सपा के साथ से जातीय समीकरण भी साथ:स्वामी ने अपनी सीट के साथ बेटे के लिए भी जीत सुरक्षित कर दी; जानिए कैसे बदला वोटों का गणित

लखनऊ4 महीने पहले

स्वामी प्रसाद मौर्या के सपा का दामन थामते ही रायबरेली की ऊंचाहार सीट और कुशीनगर की पडरौना के जातीय समीकरण भी बदल चुके हैं। पडरौना सीट से खुद स्वामी प्रसाद मौर्य 3 बार के विधायक हैं। जबकि रायबरेली की ऊंचाहार विधानसभा सीट पर पिछले 2 चुनाव से समाजवादी पार्टी ही जीत रही है। साल 2017 के चुनाव में मुकाबला सपा के मनोज पांडेय और भाजपा के उत्कृष्ट के बीच हुआ था। उत्कृष्ट स्वामी प्रसाद मौर्या के बेटे हैं। अगर उन्हें सपा से टिकट मिलती है तो उनकी जीत तय हो जाएगी।

आइए आपको पडरौना और ऊंचाहार सीटों के बदलते जातीय समीकरणों के बारे में बताते हैं...

वोटों का बदलता गणित

पाला बदलने के बाद

- भाजपा के साथ वाले सवर्ण मौर्या के साथ आने पर संशय था

19% ब्राह्मण (सपा-बसपा-भाजपा में बंटेंगे) 11% क्षत्रिय (भाजपा के साथ) 8% वैश्य (भाजपा के साथ) 6% कुशवाहा (भाजपा के साथ) 5% सैंथवार (भाजपा के साथ)

सपा के साथ आने से जुड़ेंगे 27% वोट

6% यादव (सपा के साथ) 18% मुस्लिम (सपा के साथ) 3% अन्य सामान्य जातियां (सपा के साथ)

36% वोट बैंक पहले से साथ माना जाता है

18% दलित (मौर्या के साथ) 18% एससी (मौर्या के साथ)

बसपा से पडरौना में खाता खोला, भाजपा के साथ जीत की हैट्रिक लगाई

1991 में पहली बार भाजपा ने पडरौना सीट से जीत का स्वाद चखा। सुरेंद्र शुक्ल विजयी रहे थे। 1998, 2002 और 2007 में लगातार कांग्रेस के प्रत्याशी कुंवर रतनजीत प्रताप नारायण सिंह जीते रहे। 2009 के उपचुनाव में पहली बार बहुजन समाज पार्टी ने स्वामी प्रसाद मौर्या के साथ खाता खोला था। 2012 में स्वामी प्रसाद मौर्य ने फिर जीत दर्ज की।

2017 में इस सीट से 2 बार विधायक स्वामी प्रसाद मौर्य बसपा को छोड़कर भाजपा में आ गए थे। भाजपा के टिकट पर लड़े स्वामी प्रसाद मौर्य को 2017 के विधानसभा चुनाव में 93649 वोट मिले थे। उन्होंने बसपा के जावेद इकबाल को 40552 मतों से हराया था।

सबसे अहम ये रहा कि बसपा के टिकट पर विधायक बनने के लिए उन्होंने 2012 में 22% वोट लिए। जबकि भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर उन्होंने 44 % वोट हासिल किए। यानी ठीक दोगुने।

अब 'मौर्या+माय = ऊंचाहार में जीत' के समीकरण से जीत सकते हैं

सपा में आने के बाद अखिलेश यादव ने इस तस्वीर को ट्वीट किया।
सपा में आने के बाद अखिलेश यादव ने इस तस्वीर को ट्वीट किया।

2012ः बीएसपी से लड़े थे उत्कृष्ट, सपा उम्मीदवार से हारे
समाजवादी पार्टी के मनोज पांडेय ने बीएसपी के उत्कृष्ट मौर्य को हराया था। इस मुकाबले कांग्रेस के अजय पाल सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार जितेंद्र बहादुर सिंह चौथे स्थान पर रहे। इस चुनाव में मनोज पांडेय को 61, 930 तो उत्कृष्ट मौर्या को 59, 348 वोट मिले।

2017ः मोदी लहर थी, भाजपा से लड़े फिर भी हारे उत्कृष्ट
वहीं, 2017 की बात करें तो इसी सीट पर फिर से स्वामी प्रसाद मौर्या के बेटे उत्कृष्ट मौर्या ने अपनी किस्मत भाजपा से आजमाई थी, लेकिन फिर से हार का सामना करना पड़ा। इस बार फिर से उन्हें सपा के उम्मीदवार मनोज कुमार पांडेय ने हराया दिया था। हालांकि जीत का अंतर महज 2 हजार के करीब था। इस चुनाव में बसपा तीसरे और कांग्रेस चौथे नंबर पर रही थी। इस चुनाव में मनोज कुमार पांडेय को 59103 और उत्कृष्ट मौर्या को 57169 वोट मिले।

इस वजह से उत्कृष्ट को मिल सकती है टिकट
दोनों चुनाव में उत्कृष्ट मौर्या बहुत करीबी अंतर से हारे हैं। वहीं, ऊंचाहार विधानसभा क्षेत्र में इनके प्रतिद्वंद्वी व विनर कैंडिडेट सपा के उम्मीदवार रहे मनोज पांडेय का विरोध भी हो रहा है। इसलिए उनकी टिकट कट सकती है।

वोटों का समीकरण उत्कृष्ट के साथ

स्वामी प्रसाद मौर्या के साथ आ जाने से उत्कृष्ट के 2 हजार से हारने का अंतर समाप्त हो सकता है। दरअसल, इस सीट पर करीब 50 हजार यादव, लगभग 45 हजार मौर्या वोटर, 12 हजार लोध, 10 हजार कुर्मी, करीब 50 हजार अन्य ओबीसी वोटर हैं। 28 हजार मुस्लिम वोटर हैं। वहीं, करीब 75 हजार पासी समुदाय, 25 हजार चमार वोटर हैं। 30 हजार ब्राह्मण, 26 हजार राजपूत हैं। इस हिसाब से ओबीसी और मुस्लिम वोटर के साथ आने से उत्कृष्ट की जीत पक्की हो सकती है।

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