5 जनवरी तक लखनऊ में धारा 144 लागू:धरना-प्रदर्शन पर प्रतिबंध, मंदिरों-मल्टीप्लेक्सों में भी पाबंदियां लागू, रैलियों पर सभी दल चुप

लखनऊ7 महीने पहले

लखनऊ में मंगलवार से धारा 144 लागू कर दी गई है। इस आदेश के बाद विधानसभा के आसपास धरना-प्रदर्शन पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन ने यह फैसला कोरोना के बढ़ते मामलों, क्रिसमस, न्यू ईयर का जश्न और प्रवेश परीक्षाओं को देखते हुए लिया है। जेसीपी लॉ एंड आर्डर पीयूष मोर्डिया ने यह आदेश जारी किया है।

इसके साथ ही केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश शासन द्वारा कोरोना-कर्फ्यू के दौरान जारी गाइडलाइन का भी पालन कराया जाएगा, जिसके तहत सभी हॉल, मल्टीप्लेक्स, स्पोर्ट्स स्टेडियम आदि 50 फीसदी क्षमता के साथ ही खुलेंगे, जबकि स्वीमिंग पूल पूरी तरह से बंद रहेगा। मंदिरों में भी श्रद्धालु एक साथ 50 की संख्या में ही दर्शन कर पाएंगे।

उनके अनुसार विधानसभा के आसपास धरना प्रदर्शन या वाहन के साथ प्रदर्शन को धारा 144 का उल्लंघन माना जाएगा। कंटेनमेंट जोन को छोड़कर धर्म स्थलों पर 50 से ज्यादा लोग जमा नहीं हो सकेंगे। शादी समारोहों और बंद स्‍थानों पर एक समय में 100 से ज्‍यादा लोगों के इकट्ठा होने पर भी रोक रहेगी।

ये हैं 10 बड़ी पाबंदियां

  • विधानसभा के आसपास किसी भी प्रकार के धरना प्रदर्शन पर प्रतिबंध।
  • कोरोना की सभी गाइडलाइन का कड़ाई से कराया जाएगा पालन।
  • रेस्टोरेंट, होटल, सिनेमा हॉल, मल्टीप्लेक्स, जिम, स्टेडियम 50 फीसदी क्षमता के साथ खुलेंगे।
  • अब घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनना अनिवार्य होगा।
  • बंद जगहों पर होने वाले आयोजनों में 100 से ज्यादा व्यक्ति शामिल नहीं हो सकेंगे।
  • खुले स्थानों में क्षेत्रफल के अनुसार होंगे आयोजन, लेकिन प्रवेश द्वार पर कोविड हेल्प डेस्क बनाना अनिवार्य होगा।
  • धर्म स्थलों में 50 से अधिक श्रद्धालुओं के एक बार में इकट्ठा होने पर प्रतिबंध रहेगा।
  • सरकारी भवनों के आसपास ड्रोन कैमरे से शूटिंग प्रतिबंध रहेगा।
  • रात 10:00 बजे के बाद डीजे लाउडस्पीकर पर पूरी तरीके से प्रतिबंध होगा।
  • छतों पर ईंट-पत्थर और ज्वलनशील पदार्थ रखना पूरी तरीके से प्रतिबंध होगा।

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एक तरफ धारा 144, दूसरी तरफ पॉलिटिकल रैलियों की भरमार

मंगलवार को गोरखपुर में अपनी रैली में आई भीड़ को देख कर पीएम मोदी गदगद हो गए। वहां मोदी के साथ सीएम योगी भी मौजूद थे, लेकिन लखनऊ में 144 लगाई जा रही है।
मंगलवार को गोरखपुर में अपनी रैली में आई भीड़ को देख कर पीएम मोदी गदगद हो गए। वहां मोदी के साथ सीएम योगी भी मौजूद थे, लेकिन लखनऊ में 144 लगाई जा रही है।
मोदी-योगी के अलावा अखिलेश और जयंत भी भीड़ जुटाने में पीछे नहीं। मेरठ में मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह ने रैली की। दोनों नेताओं ने कहा कि रैली में आई भीड़ से वे बहुत खुश हैं।
मोदी-योगी के अलावा अखिलेश और जयंत भी भीड़ जुटाने में पीछे नहीं। मेरठ में मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह ने रैली की। दोनों नेताओं ने कहा कि रैली में आई भीड़ से वे बहुत खुश हैं।

लखनऊ में पिछले 15 दिन में 3 बड़े प्रदर्शन हुए

पिछले 15 दिन में लखनऊ में 3 बड़े प्रदर्शन हुए हैं। इसमें प्रदर्शनकारियों की संख्या 50 हजार से डेढ़ लाख तक रही है। सबसे पहले अटेवा पेंशन बचाओ मंच की ओर से 21 नवंबर को आंदोलन किया गया था। इसमें पूरे प्रदेश से करीब 50 हजार कर्मचारी और शिक्षक आए थे। उस दौरान पूरे दिन ईको गार्डन के आसपास जाम लग गया था। उसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने लखनऊ में रैली की थी। उसमें भी काफी भीड़ हुई थी। यह आंदोलन 22 नवंबर को हुआ था। उसके बाद 30 नवंबर को कर्मचारियों और शिक्षकों ने फिर से पुरानी पेंशन के लिए आंदोलन किया था। इस आंदोलन में करीब डेढ़ लाख लोग और 10 हजार से ज्यादा गाड़ियां आ गई थीं। इसको संभालने में पुलिस-प्रशासन की हालत खराब हो गई थी।

सरकार कहीं डर तो नहीं गई है

लोगों के मन में यह सवाल है कि अगर रैली की भीड़ से कोरोना नहीं फैल रहा है, तो छात्रों-कर्मचारियों के प्रदर्शन से कैसे फैल सकता है? यह कहीं सरकार की आंदोलनों को दबाने की रणनीति तो नहीं?

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