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  • The VTM Kit That KGMU Is Buying For Rs 35.40, UP Medical Supplies Corporation Is Buying It For Rs 7.25, The Difference Between The Two Is 5 Times.

कोरोना टेस्टिंग किट खरीद में धांधली?:लखनऊ का KGMU जिस VTM किट को 35 रुपए में खरीद रहा, यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरर्पोरेशन उसे 7 रुपए में; दोनों में 5 गुना का अंतर

लखनऊ21 दिन पहलेलेखक: सुनील कुमार मिश्रा
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कोरोना की टेस्टिंग किट खरीद में बड़ी गड़बड़ी नजर आ रही है। लखनऊ की किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) कोरोना टेस्टिंग की VTM किट 35.40 रुपए की दर से खरीद रहा है। उसी किट को यूपी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन लिमेटड (UPMSCL) महज 7.25 रुपए में खरीद रहा है।

KGMU इस किट को जिस एवेंटर परफॉर्मेंस मैटीरियल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से 35.40 रुपए में खरीद रहा है। वही कंपनी बिहार मेडिकल सर्विस एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन को ये किट 19.40 रुपए में सप्लाई कर रहा है। KGMU प्रशासन का कहना है कि उसने अच्छी क्वालिटी की किट खरीदे हैं, इसलिए महंगी हैं।

ऐसे में सवाल उठता है तो क्या यूपी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन और बिहार मेडिकल सर्विस एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन अपने-अपने राज्यों में घटिया किट की सप्लाई करके लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही हैं।

KGMU पिछले साल की ही दर पर खरीद रहा किट

पिछले साल अप्रैल के आखिर तक देश की कई फर्मा कंपनियों ने टेस्टिंग किट बनाना शुरू कर दिए। लेकिन कम प्रोडक्शन से उस वक्त किट के रेट मंहगे थे। उसी समय KGMU ने इसके खरीद की एक मानक दर तय कर ली। लेकिन धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ा और किट के दामों में भारी गिरावट आ गई। इसके बावजूद KGMU पुरानी दर पर ही किट खरीद रहा है।

KGMU ने अलग-अलग कंपनियों को दे रखा है ठेका

  • यह टेंडर 3 और 27 अप्रैल को जारी किए गए हैं। इसमें VTM किट सप्लाई का ठेका एवेंटर परफॉर्मेंस मैटीरियल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को दिया है।
  • RTPCR और RNA extraction kit की सप्लाई का ठेका मेसर्स इवोल्यूशन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड व मेसर्स जीनियस बायो सिस्टम पुणे को दिया गया है।
  • सभी किट की कुल लागत के रूप में KGMU प्रशासन इन कंपनियों को 103.98 करोड़ रुपए का भुगतान कर रहा है।

VTM किट कौन कितने में खरीद रहा है?

  • KGMU: एवेंटर परफॉर्मेंस मैटीरियल इंडिया लिमिटेड से 35.40 रुपए की दर से 30 हजार VTM किट खरीद रहा है।
  • बिहार मेडिकल सर्विस एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन: एवेंटर परफॉर्मेंस मैटीरियल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से यह किट 19.40 रुपए में खरीदा।
  • यूपी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन: मेसर्स रितिका पाण्डेय की फर्म 7.25 रुपए की दर से 21 लाख किट का एक करोड़ 52 लाख 25 हजार रुपए भुगतान किया।
  • झारखण्ड हेल्थ मेडिकल एजुकेशन एंड फैमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट: बायो सेंस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड से यह किट का 22.40 रुपए में खरीद रहा।
  • गुजरात मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन: मेरील डायग्नोस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड से यह किट 13.44 पैसे की दर से खरीद रहा।

RNA extraction kit कौन कितने में खरीद रहा?

  • KGMU: मेसर्स जीनियस बायो सिस्टम पूणे से 65.03 रुपए में खरीद रहा है।
  • गुजरात मेडिकल सप्लाई काॅर्पोरेशन: हिमीडिया लैबोरेटरी प्राइवेट लिमिटेड से यह किट 13.95 रुपए में खरीदी जा रही है।
  • उड़ीसा स्टेट मेडिकल कॉर्पोरेशन: एक्सवा सीकम बायोटेक से इसे 14 रुपए में खरीद रहा है।

RTPCR किट कौन कितने में खरीद रहा है?

  • KGMU: मेसर्स इवोल्यूशन प्रा. लिमिटेड से यह किट 50.40 रुपए में खरीद रहा है।
  • गुजरात मेडिकल कॉर्पोरेशन: जीसीसी बायोटेक इंडिया से यह किट 23 रुपए में खरीद रहा है।
  • झारखण्ड रूरल हेल्थ मिशन सोसायटी: जीसीसी बायोटेक इंडिया से 28 रुपए में खरीद रहा।
  • असम नेशनल हेल्थ मिशन: जेनस 2एमई प्राइवेट लिमिटेड से यह किट 30.88 रुपए में खरीद रहा है।

किट खरीद को लेकर KGMU के वीसी डॉ. विपिन पुरी का जवाब-

सवाल- कोरोना जांच के लिए कौन-कौन सी किट इस्तेमाल हो रही है?

