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CBSE से अलग होगा UP बोर्ड का इवैल्यूएशन फॉर्मूला:12वीं के रिजल्ट में प्री बोर्ड पर कम, 10वीं व 11वीं के मार्क्स पर ज्यादा होगा जोर; CM लगाएंगे फाइनल मुहर

लखनऊ2 महीने पहले
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9वीं और 10वीं के प्री-बोर्ड के स्कोर के आधार पर अंक देकर रिजल्ट जारी किया जाएगा। - Dainik Bhaskar
9वीं और 10वीं के प्री-बोर्ड के स्कोर के आधार पर अंक देकर रिजल्ट जारी किया जाएगा।

यूपी के माध्यमिक शिक्षा परिषद में बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन का फॉर्मूला सीबीएसई के पैटर्न पर नहीं होगा। सटीक फॉर्मूले को लेकर मंथन का दौर अभी भी जारी है। परीक्षा न कराने का निर्णय भले ही सीबीएसई के बाद यहां भी लिया गया हो, पर मूल्यांकन का तरीका दोनों जगह का भिन्न होगा। इतना फिलहाल तय माना जा रहा है। इसके पीछे दलील यह दी जा रही है कि दोनों जगह की परीक्षाओं में बड़ा अंतर पहले से ही रहा है और सीबीएसई के फॉर्मूले को अमल में लाने से स्टूडेंट्स का अहित होने की संभावना ज्यादा है। हालांकि, चर्चा यह भी है कि तय फॉर्मूले को एक बार सीएम के समक्ष रखा जाएगा और उनकी सहमति के बाद ही इसे लागू किया जाएगा।

विभाग के अधिकारियों की माने तो माध्यमिक शिक्षा परिषद को 10वीं बोर्ड परीक्षा के लिए ज्यादा समस्या नजर नहीं आती। यहां पर स्टूडेंट्स को 9वीं और 10वीं के प्री-बोर्ड के स्कोर के आधार पर अंक देकर रिजल्ट जारी किया जाएगा। वहीं, 12वीं के मामले में पेंच फसा नजर आता है। इसमें 10वीं कक्षा के 50 प्रतिशत, 11वीं कक्षा के 40 प्रतिशत और 12वीं प्री-बोर्ड के स्कोर के 10 प्रतिशत अंक के आधार पर मूल्यांकन करने की बात सामने आ रही है। मगर इसको लेकर फिलहाल कोई खुलकर नहीं बोल रहा है।

विभाग के आला अधिकारियों की बैठक लगातार जारी है और विभिन्न संगठनों व एक्सपर्ट्स से मिले करीब 4 हजार से ज्यादा सुझावों पर अध्ययन करके जुगत निकालने का प्रयास भी चल रहा है। हालांकि, बोर्ड समिति की सिफारिश के आधार पर मूल्यांकन का फॉर्मूला लगभग तय माना जा रहा है। स्टूडेंट्स को परीक्षा विकल्प देना भी तय है। यदि स्टूडेंट्स रद्द की गई परीक्षा के अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, तो बोर्ड उनके लिए परीक्षा जरूर करवाएगा।

एक्सपर्ट का यह रहा है सुझाव -

  • रेगुलर छात्र - छमाही अथवा प्री बोर्ड के अंक के आधार पर मूल्यांकन किया जा सकता है। जरुरत पड़ने पर उनके हाई स्कूल व 11वीं के मार्क्स भी देखकर मॉडरेशन किया जाए।
  • जो प्राइवेट छात्र हैं, उनके लिए समस्या है - उन्हें 11वीं के आधार पर या फिर पुनः परीक्षा कराई जा सकती है।
  • विनियम के अंतर्गत एकल विषय छात्र- ऐसे छात्रों की परीक्षा करानी ही पड़ेगी, जो एक विषय की अहर्ता पाने के लिए आवेदन करते हैं।
  • जो छात्र इस मूल्यांकन से संतुष्ट न हो उन्हें परीक्षा में बैठने का अवसर दिया जाएं।
  • मूल्यांकन का बेस - औसत से अधिक अंक ही होना चाहिए,जिससे छात्रों का अहित न हो।

एक नजर आकंड़ों पर
हाई स्कूल -

  • पंजीकृत छात्र - 1674022,
  • पंजीकृत छात्राएं -1320290,
  • कुल परीक्षार्थी संख्या - 2994312,

इंटरमीडिएट -

  • पंजीकृत छात्र - 1473771,
  • पंजीकृत छात्राएं -1135730,
  • कुल परीक्षार्थी संख्या - 2609501,
  • कुल बोर्ड परीक्षा केंद्र - 8513,
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