भड़ाना नहीं जाते तो हार.. चले गए तो जीत तय:इस बार मीरापुर नहीं जेवर से लड़ेंगे भड़ाना, जातीय समीकरण से समझिए पाला बदलने का गणित

लखनऊ4 महीने पहले

गुर्जर समुदाय के बड़े नेता अवतार सिंह भड़ाना के रालोद में शामिल होने के बाद जेवर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण बदल गया है। गुर्जर वोटर्स के बीच मजबूत जनाधार अवतार का है। जेवर सीट पर उन्हें गुर्जर वोटर्स का सपोर्ट मिलना भी तय है। साथ ही सपा और रालोद गठबंधन की वजह से मुस्लिम, एससी और अन्य जातियों के वोटर भी उनके लिए मददगार साबित होंगे।

ठीक चुनाव से पहले इस दलबदल के पीछे मीरापुर विधानसभा सीट पर भाजपा की टाइट होती पोजिशन मानी जा रही है, क्योंकि 2017 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ 193 वोट से भाजपा अपनी नाक बचा सकी थी। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि किसान आंदोलन के बाद पश्चिम उत्तर प्रदेश में चुनावी समीकरण पूरी तरह से बदल चुके हैं। ऐसे में भाजपा को डैमेज कंट्रोल के लिए जुटना होगा।

जेवर विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण

बात अगर जेवर विधानसभा सीट के जातिगत समीकरणों की जाए तो जेवर सीट पर गुर्जर, मुस्लिम और एससी वोटर सबसे ज्यादा हैं। इसके अलावा ठाकुर समुदाय भी अच्छी पकड़ रखता है। पिछले चुनावों में भाजपा के धीमेंद्र सिंह को गुर्जर, ठाकुर और जाट वोटरों का अच्छा फायदा मिला था। जिसके चलते उन्हें इस सीट पर जीत हासिल हुई थी।

लेकिन अगर इससे पहले के इतिहास पर नजर डाले तो पिछले 3 विधानसभा चुनाव में लगातार बसपा की जीत हो रही थी। नए गठबंधन और गुर्जर नेता अवतार सिंह भड़ाना के मैदान में आने के बाद हवा उनकी पक्ष में बहने के आसार हैं।

पहली बार सपा-रालोद का गठबंधन फाइट में
जेवर विधानसभा सीट 2012 के परिसीमन के पहले तक रिजर्व सीट थी। इस सीट पर अब तक हुए पिछले 9 चुनावों में तीन-तीन बार कांग्रेस-बसपा और बीजेपी को जीत मिलती रही है। जेवर विधानसभा में 59% से ज्यादा शहरी मतदाता हैं। पिछले 2 चुनावों में भी यहां मुकाबला कांग्रेस-बसपा और भाजपा इन तीनों पार्टियों के बीच ही रहा है। 2017 में भी मुख्य मुकाबला बीएसपी और बीजेपी में देखने को मिला था। पहली बार यहां सपा-रालोद का गठबंधन फाइट में आ चुका है।

किसान आंदोलन के समय किया था पार्टी छोड़ने का ऐलान

पश्चिमी यूपी के मीरापुर से विधायक अवतार सिंह भड़ाना ने पिछले साल किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए भाजपा छोड़ने का ऐलान कर दिया था। मेरठ और फरीदाबाद से सांसद रहे अवतार सिंह भड़ाना किसान आंदोलन के दौरान काफी सक्रिय रहे। उन्हें गुर्जर समुदाय का बड़ा नेता माना जाता है। वह पिछले कुछ समय से समुदाय को एकजुट करने की कोशिशों में जुटे हुए थे। अब अवतार सिंह भड़ाना के आने से मीरापुर विधानसभा सीट पर रालोद की दावेदारी बढ़ गई है। वहां सपा अपना प्रत्याशी खड़ा करना चाह रही थी।

जेवर सीट पर जातीय समीकरण को भी समझिए...

भाजपा के साथ रहते हुए

ठाकुर 60 हजार (भाजपा के साथ)
गुर्जर 85 हजार (भाजपा के साथ)
बनिया, वैश्य 20 हजार (भाजपा के साथ)
एससी 70 हजार ( बसपा-सपा में बंटा)
मुस्लिम 85 हजार (सपा-बसपा में बंटा)
जाट 35 हजार (भाजपा-सपा में बंटा)
अन्य जातिया 80 हजार (भाजपा-बसपा में बंटा)

रालोद में जाने के बाद

ठाकुर 60 हजार (भाजपा के साथ) बनिया, वैश्य 20 हजार (भाजपा के साथ) गुर्जर 85 हजार (रालोद के साथ) एससी 70 हजार ( बसपा-सपा में बंटा) मुस्लिम 85 हजार (सपा के साथ) जाट 35 हजार (भाजपा-सपा में बंटा) अन्य जातिया 80 हजार (भाजपा-बसपा में बंटा)

विधानसभा चुनाव 2017 में मीरापुर और जेवर सीट के वोट शेयरिंग कुछ इस तरह रहे ...

जेवर सीट पर वोट शेयरिंग
भाजपा - 49.01%
बसपा - 38.45%
सपा -6.30%
रालोद-4.29%
नोटा- 0.67
मीरापुर सीट पर वोट शेयरिंग
भाजपा - 33.78%
सपा - 33.68%
बसपा -19.42%
रालोद -11.14 %

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