नामी कंपनियों की फ्रैंचाइजी दिलाने के नाम पर ठगी:कंपनी की मिलती जुलती वेबसाइट बनाकर लोगों को करते थे गुमराह, नालंदा से तीन आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ2 महीने पहले
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पुलिस की गिरफ्त में ठग। - Dainik Bhaskar
पुलिस की गिरफ्त में ठग।

लखनऊ की साइबर सेल ने स्पूफिंग तकनीक से हल्दीराम और किआ मोटर्स आदि कई नामी फर्म की मिलती जुलती वेबसाइट तैयार करने ठगी करने वाले तीन लोगों को बिहार नालंदा से गिरफ्तार कर लिया। इन लोगों ने कई लोगों को नामी कंपनियों की फ्रैंचाइजी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी की है। इनके पास से पुलिस ने 30 लाख रुपये, एक टाटा हैरियर कार और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। वहीं गिरोह के फरार दो सदस्यों की तलाश कर रही है।
नाइजीरियन गिरोह से मिला इस ठगी के गिरोह का सुराग
इंस्पेक्टर मथुरा राय ने बताया कि 30 अप्रैल 2021 को एल्डिको उद्यान निवासी देवव्रत चतुर्वेदी ने हल्दीराम कंपनी की एजेंसी दिलाने के नाम पर तीन लाख रुपये की ठगी का मामला दर्ज कराया था। जांच पड़ताल के बीच 21 अगस्त को साइबर क्राइम सेल ने लिंगो ऑयल के नाम पर धोखाधड़ी कर 38 लाख रुपये ठगी के आरोप में नाइजीरियन नागरिक जॉन उर्फ पैट्रिक उर्फ ओगू इफानी माइकल को पकड़ा था। जिससे पता चला था कि बिहार नालंदा में भी एक गिरोह फ्रैंचाइजी दिलाने के नाम पर ठगी कर रहा है। जिसके बाद एक टीम बिहार भेजी गई। जहां टीम ने साक्ष्यों के आधार पर नालंदा निवासी विवेकानन्द उर्फ मुन्ना, सचिदानन्द निवासी नालंदा और शिवेंद्र निवासी सीतामढ़ी को गिरफ्तार किया। वहीं इस गिरोह के दो सदस्य नवादा के कन्हैया कुमार और नालंदा का सुमन कुमार भागने में कामयाब रहा।
एमबीए और बीटटेक किए हुए हैं ठग
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि विवेकानंद एमबीए (मार्केटिंग) किए हुआ है। वहीं सचिदानन्द ने बीएससी और शिवेंद्र ने बीटेक (सिविल) किए हुए है। यह लोग नौकरी से अच्छी कमाई न होने पर ठगी की राह पर चल दिए। जिसके बाद वेबसाइट स्पूफिंग कर धोखाधड़ी कर रहे थे।
किआ की फ्रैंचाइजी दिलाने के नाम पर की थी 1.21 करोड़ की ठगी
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि इस गिरोह ने जौनपुर नईगंज निवासी विनोद गुप्ता से भी ठगों ने करीब1.21 करोड की ठगी की थी। पीड़ित ने इसका मुकदमा 29 अगस्त को जिले के सदर कोतवाली में लिखाया था। इसमें इन लोगों ने किआ मोटर्स के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाई थी। साथ ही किआ के नाम से एक बैंक अकाउंट भी खुलवाया था। विनोद ने को ठगों स्पूफिंग कर बनाई गई वेबसाइट का एड्रेस दिया था।
क्यो होती है स्पूफिंग
वेबसाइट की स्पूफिंग भी की जाती है। इसमें ठग नामी कंपनियों की वेबसाइट के नाम से मिलती हुई साइट तैयार करते हैं। साथ ही सोशल साइट पर ज्यादा फ्लेश हो इसके लिए साफ्टवेयर की मदद से वेबसाइट को ज्यादा से ज्यादा बार खोला जाता है। जिससे यह वेबसाइट इंटरनेट सर्च इंजन का इस्तेमाल करने सबसे ऊपर दिखती है।

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