योगी को CM बनाएंगे उनके विरोधी माने जाने वाले नेता:क्योंकि वोट ब्राह्मणों का वही ला सकते हैं...बड़ा सवाल क्या वे ऐसा करेंगे?

लखनऊएक वर्ष पहलेलेखक: आदित्य तिवारी
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उत्तर प्रदेश में नाराज ब्राह्मणों को मनाने के लिए अगले 10 दिनों तक यूपी के 32 ब्राह्मण नेता घर-घर पहुंचेंगे। 26 दिसम्बर को दिल्ली में केन्द्रीय मंत्री व यूपी चुनाव प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान के आवास पर एक अहम बैठक हुई। इसमें यूपी से आने वाले 32 बड़े ब्राह्मण नेता मौजूद रहे। राज्यसभा सांसद शिव प्रताप शुक्ला को नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है। बैठक में सभी से फीडबैक भी लिया गया।

धर्मेन्द्र प्रधान ने यह जानने की कोशिश की आखिर ऐसा क्या हो गया है, इसकी क्या वजह रही। इस बैठक में पांच प्रमुख बिन्दुओं पर चर्चा हुई। बैठक में सभी नेताओं के फोन जमा करा लिए गए थे। खास बात यह है कि, राजस्थान गर्वनर कलराज मिश्र की एंट्री अनऑफिशियल हुई है।

1. शिव प्रताप शुक्ला (राज्यसभा सांसद) : गोरखपुर शहर सीट से चार बार विधायक के बाद पांचवें चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने हिन्दू युवा वाहिनी के बैनर पर चुनाव लड़ाकर राधा मोहन दास अग्रवाल को जीतवा दिया था। इसके बाद कभी शिव प्रताप शुक्ल कोई भी चुनाव नहीं लड़े। 2017 की जब यूपी में भाजपा की सरकार बनी तो सीएम योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी कैबिनेट में राज्य मंत्री की जगह मिली। दूसरी मोदी सरकार में शिव प्रताप शुक्ला को जगह नहीं मिली।

2. कलराज मिश्र : साल 2017 में जब भाजपा की सरकार यूपी में बनी तो कलराज मिश्र ने खुद को मुख्यमंत्री का दावेदार माना, लेकिन उनको सीएम नहीं बनाया गया।

3. अजय मिश्र टेनी : केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री बनने पहले से सीएम योगी की गुड बुक में अजय मिश्र टेनी नहीं रहे। 2021 में हुए मोदी कैबिनेट मंत्री मंडल में अजय मिश्र टेनी को जिम्मेदारी दी गई। लखीमपुर खीरी कांड से योगी सरकार को नुकसान पहुंचा।

4. महेश शर्मा: एनसीआर के नोएडा सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रहे। महेश शर्मा खुद को ब्राह्मण का नेता मानते हुए 2017 में सीएम चेहरा मान रहे थे। लेकिन मोदी की दूसरी कैबिनेट में महेश शर्मा को न ही दूसरी बार जगह मिली और न ही कोई भी प्रमुख जिम्मेदारी दी गई है।

5. सतीश द्विवेदी : योगी सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई के सिद्धार्थनगर के विवि में प्रोफेसर के पद नियुक्ति का मामला हुआ। इस पर बताया जा रहा है योगी बहुत ही नाराज हुए। जिसके बाद सतीश ने अपने भाई को प्रोफेसर के पद से इस्तीफा दिलवा दिया।

यूपी में भाजपा के ब्राह्मण नेता, क्षेत्रवार समीकरण

लक्ष्मी कांत बाजपेयी: पूर्व भाजपा अध्यक्ष, वर्तमान में ज्वाइनिंग कमेटी के अध्यक्ष, पश्चिमी यूपी समेत यूपी में ब्राह्मण नेता माने जाते है।
सुब्रत पाठक: कन्नौज से सांसद। अखिलेश की पत्नी को चुनाव हराया था। पश्चिम क्षेत्र में युवा ब्राह्मण नेता।
महेन्द्र नाथ पांडेय: केन्द्रीय मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा रहे। पूर्वांचल में ब्राह्मण का चेहरा।
रीता बहुगुणा जोशी : पहाड़ी ब्राह्मण चेहरा। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री।
नील कंठ तिवारी: मोदी के संसदीय क्षेत्र से पहली बार चुनाव जीते, दूसरे कैबिनेट विस्तार में प्रमोशन मिला।
दिनेश शर्मा : डिप्टी सीएम। लखनऊ समेत अवध क्षेत्र में ब्राह्मण चेहरा। लखनऊ के महापौर रहे।
रमापति त्रिपाठी : देवरिया से सांसद, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा। पूर्वांचल में बड़े ब्राह्मण।
बृजेश पाठक : बसपा से भाजपा में शामिल हुए। उन्नाव, कानपुर समेत कई जिलों में ब्राह्मण में मजबूत पकड़ है।
श्रीकांत शर्मा: मथुरा से पहली बार विधायक बने, योगी सरकार में ऊर्जा मंत्री। बृज क्षेत्र के ब्राह्मण नेता।

यूपी में ब्राह्मण क्यों जरूरी?