जवाब- VTM, RNA extraction kit और RTPCR

सवाल- रोजाना कितनी जांचें हो रही हैं, कितने किट की जरूरत पड़ रही है?

जवाब- KGMU में रोज सात से आठ हजार जांच हो रही, पहली वेव से अब तक करीब 17 लाख टेस्ट किए जा चुके हैं।

सवाल- मेडिकल सप्लाई काॅर्पोरेशन जो किट 7.65 रुपए में खरीद रहा KGMU उसका 35.40 रुपए भुगतान क्यों कर रहा?

जवाब- बाजार में सस्ते किट भी बिक रहे, कोई घटिया क्वालिटी का खरीदेगा तो सस्ता ही मिलेगा, KGMU जिम्मेदार और प्रतिष्ठित संस्था है, इसलिए अच्छी गुणवत्ता वाला किट खरीदा जा रहा।

सवाल- तो क्या बाकी प्रदेश में घटिया क्वालिटी के किट से जांचें की जा रही हैं?

जवाब- किसी और संस्था की व्यवस्था पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, बस यह है कि KGMU किट की गुणवत्ता के आधार पर खरीद कर रहा है।

सवाल- आपकी खरीद प्रक्रिया पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं?

जवाब- KGMU, लोहिया संस्थान और पीजीआई के विशेषज्ञों की कमेटी खरीद का रेट तय कर रही है

  • किट खरीद पर मेडिकल सप्लाई काॅर्पोरेशन की एमडी कंचन वर्मा के जवाब-

सवाल- कोरोना टेस्टिंग के लिए रोज कितने किट की जरूरत पड़ रही?

जवाब- प्रदेश भर में हो रही टेस्टिंग के लिए सप्लाई काॅर्पोरेशन ही किट की खरीद कर रहा।

सवाल- एमएससी जो किट 7 रुपए में खरीद रहा KGMU उसका 35 रुपए से भुगतान कर रहा?

जवाब- सबकी अपनी खरीद प्रक्रिया है, कोई किस रेट में खरीद रहा यह देखना शासन का काम है।

सवाल- KGMU वीसी कह रहे कि कॉर्पोरेशन घटिया क्वाॅलिटी के किट खरीद रहा इसलिए सस्ता है?

जवाब- हर प्रोडेक्ट का स्पेसिफिकेशन होता है, इसे कोई भी देख सकता है, जेम में वही कंपनियां पार्टीसिपेट कर सकती हैं, जो सरकार के मानक पर खरी होंगी।

  • स्वास्थ्य महानिदेशक डीएस नेगी से बातचीत

सवाल- कोराना टेस्टिंग किट की खरीद में भारी धांधली की बात सामने आ रही है आपको जानकारी है?

जवाब- ऐसी कोई जानकारी मुझे नहीं मिली।

सवाल- मेडिकल सप्लाई काॅर्पोरेशन जो किट सात रुपए में खरीद रहा KGMU प्रशासन उसका 35 रुपए कैसे भुगतान कर रहा।

जवाब- इसके बारे में दोनों संस्थानों के उच्चाधिकारियों से बात करके जानकारी लेनी पड़ेगी।

सवाल- प्रदेश भर में कितने टेस्टिंग लैब हैं और रोजाना कितने किट की खपत हो रही।

जवाब- इस बारे में मेडिकल सप्लाई काॅर्पोरेशन ही बता सकता है।

किट खराब होने पर रिजल्ट नहीं आता है

आईएमए के सदस्य और पैथोलॉजी संचालक डॉ. पीके गुप्ता का कहना है कि बाजार में कोविड टेस्टिंग किट बनाने वाली कंपनियों की भरमार है। ऐसे में चिकित्सा संस्थानों को रेट और किट की गुणवत्ता को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। सस्ते दाम पर खरीदे जा रहे किट का स्ट्रिप जरा भी खराब होने पर उसका सही रिजल्ट नहीं मिलेगा। कुछ बड़ी कंपनियां एक ही किट अलग-अलग संस्थाओं को अलग-अलग रेट पर बेंच रही हैं।

इसके लिए शासन को कोई निर्धारित मानक दर तय करना चाहिए, ताकि पैसे की बरबादी न हो और क्वॉलिटी से खिलवाड़ न किया जा सके। किट की क्वाॅलिटी की वजह से बहुत सारे मामलों में कोविड होते हुए भी डाइग्नोस नहीं हुआ।

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