दिलाने  से सपा गठबंधन खबरों और सोशल मीडिया पर छाया रहना चाहता है

लखनऊ6 दिन पहले
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सपा गठबंधन इस्तीफे से प्रचार और प्रेशर की राजनीति बनने में लगी है। - Dainik Bhaskar
सपा गठबंधन इस्तीफे से प्रचार और प्रेशर की राजनीति बनने में लगी है।

भारतीय जनता पार्टी छोड़कर एक के बाद एक विधायक और मंत्री सपा का दामन थाम रहे हैं। नेता जैसे ही इस्तीफा देते हैं उसके अगले कुछ मिनट में ही उनकी फोटो सपा मुखिया अखिलेश यादव के साथ नजर आने लगती है। सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर भी दावा कर रहे हैं कि नेताओं की ज्वाइनिंग बहुत पहले हो गई है। फोटो सबके साथ की पहले ही ले ली गई है। बस इस्तीफा देने के साथ ही उसको सोशल मीडिया पर डाल दिया जा रहा है। इसमें सहयोगी दल भी शामिल हैं, जो सपा गठबंधन का हिस्सा बनने वाले हैं।

फोटो पहले लेने, इस्तीफा देने और फिर उसके बाद अखिलेश यादव के साथ विधायक मंत्री की फोटो सोशल मीडिया पर आने के पीछे एक सोची-समझी राजनीति है। पिछले 60 घंटे में योगी मंत्रिमंडल से 3 बड़े मंत्रियों ने इस्तीफा दिया है। इसके साथ ही विधायकों की संख्या 14 पहुंच गई है। कुछ घंटों पर इस्तीफा देने का यह सिलसिला इसलिए है कि बीजेपी में भगदड़ की स्थिति नजर आए। उसके साथ ही सपा गठबंधन इससे लगातार खबर और चर्चाओं में बना हुआ है। पिछले तीन दिन से खबरों में समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी दलों को भारतीय जनता पार्टी से ज्यादा जगह मिली है। सोशल मीडिया पर भी इनकी ही चर्चा है। अब रैली और पैदल मार्च पर रोक लग गया है तो सपा गठबंधन ने इसको अपने प्रचार का भी बड़ा हथियार बना लिया है।

दावा 20 जनवरी तक ऐसे ही चलेगा सिलसिला

ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया था कि बीजेपी छोड़ कर बड़े पैमाने पर विधायक और मंत्री सपा में शामिल होंगे। यह सिलसिला 20 जनवरी तक ऐसे ही चलेगा। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक लगातार इसको लेकर चर्चा बनी रहेगी। सपा गठबंधन की यह प्लानिंग है कि सोशल मीडिया और बाकी जगहों पर हर वक्त यह मैसेज जाता रहे कि उनके साथ आने वालों का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है, वहीं बीजेपी में भगदड़ कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

रोज एक या दो बड़े नाम रहेंगे

समाजवादी पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि दिन में एक या दो मंत्री की इस्तीफा लिया जा रहा है। कोशिश है कि रोज कम से कम एक या दो बड़े नाम उसमें शामिल रहे। उस दिन इससे सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर बहस चलती रहेगी। अखबारों में खबर छपेगी। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव यही चाहते हैं कि रोज वह लाइमलाइट में बने रहें। एक निजी चैनल पर साक्षात्कार देने के समय वह बोल चुके हैं कि मौजूदा दौर में ऐसी चर्चाओं से बढ़िया कोई मंच नहीं जहां से जनता के बीच में पहुंच बनाई जा सके। इसी बहाने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को लेकर के चर्चाएं होती रहे जिससे आम जन मानस में उनकी पहुंच कायम होती रहे।

डिजिटल प्रचार में भाजपा आगे

अखिलेश यादव ने हाल ही में स्वीकार किया था कि डिजिटल प्रचार-प्रसार के मामले में वह भारतीय जनता पार्टी से काफी पीछे हैं। सोशल मीडिया पर प्रचार प्रसार के लिए उनके पास फंड और टीम का अभाव है। ऐसे में अखिलेश यादव यह चाहते हैं कि रोज-रोज एक कोई बड़ा इस्तीफा हो और उसकी दिन भर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लेकर के टीवी के माध्यम और अखबारों में चर्चाएं होती रहे।