  • आबादी के लिहाज से प्रदेश में लगभग 13% ब्राह्मण हैं। कई विधानसभा सीटों पर तो 20% से ज्यादा वोटर्स ब्राह्मण हैं।
  • बलरामपुर, बस्ती, संत कबीर नगर, महराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, जौनपुर, अमेठी, वाराणसी, चंदौली, कानपुर, प्रयागराज में ब्राह्मण वोट 15% से ज्यादा हैं।
  • 2017 में 56 सीटों पर ब्राह्मण उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। इनमें 44 BJP के थे।

BJP से ब्राह्मण क्यों नाराज हैं?

  • 60 मंत्रियों के मंत्रिमंडल में 8 ब्राह्मणों को जगह दी गई, लेकिन दिनेश शर्मा और श्रीकांत शर्मा को छोड़ किसी को अहम विभाग नहीं दिए गए।
  • 8 क्षत्रिय को भी मंत्री बनाया गया और उन्हें ब्राह्मणों से बेहतर विभाग दिए गए।
  • यूपी में लगातार हुए एनकाउंटर में ज्यादातर ब्राह्मण ही मारे गए। इसे विपक्ष ने ब्राह्मण विरोधी का तमगा देकर प्रचारित किया।
  • अफसरों की नियुक्ति में भी योगी सरकार पर ब्राह्मणों से भेदभाव करने के आरोप लगते आए हैं।
  • BJP के कार्यकाल में सबसे ज्यादा SC-ST मुकदमे भी ब्राह्मणों पर ही दर्ज हुए हैं।

प्रत्येक नाराज ब्राह्मण के घर पहुंचने का लक्ष्य

  • बैठक में यह फैसला हुआ कि, अगले 10 दिनों में सभी नेता यूपी के गांव-गांव पहुंचे। ब्राह्मण नेता नाराज होने वाले व्यक्ति से मिले और उनकी नाराजगी दूर करने का प्रयास करें।
  • यह भी निर्णय हुआ कि, 10 दिनों के बाद प्रत्येक जनपद की ब्राह्मण बाहुल्य सीट पर भी चुनाव को लेकर फीड बैक लें।
  • बैठक में केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी को लेकर भी चर्चा हुई। अजय मिश्र टेनी को लेकर कुछ नेता उनके पक्ष में बोले तो दो नेता बोले पार्टी की छवि के लिए इस पर होल्ड किया गया निर्णय नुकसान पहुंचाएगा।

विकास दुबे और खुशी दुबे पर हुई चर्चा

  • ब्राह्मणों की नाराजगी का जब फीड बैक मांगना शुरु किया। 6 से ज्यादा मंत्री व नेताओं ने विकास दुबे के एनकाउंटर को तो सही ठहराया लेकिन खुशी दुबे को डेढ़ साल से जेल में रखना ठीक नहीं माना।
  • कानपुर के आप-पास के ब्राह्मण नेताओं ने इसको लेकर चिन्ता तक जताई, इसका खमियाजा आने वाले समय में भुगतना पड़ सकता है। इसको लेकर विचार किया जाना होगा।

नेताओं को विश्वास ब्राह्मण के पास ऑप्शन नहीं

  • बैठक में रहे यूपी के अखिलेश के गढ़ से सांसद और यूपी सरकार में मंत्री ने यह फीड बैक दिया कि, ब्राह्मणों के पास कोई विकल्प नहीं है।
  • मंत्रियों ने कहा सपा सरकार में तो कोई भी खास प्लान ब्राह्मण को लेकर नहीं आया था, लेकिन योगी सरकार आने के बाद ब्राह्मण को लेकर चर्चा हो रही।
  • पार्टी के नेताओं को यह भी विश्वास है, अगर ब्राह्मण की नाराजगी बनी है। ऐसे में यह वोट डालने जाएंगे तो सपा को वोट नहीं करेंगे।
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