कल, आज, कल (दैनिक भास्कर की विशेष सीरीज):माफिया न होते मुख्तार तो एक प्रोफेसर होते; देखिए 20 साल बाद वह कैसे और क्या करेंगे

लखनऊ10 महीने पहले
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मुख्तार अंसारी पूर्वांचल के माफिया न होते, तो कॉलेज के प्रोफेसर हो सकते थे। ज्योतिष की निगाह से 20 साल बाद वह एक पॉलिटिशियन और बिजनेसमैन हो सकते हैं। दैनिक भास्कर की विशेष सीरीज 'कल, आज, कल' प्रस्तुति के लिए मशहूर ज्योतिषाचार्य नस्तूर बेजान दारुवाला ये भविष्यवाणी करते हैं।

नस्तूर कहते हैं कि ज्योतिष की नजर से मुख्तार के ग्रह योग ऐसे हैं कि उनकी राजनीति का सूर्य अस्त नहीं हो सकता है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद राजनीति में उनका नाम बना रहने वाला है। वह आने वाले सालों में असहाय लोगों के लिए कुछ बड़ा कर सकते हैं। सुझाव ये है कि अगले 10 साल जोखिम वाले हैं। उन्हें अपने शत्रुओं से सावधान रहने की जरूरत है। लीगल झमेलों से उन्हें बचना चाहिए।

उन्होंने बताया कि उनकी कुंडली में बुध वृषभ राशि में, जबकि गुरु मीन राशि में है। इसके कारण जेल में होने के बावजूद वो मजबूत बने हुए हैं। लगातार चर्चा में हैं। चंद्र तुला राशि में हैं, जिसकी वजह से दिमाग बहुत पावरफुल है। हिम्मत भी दिखती है उनमें। किसी भी तरह की परिस्थिति का सामना करने में सक्षम हैं। ऐसे योग हैं कि अगर वो इलेक्शन में खड़े होते हैं तो फिर जीत सकते हैं।

विधानसभा चुनाव 2022 में भास्कर प्रतिदिन दिग्गज नेताओं के कल, आज, कल के बारे में आपको बताएगा। इस प्रस्तुति में आने वाले कल में मुख्तार अंसारी की तस्वीर को फोटोशॉप की मदद से तैयार किया गया है।

  • मुख्तार का जन्म यूपी के गाजीपुर में 30 जून 1963 को हुआ था।
  • इनके दादा मुख़्तार अहमद अंसारी कांग्रेस के प्रेसिडेंट थे।
  • उनकी शुरुआती पढ़ाई युसूफपुर गांव में हुई थी।
  • मुख़्तार को हॉकी, फुटबॉल और क्रिकेट बहुत पसंद था।
  • उनके दो बेटे अब्बास अंसारी और उमर अंसारी हैं।
  • 1988 में पहली बार हत्या के एक मामले में मुख्तार का नाम आया था।
  • 1990 में पूर्वांचल के मऊ, गाजीपुर, वाराणसी और जौनपुर में अपराधों में उसका नाम आने लगा।
  • 1995 में मुख़्तार पॉलिटिक्स में उतर गया।
  • 1996 में बसपा के टिकट पर मुख्तार विधायक बना।
  • 2002 में ब्रजेश सिंह और मुख़्तार गैंगवार में 3 लोग मारे गए।
  • 2002 के विधानसभा चुनाव में मऊ सीट से निर्दलीय मुख्तार की जीत हुई।
  • 2005 में मुख़्तार जेल में था, जब कृष्णानंद राय को उसने खुली सड़क पर मरवा दिया।
  • 2007 के चुनाव में फिर मुख्तार विधायक का चुनाव जीत गया।
  • 2008 में मुख़्तार ने बसपा की ओर वापस रुख़ किया। दावा किया कि उसे फंसाया गया था।
  • मायावती ने मुख़्तार को 'गरीबों का मसीहा' बताया और चुनाव प्रचार शुरू हो गया।
  • 2009 के लोकसभा चुनाव में मुख़्तार बनारस से खड़ा हुआ और बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी से हार गया।
  • गाजीपुर के जेल में रेड में पता चला कि मुख्तार की बैरक में सभी सुविधाएं हैं। तब उसे मथुरा की जेल में भेजा गया।
  • 2010 में बसपा ने मुख़्तार के आपराधिक मामलों को स्वीकारते हुए उसे पार्टी से निकाल दिया।
  • अब मुख़्तार ने अपने भाइयों के साथ नई पार्टी कौमी एकता दल बनाया।
  • अपनी पार्टी से खड़ा हुआ मुख्तार 2012 में मऊ सीट से चुनाव जीत गया।
  • 2014 में मुख़्तार ने बनारस से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया। बाद में नाम वापस लिया।
  • 2016 में सपा की सदस्यता मुख्तार चाहता था। लेकिन ऐसा हो नहीं सका।
  • 2017 के विधानसभा चुनाव में मुख्तार को बसपा के टिकट पर फिर जीत मिली।

मुख्तार अंसारी के कुछ अच्छे पहलू भी हैं...

  • उसके दादा डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान 1926-27 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
  • वो महात्मा गांधी के बेहद करीबी माने जाते थे। उनकी याद में दिल्ली की एक रोड उनके नाम पर है।
  • भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी मुख्तार के रिश्ते में चाचा लगते हैं।
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