चुनाव से पहले प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण का मुद्दा:अखिलेश के बाद शिवपाल का समर्थन, मायावती पहले से मुखर; भाजपा-कांग्रेस ने अभी साफ नहीं किया रुख

लखनऊ8 महीने पहलेलेखक: प्रवीण राय
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में आरक्षण का मुद्दा उठने लगा है। अखिलेश यादव पहले ही अपना समर्थन दे चुके हैं तो अब उनके चाचा शिवपाल यादव ने भी पैरवी की है। उन्होंने सरकारी फार्मूले को लागू किए जाने की मांग की है। बसपा भी समय-समय पर इस मुद्दे का समर्थन करती रही है। हालांकि कांग्रेस ने अभी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।

'आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति' ने आरक्षण और प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे को कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद से मुलाकात की है। इस मांग को कांग्रेस के घोषणा पत्र में शामिल किए जाने की बात कही है। अभी तक सरकारी क्षेत्रों में अब पिछड़ा वर्ग को 28% अनुसूचित जाति को 15%, अनुसूचित जनजाति को 7.55 और गरीब सवर्णों को 10% आरक्षण का नियम है।

जाति आधारित जनगणना कराने के साथ निजी क्षेत्रों में भी आरक्षण को लागू करने की मांग
जाति आधारित जनगणना कराने के साथ निजी क्षेत्रों में भी आरक्षण को लागू करने की मांग

दलित, मुसलमानों और गरीब सवर्णों को मिले आरक्षण
गाजियाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान शिवपाल यादव ने आरक्षण और जातिवाद के मुद्दे पर कहा कि केंद्र की सरकारों ने बड़ी ही चालाकी से पिछड़ों के हकों का हिसाब नहीं होने दिया है। उन्होंने कहा कि आखिरी बार साल 1931 में जाति आधारित जनगणना कराई गई थी, उसके आधार पर आज तक आरक्षण दिया जा रहा है। जबकि, परिस्थितियों में काफी बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि जाति आधारित जनगणना कराने के साथ निजी क्षेत्रों में भी आरक्षण को लागू किया जाए। शिवपाल यादव ने कहा कि पिछड़े, दलित, मुसलमानों और गरीब सवर्णो को मिले निजी क्षेत्र में आरक्षण दिया जाना चाहिए।

नौकरियों में सवर्ण वर्ग का कब्जा
उन्होंने कहा कि आज भी केंद्र सरकार की ग्रुप ए की नौकरियों में सवर्ण 68, ओबीसी 13, एससी 13, एसटी 6% हैं। देश के 496 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों में 448 सवर्ण हैं। 43 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 95% प्रोफेसर, 92.9 % एसोसिएट प्रोफेसर, 66.27% एसिसटेंट प्रोफेसर सवर्ण हैं। ऐसे में देखा जाए तो यहां भी ठीक से आरक्षण सिस्टम लागू नहीं किया गया है।

अखिलेश ने कहा था इसमें सोचना क्या हम समर्थन करते हैं

पिछले दिनों एक प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों ने अखिलेश से आरक्षण के मुद्दे पर सवाल किया
पिछले दिनों एक प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों ने अखिलेश से आरक्षण के मुद्दे पर सवाल किया

पिछले दिनों एक प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों ने अखिलेश से आरक्षण के मुद्दे पर सवाल किया तो उन्होंने कहा था कि इसमें सोचने वाली कोई बात नहीं है। हम इसका समर्थन करते हैं। इसको लागू करना चाहिए। उन्होंने पिछले दिनों एक सवाल के जवाब में स्पष्ट कहा था कि निजी क्षेत्र में आरक्षण दिए जाने के वे हिमायती हैं। इसे लागू किया जाना चाहिए।

मायावती ने ठेकेदारी में आरक्षण लागू किया था

बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रमोशन में आरक्षण के साथ ही ठेकेदारी में भी आरक्षण लागू किया गया था
बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रमोशन में आरक्षण के साथ ही ठेकेदारी में भी आरक्षण लागू किया गया था

2007 से 2012 तक उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार थी। तब प्रदेश की सीएम रही बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रमोशन में आरक्षण के साथ ही ठेकेदारी में भी आरक्षण लागू किया गया था। मायावती का यह निर्णय बाद में कोर्ट में चला गया था। जिसके बाद 2012 में सपा की सरकार के दौरान इस मामले पर कोर्ट ने रोक लगा दी थी। वहीं, प्रमोट किए गए कर्मचारियों को डिमोट किया गया था। आरक्षण के मुद्दे पर बसपा प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण लागू किए जाने की हिमायती रही है।

हरियाणा, झारखंड और आंध्र प्रदेश में स्थानीय आरक्षण लागू
निजी क्षेत्र में जातिवाद आरक्षण पूरे प्रदेश में कहीं भी लागू नहीं है। हालांकि स्थानीय उम्मीदवारों के लिए यह व्यवस्था अब तक आंध्र प्रदेश, हरियाणा और झारखंड ने की है। वहीं, यूपी में भी नोएडा में यह व्यवस्था लागू की कई है। इसके अनुसार निजी क्षेत्र में कंपनियों को कम से कम 75% उम्मीदवार स्थानीय लोगों को चुनने होंगे। हालांकि इसमें भी कई नियम और शर्तें हैं।