जीआरपी सिपाही सप्लाई करा रहा था नकली नोट:लखनऊ पुलिस ने 4 साथियों के साथ किया गिरफ्तार, मास्टरमाइंड की तलाश

लखनऊ4 महीने पहले
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नकली नोट चलाने वाले गिरोह के बारे में जानकारी देते डीसीपी पश्चिम सोमेन वर्मा। - Dainik Bhaskar
नकली नोट चलाने वाले गिरोह के बारे में जानकारी देते डीसीपी पश्चिम सोमेन वर्मा।

लखनऊ की तालकटोरा पुलिस ने नकली नोट छापने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए जीआरपी सिपाही समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह लोग एजेंट की मदद से शहर में नकली नोट चला रहे थे। इन नोटों की सप्लाई जीआरपी सिपाही की सरपरस्ती में हो रही थी। इनके पास से करीब 80 हजार रुपए के नकली नोट के साथ उनको छापने और स्कैन करने के उपकरण भी बरामद हुए हैं। पुलिस इस गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है।

मास्टरमाइंड हत्या के प्रयास में गया था जेल, साथी छापने लगा नोट

आरोपियों के पास से बरामद नकली नोट।
आरोपियों के पास से बरामद नकली नोट।

डीसीपी पश्चिम सोमेन वर्मा ने बताया कि शहर में नकली नोट छापने वाले गिरोह के पांच लोगों को मंगलवार रात को मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का संचालन हसनगंज निवासी सलमान कर रहा था। वहीं, नकली नोटों की सप्लाई का काम जीआरपी चारबाग में तैनात कोहडौर प्रतापगढ़ निवासी सिपाही राहुल सरोज करता था।

सलमान ने पूछताछ में बताया कि रिफा कॉलोनी हसियामऊ में किराए पर कमरा लेकर चोरी-छिपे असली नोट को स्कैन कर 500, 200,100, 50, 20 रुपए के नकली नोट प्रिंट करते थे। इनमें इस्तेमाल होने वाले कागज और असली नोट के कागज की मोटाई से लगभग बराबर होती थी। लोगों को शक न हो, इसके लिए नोट स्कैन करते वक्त आगे और पीछे हूबहू वही आकृति रखी जाती थी, जैसी वास्तविक नोट में होती है।

सुरक्षा धागा के स्थान पर ग्रीन ग्लिटर टेप का प्रयोग करते थे। जिसे कदीर और यूसुफ लगाता था। नोट छापने का काम सलमान और मुबस्सिर करता था। वहीं कटिंग का काम अरबाज के हवाले था। पूरे काम का मास्टर माइंड जमील है, जो हत्या के प्रयास में जेल जा चुका है।
मास्टरमाइंड बस सर्विस की आड़ में चलाता था कारोबार
डीसीपी पश्चिम सोमेन वर्मा ने बताया जांच में सामने आया है कि नकली नोट चलाने का काम चौक निवासी जमील करता था। जो एसबीटी नाम से आशियाना में बस सर्विस चला रहा था। जिसकी आड़ में नकली नोट एक जिले से दूसरे जिले सप्लाई करता था। इसी बीच जमील आशियाना से हत्या के प्रयास में जेल चला गया। इसके बाद सलमान ने यह काम जीआरपी सिपाही राहुल की मदद से शुरू कर दिया। राहुल की सलमान से चारबाग में सवारी भरने के दौरान मुलाकात हुई थी। राहुल ने गिरोह को नोट स्कैन करने से छापने तक के उपकरण उपलब्ध कराए थे।
10 हजार के बदले 60 हजार रुपए के देते थे नकली नोट

एडीसीपी पश्चिमी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बताया कि यह गिरोह नकली नोट चलने के लिए शहर में एजेंट बना रखा थे। जिन्हें दस हजार रुपए असली नोट के बदले 60 हजार के नकली नोट देते थे। सावेज और जमील के माध्यम से एजेंट बनाए जाते थे। जमील और यूसुफ फरार चल रहे हैं। पुलिस टीम ने लखनऊ के हसनगंज न्यू मदेगंज खदरा निवासी सलमान उर्फ आफताब, बिहार गोपालगंज फुलवरिया के मो. मुबस्सिर, लखनऊ हसनगंज रामलीला ग्राउंड के मो. अरबाज, लखनऊ ठाकुरगंज खिन्नी चौराहा निवासी सावेज खान और प्रतापगढ़ कोहडौर निवसी राहुल सरोज (जीआरपी सिपाही) को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से 5 सौ के 45, 2 सौ के 47, सौ रुपए के 190 और पचास के 27 नकली नोट बरामद हुए। वहीं दो सौ के 126, 50 के 80 और 20 के 30 आधे छपे हुए नोट मिले हैं। नकली नोट का कुल मूल्य 81550 रुपए है। इनको परीक्षण के लिए आरबीआई की प्रिंटिंग प्रेस नासिक भेजा जा रहा है।

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