जेल एसोसिएशन के चुनाव में IAS की रुचि:बंगले पर तैनात जेल का सिपाही चुनाव मैदान में, अधिकार नहीं फिर भी चुनाव करवाने लिखा पत्र

लखनऊ12 दिन पहले
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जेलर से लेकर सिपाही की कमी के चलते जेलों की सुरक्षा पुख्ता नहीं हो पा रही। दूसरी ओर जेल के सिपाही शासन के अधिकारियों के घर तैनात किए जा रहे हैं। ऐसा ही मामला कारागार मुख्यालय में चर्चा का विषय बना हुआ है। कानपुर देहात जेल का सिपाही गौरव दीक्षित 5 साल से शासन में सम्बद्ध होकर विशेष सचिव के घर का कामकाज कर रहा है।

यहां उसकी ड्यूटी कारागार विभाग के विशेष सचिव आरपी पांडेय के घर पर लग रही है। विभाग के अफसरों का कहना है कि जेल का स्टाफ जरूरत पड़ने पर किसी दूसरी जेल से या मुख्यालय से ही सम्बद्ध किया जा सकता है। शासन में संबद्धता नियम के खिलाफ है। जबकि उसका वेतन कानपुर देहात जेल से ही निर्गत हो रहा है।

विरोध हुआ तो एसोसिएशन पर कब्जे की रणनीति बनाई
सिपाही की सम्बद्धता का विरोध हुआ तो विशेष सचिव ने उसे नेता बनाकर पूरे एसोसिएशन पर कब्जा जमाने की तैयारी कर ली। जेल एसोसिएशन की कार्यकारिणी में जेलर से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक शामिल होते हैं। हर 2 साल बाद इसका चुनाव होता है, जिसमें शासन का कोई हस्तक्षेप नहीं होता। बायलॉज के मुताबिक चुनाव के लिए केवल IG जेल का औपचारिक अनुमोदन लेना होता है।

2016 के बाद से नई कार्यकारिणी का चुनाव नहीं हो पाया है। 1 अक्टूबर को आरपी पांडेय ने नियम के खिलाफ जाकर जल्द चुनाव कराने का आदेश जारी कर दिया। जबकि उन्हें ऐसा करने का अधिकार ही नहीं है। सूत्रों का कहना है कि वह गौरव दीक्षित को महामंत्री बनाना चाहते हैं ताकि पूरा एसोसिएशन उनके कब्जे में रहे और गौरव की संबद्धता भी बरकरार रहे।

कई अनुभागों में इस तरह से सिपाही सम्बद्ध हैं
कारागार विशेष सचिव आरपी पांडेय बताया कि जेल एसोसिएशन के चुनाव में शासन का कोई हस्तक्षेप नहीं होता। लंबे समय से चुनाव न होने पर मिली शिकायत के निस्तारण के लिए पत्र लिखा गया है। इस पर डीजी जेल निर्णय लेंगे। सिपाही की सम्बद्धता मेरे कार्यालय में है। कई अनुभागों में इस तरह से सिपाही सम्बद्ध हैं। जो लंबे समय से अटैच हैं उन्हें वापस भी किया जा रहा है।