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पुरानी पेंशन के बाद अब टिकट की मांग:राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने समाजवादी पार्टी पर बनाया दबाव, इटावा सीट से टिकट की कतार में खड़े परिषद के अध्यक्ष हरिकिशोर

लखनऊ4 महीने पहले
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के नेता प्रेस वार्ता के दौरान अपनी बात रखते हुए। - Dainik Bhaskar
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के नेता प्रेस वार्ता के दौरान अपनी बात रखते हुए।

पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे को घोषणा पत्र में शामिल कराने के बाद अब कर्मचारी संगठन समाजवादी पार्टी पर टिकट देने का दबाव बनाने लगे हैं। मंगलवार को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के कार्य वाहक अध्यक्ष सुशील कुमार त्रिपाठी और शिवबरन यादव ने बयान जारी कर कहा कि पुरानी पेंशन बहाली के लिए किए जा रहे कुर्तकों का जबाब देने के लिए सपा प्रमुख को कर्मचारी प्रतिनिधि को टिकट देना चाहिए। कर्मचारी संगठनों का यह बयान एक दबाव की तरह देखा जा रहा है। दरअसल, परिषद के वर्तमान अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी सपा में शामिल हो चुके हैं। वह इटावा से चुनाव भी लड़ना चाहते हैं। हालांकि वहां अभी प्रत्याशियों की घोषणा नहीं हुई है, ऐसे में कर्मचारी संगठनों के माध्यम से दबाव बनाने की पहल की जा रही है।

हालांकि कर्मचारी संगठन इससे इंकार कर रहे हैं। इस बारे में पदाधिकारियों का कहना है कि जब कर्मचारी प्रतिनिधि जनता के बीच से चुन कर विधानसभा में जाएगा तो पुरानी पेंशन पर अपनी बात मजबूती से रखेगा। विधान सभा के अंदर इसको पारित करने के दौरान उनकी बहस काफी कारगर साबित होगी। परिषद की तरफ से चार सीट की मांग की गई है। हालांकि वह चार सीट कौन- कौन सी होगी, इसका खुलासा नहीं किया गया है। पुरानी पेंशन बहाली और आउट सोर्सिग के मुद्दे पर लगभग दस वर्षों से आंदोलित राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के नेताओं ने आगामी चुनाव में कर्मचारी शिक्षक और उनके परिजनों के शतप्रतिशत मतदान की ब्लॉक स्तर तक कार्ययोजना तैयार की है।

घोषणा पत्र में शामिल करने का ऐलान

पुरानी पेंशन बहाली और आउट सोर्सिग के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के मुखिया ने ऐतिहासिक ऐलान ही नहीं किया बल्कि स्पष्ट रूप से इसे घोषणा पत्र में शामिल करने की बात कही है। इसके बावजूद विरोध स्वरूप अनर्गल प्रलाप किए जा रहे है तो इसका जबाब देने के लिए समाजवादी पार्टी को तत्काल पुरानी पेंशन बहाली और आउट सोर्सिग के लिए काम कर रहें कर्मचारी शिक्षक संवर्ग के दो चार नेताओं को अपनी पार्टी से विधानसभा में ले जाने का ऐलान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के मुखिया ने ऐसे ही पुरानी पेंशन का ऐलान नही किया, बल्कि इसके लिए दो से तीन माह का मंथन, आर्थिक विशेषज्ञ और सेवानिवृत्त आला नौकशाह की राय ली गई है।

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