ट्विटर पर फेक वीडियो वायरल करने का मामला:गाजियाबाद पुलिस ने जिन 9 लोगों पर FIR की इनमें दो पत्रकार, एक लेखक और एक कांग्रेस प्रवक्ता; मीडिया संस्थान और ट्विटर भी फंसा

लखनऊ6 महीने पहले
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सोशल मीडिया पर गाजियाबाद में मुस्लिम बुजुर्ग के साथ मारपीट और जबरन जय श्री राम बुलवाने का फेक वीडियो वायरल करने के मामले में गाजियाबाद पुलिस ने सख्ती शुरू कर दी है। पुलिस ने वीडियो वायरल करने वाले जिन 9 लोगों पर FIR दर्ज की है, उनमें ट्विटर के अलावा दो पत्रकार, एक लेखक, एक छात्रनेता और एक मीडिया संस्थान भी शामिल हैं। पढ़िए किसके-किसके खिलाफ दर्ज हुआ है मुकदमा...

इन 6 लोगों पर दर्ज हुआ है मुकदमा
1. मोहम्मद जुबैर

जुबैर फैक्ट चेकर न्यूज वेबसाइट altnews के को-फाउंडर हैं।
जुबैर फैक्ट चेकर न्यूज वेबसाइट altnews के को-फाउंडर हैं।

जुबैर फैक्ट चेकर न्यूज वेबसाइट altnews के को-फाउंडर हैं। इनकी वेबसाइट सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली फेक न्यूज को चेक करके उसके बारे में लोगों को बताती हैं। इस बार जुबैर पर खुद फेक न्यूज फैलाने का आरोप लगा है। इनकी कंपनी ने ही गाजियाबाद में बुजुर्ग व्यक्ति की मारपीट का फैक्ट चेक किया गया था। फेक वीडियो को भी जुबैर ने सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसके बाद गाजियाबाद पुलिस ने जुबैर के फैक्ट चेक का खंडन करते हुए टि्वटर अकाउंट ब्लॉक कर दिया।

2. राना अय्यूब

राना अय्यूब
राना अय्यूब

मुम्बई में रहने वाली राना अय्यूब वाशिंगटन पोस्ट की पत्रकार हैं। राना अय्यूब पर भ्रामक और गलत तरीके से पोस्ट वायरल करने का आरोप लगा है।

3. डॉ. शमा मोहम्मद

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं, जो कि दिल्ली में रहती हैं।
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं, जो कि दिल्ली में रहती हैं।

4. सबा नकवी

साहित्यकार और लेखक सबा नक़वी ने कई किताबें लिखी हैं। इन्होंने 'वाजपेयी से मोदी 2018 तक' कि किताब लिखी हैं। दिल्ली में रहने वाली सबा नक़वी ने गाजियाबाद के बुजुर्ग के वीडियो को रिट्वीट करते हुए उसे वायरल किया था।

5. मशकूर उस्मानी

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे हैं। मशकूर उस्मानी बिहार के जाले विधानसभा से चुनाव लड़ चुके हैं। सोशल मीडिया पर मशहूर उस्मानी ने अपना पता अलीगढ़ दिल्ली और दरभंगा बिहार लिख रखा है।

6. सलमान निजामी

कांग्रेस के नेता हैं और टीवी चैनलों पर डिबेट में शामिल होते हैं।

3 संस्थानों पर भी मुकदमा
1. दि वायर : न्यूज वेबसाइट है। इसके खिलाफ फेक न्यूज प्रकाशित करने और लोगों को गुमराह करने का आरोप लगा है।
2. ट्विटर कम्यूनिकेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
3. INC के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर भी FIR हुई है।

मारपीट करने वाले तीन गिरफ्तार, अन्य मामले की जांच जारी
SSP गाजियाबाद अमित पाठक ने बताया कि बुजुर्ग से मारपीट के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पाठक ने कहा कि इसमें किसी तरह का धार्मिक और सांप्रदायिक एंगल नहीं है। बुजुर्ग के साथ मारपीट हुई है, लेकिन जबरन जय श्री राम बुलवाने और दाढ़ी काटने जैसी बात गलत है। जो भी गलत सूचनाएं फैलाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

इस मामले में राहुल गांधी ने भी ट्वीट किया था, जिस पर योगी ने पलटवार किया था।
इस मामले में राहुल गांधी ने भी ट्वीट किया था, जिस पर योगी ने पलटवार किया था।

समाज में अशांति फैलाने का मकसद था
FIR में कहा गया है कि इन सभी लोगों ने ट्विटर पर सच्चाई को परखे बिना ही घटना को सांप्रदायिक रंग दिया। इनकी ओर से समाज में शांति भंग करने और धार्मिक समूहों को भड़काने के मकसद से वीडियो वायरल किया गया। पुलिस के मुताबिक, घटना पीड़ित और शरारती तत्वों के बीच व्यक्तिगत विवाद की वजह से हुई। इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों ही संप्रदाय के लोग शामिल थे, लेकिन आरोपियों ने घटना को इस तरह पेश किया कि दोनों धार्मिक समूहों के बीच तनाव पैदा हो।

क्या है पूरा मामला

  • उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस ने लोनी इलाके में अब्दुल समद नाम के एक बुजुर्ग के साथ मारपीट और अभद्रता किए जाने का वीडियो वायरल होने के बाद FIR दर्ज की थी। इन सभी पर घटना को गलत तरीके से सांप्रदायिक रंग देने की वजह से यह एक्शन लिया गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि एक बुजुर्ग मुस्लिम को पीटा गया और उसकी दाढ़ी काट दी गई।
  • पुलिस के मुताबिक, मामले की सच्चाई कुछ और ही है। पीड़ित बुजुर्ग ने आरोपी को कुछ ताबीज दिए थे, जिनके परिणाम न मिलने पर नाराज आरोपी ने इस घटना को अंजाम दिया। लेकिन, ट्विटर ने इस वीडियो को मैन्युप्युलेटेड मीडिया का टैग नहीं दिया। पुलिस ने यह भी बताया कि पीड़ित ने अपनी FIR में जय श्री राम के नारे लगवाने और दाढ़ी काटने की बात दर्ज नहीं कराई है।

घटना पर सियासत भी
मामले में सियासत भी हो रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि ऐसी क्रूरता समाज और धर्म दोनों के लिए शर्मनाक है। उन्होंने ट्वीट किया कि मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि श्रीराम के सच्चे भक्त ऐसा कर सकते हैं। ऐसी क्रूरता मानवता से कोसों दूर है और समाज व धर्म दोनों के लिए शर्मनाक है।

इसका जवाब देते हुए UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया, 'प्रभु श्रीराम की पहली सीख है- सत्य बोलना, जो आपने कभी जीवन में किया नहीं। शर्म आनी चाहिए कि पुलिस द्वारा सच्चाई बताने के बाद भी आप समाज में जहर फैलाने में लगे हैं।'

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