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पेंशन, वेतन और नौकरी मांगों को लेकर हल्ला बोल:अगले 20 दिनों तक लखनऊ में रहेगा आंदोलन का माहौल,सरकार के खिलाफ ठंड में गर्मी बढ़ाएंगे कर्मचारी संगठन

लखनऊएक वर्ष पहले
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सरकार के खिलाफ गर्मी बढाएंगे कर्मचारी संगठन। - Dainik Bhaskar
सरकार के खिलाफ गर्मी बढाएंगे कर्मचारी संगठन।

चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजनीतिक दलों के साथ कर्मचारी और सामाजिक संगठन भी दबाव बनाने में जुट गए है। 22 नवंबर से 10 दिसंबर के बीच उप्र में सरकार के खिलाफ तमाम कर्मचारी संगठन हुंकार भरेंगे। इसमें बड़ी संख्या में लोग लखनऊ आएंगे। ऐसे में ट्रैफिक से लेकर शहर की माहौल खराब हो सकता है। कर्मचारी, किसान, शिक्षक, अभ्यर्थी समेत कई लोग अपनी - अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करेंगे। इसमें ज्यादातर बड़े प्रदर्शन राजधानी लखनऊ के इको गार्डेन में होने हैं। इन प्रदर्शनों की तैयारियां शुरू की जा चुकीं हैं। लगातार अपनी मांगों को लेकर अड़े ये संगठन गरमाए सियासी माहौल के बीच अपनी लड़ाई को अंतिम मोड़ देने में जुट गए हैं।

पुरानी पेंशन को लेकर भरेंगे हुंकार

छोटे - बड़े 100 से ज्यादा संगठन अपनी - अपनी मांगों को लेकर अटेवा पेंशन बचाओं मंच की ओर से आंदोलन किया जा रहा है। मंच के मुखिया विजय कुमार बंधु ने बताया कि इसकी तैयारी लंबे समय से की जा रही है। हम अपनी मांगों को लेकर साल 2013 से आंदोलनरत हैं। यूपी से ही पुरानी पेंशन की बहाली के आंदोलन की शुरूआत हुई थी। उन्होंने कहा कि 21 नवंबर को पूरे प्रदेश भर से लाखों की संख्या में शिक्षक और कर्मचारी इकट्ठा होंगे। शिक्षकों और कर्मचारियों की करीब 13 लाख से ज्यादा की संख्या है जो पुरानी पेंशन से मरहूम हैं। उन्होंने कहा कि 21 नवंबर को होने वाली पेंशन शंखनाद रैली न सिर्फ कर्मचारियों और शिक्षकों के हक का भविष्य तय करेगी बल्कि यूपी का सियासी मिजाज भी यहीं से तय होगा।

किसानों की पंचायत में सरकार पर हमला

तीनों कृषि काननू वापस हो गए है। लेकिन अभी भी 22 नवंबर की रैली कैंसिल नहीं हुई है। किसान नेताओं का कहना है कि भी उनकी तैयारी चल रही है। 20 तारीख से लोग आएंगे। उसके अलावा 21 नवंबर से ईको गार्डन में लंगर भी शुरू किया जाएगा। महापंचायत में देशभर से किसानों के जुटने का दावा किया जा रहा है। किसानों के अलावा कई सामाजिक संगठन भी इस महापंचायत का हिस्सा होंगे। संयुक्त किसान मोर्चा ने तय किया है कि वह लोग पूरे उप्र में बीजेपी को हराने के लिए भी प्रचार- प्रसार करेंगे। उसी कड़ी में यह महापंचायत भी होगी। महापंचायत यूपी का सियासी माहौल तय करेगा। उन्होंने दावा किया है कि इस महापंचायत में लाखों की संख्या में लोग जुटेंगे और सरकार के खिलाफ हुंकार भरेंगे।

शिक्षक अभ्यर्थी 23 को विधान भवन घेरेंगे

20 हजार पदों में धांधली का आरोप लगा रहे शिक्षक अभ्यर्थियों ने 23 नवंबर को विधान भवन घेरने की तैयारी करेंगे। पहले से ही इसका ऐलान होता आया है। इसमें ओबीसी और एसी वर्ग के लोग शामिल होंगे। पिछले 150 से ज्यादा दिनों से इसको लेकर आंदोलन चल रहा है। हालांकि विधान भवन का घेराप होना बेहद कठिन है। क्योंकि, पीए मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के दौरों को लेकर सुरक्षा बल और एजेंसियां पहले से ही मुस्तैद हैं।

शिक्षक कर्मचारियों का शुरू होगा कर्मिक आंदोलन

पुरानी पेंशन समेत कई मांगों को लेकर शिक्षक कर्मचारी कर्मिक आंदोलन करेंगे। कर्मचारी-शिक्षक संयुक्त मोर्चा की ओर से 27 नवंबर को पूरे प्रदेश में मसाल जुलूस निकाला जाएगा। जिसमें मुख्यमंत्री और जिलों में डीएम को ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही मांगों को नहीं माना गया तो 09 दिसंबर से पूरे प्रदेश में अनिश्चित कार्यबंदी की जाएगी। कर्मचारी-शिक्षक संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश के बैनर तले राज्य कर्मचारी, शिक्षक माध्यमिक, प्राथमिक, उच्च शिक्षा, स्थानीय निकाय/जल-कल राजकीय निगम, रोडवेज़, स्वास्थ्य सेवाएं, वन विभाग, विकास प्राधिकरण, विश्वविद्यालय, जवाहर भवन व इंदिरा भवन समेत सैकड़ों विभागों के संगठन इस आंदोलन का हिस्सा होंगे।

30 नवंबर शिक्षको का होगा आंदोलन

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ भी 30 नवंबर को राजधानी में पुरानी पेंशन की बहाली, कैश लेस इलाज, उपार्जित अवकाश, प्रत्येक शनिवार को अवकाश, प्रधानाध्यापक व छात्रों को बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था, संविल्लयन निरस्त करने, पदोन्नति, खाली पदों को भरे जाने, मृतक आश्रितों को नौकरी, रसोईयों का न्यूनतम मानदेय 10 हजार किए समेत 21 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन करेगा। इसमें पूरे प्रदेश से शिक्षकों के आने का दावा किया जा रहा है।

नाराजगी दूर करने के लिए बनाई समिति

कर्मचारी और शिक्षक संगठनों की नाराजगी को देखते हुए यूपी सरकार भी हरकत में आ गई है। इनकी मांगों के संबंध में वार्ता करने के लिए प्रदेश सरकार ने समितियां बनाईं हैं, जो इन संगठनों से बात करेंगी और इनके मुद्दों को लेकर सरकार को सुझाव देंगी। हालांकि, ये समितियां कितनी कारगर होंगी यह तो आने वाला भविष्य ही तय करेगा।