BJP ने 21 नए चेहरों पर लगाया बड़ा दांव:तीन दिन पहले BJP में आए धर्मपाल सिंह को मिला टिकट, जानिए कहां-कहां बदले गए उम्मीदवार

आगरा / लखनऊ7 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

भाजपा ने शनिवार को उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की। 107 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की गई है। इनमें 20 से अधिक लोगों के टिकट काटे गए हैं। उनकी जगह पर नए उम्मीदवार उतारे गए हैं। भाजपा ने यह फैसला विधायकों के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर लिया है। कहीं जातीय समीकरण तो कहीं पार्टी में सक्रिय भूमिका के आधार पर उम्मीदवार बदले गए हैं। आगरा एत्मादपुर से धर्मपाल सिंह को टिकट मिला है। वे तीन दिन पहले भाजपा में आए थे। आइए जानते हैं, कहां बदले गए उम्मीदवार-

भाजपा के 107 उम्मीदवारों की पहली सूची:योगी गोरखपुर शहर से और डिप्टी CM केशव मौर्य सिराथू से लड़ेंगे, 20 विधायकों के टिकट कटे

गोरखपुर शहर से योगी आदित्यनाथ

योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर लोकसभा सीट से पहली बार भाजपा उम्मीदवार के रूप में 1998 में चुनाव लड़ा। उन्होंने 26 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी। इस दौरान वह सबसे कम उम्र के सांसद थे। उस समय वह सिर्फ 26 साल के थे। 1998 से लेकर मार्च 2017 तक वह गोरखपुर से सांसद रहे।

सिराथू से केशव प्रसाद मौर्य

कौशांबी की इस सीट के जाति गणित को देखकर केशव मौर्य का टिकट फाइनल किया गया है। यहां अनुसूचित जाति वर्ग के 45 फीसदी मतदाता सर्वाधिक हैं। दूसरे नंबर पर पिछड़े वर्ग के 24 फीसदी मतदाता हैं। इसके बाद सभी वर्ग के मिश्रित 32 फीसदी मतदाता हैं। इस सीट पर हार-जीत का फैसला अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं के हाथ में रहता है। यहां मौजूदा समय में 3 लाख 65 हजार 153 मतदाता है।

मेरठ शहर से कमल दत्त शर्मा

मेरठ शहर सीट से ब्राह्मण को ही चुनाव लड़ाना था। इस सीट पर ब्राह्मण मजबूत स्थिति में हैं। स्थानीय संघ की पूरी पैरवी कमलदत्त के साथ रही। युवा चेहरा और युवाओं की बड़ी टीम होने के कारण पार्टी ने इन्हें मौका दिया है। लक्ष्मीकांत वाजपेयी के चुनाव न लड़ने से कमलदत्त को मौका मिला। कमल दत्त शर्मा का एक महिला के साथ अभद्रता करते हुए एक वीडियो पांच साल पहले वायरल हुआ था।

सिवालखास से मनिंदर पाल सिंह

वर्तमान विधायक जितेंद्र सतवाई की निगेटिव रिपोर्ट थी, जो मनिंदर के पक्ष में थी। गन्ना मंत्री सुरेश राणा, मुजफ्फरनगर सांसद डॉ. संजीव बालियान, मेरठ सांसद राजेंद्र अग्रवाल की पैरवी सब पर भारी पड़ी है। सिवालखास सीट पर जाटों का वोट साधने का भी बड़ा कारण है। बागपत सांसद सतपाल भी जितेंद्र सतवाई से कटे थे इसलिए मनिंदर को टिकट मिला।

मेरठ कैंट से अमित अग्रवाल

साफ छवि, क्षेत्र में अच्छी मेहनत के बल पर इन्हें टिकट मिला है। 2017 से इन्होंने भाजपा में सक्रिय भूमिका निभाई। यहां पार्टी ने जातीय समीकरण साधा और वैश्य समाज के उम्मीदवार को उतारा। स्थानीय संघ नेताओं की रिपोर्ट भी इन्हीं के पक्ष में थी। ये सपा और बसपा में भी रह चुके हैं। बसपा से ये निष्कासित किए गए थे।

मुरादाबाद ग्रामीण से केके मिश्रा

केके मिश्रा शहर में कोठीवाल डेंटल कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर हैं। मुरादाबाद ग्रामीण सीट भी 55 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं वाली सीट है। इस सीट से सपा के हाजी इकराम कुरैशी विधायक हैं। इस सीट को भी बीजेपी C कैटेगरी में मानती है।

कुंदरकी से कमल प्रजापति

भाजपा की जिला कार्यकारिणी में महामंत्री होने से इन्हें टिकट मिला है। कुंदरकी सीट 55 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं वाली सीट है। इसमें अभी तक ठाकुर प्रत्याशी रामवीर सिंह चुनाव लड़ते थे। मंडल की बाकी सीटों पर OBC वोटों को कनेक्ट करने के लिए यहां OBC प्रत्याशी उतारा गया है। बीजेपी ने इस सीट को C कैटेगरी में डाला है।

आगरा खेरागढ़ सीट से भगवान सिंह कुशवाहा

बसपा से खेरागढ़ विधानसभा से दो बार विधायक रह चुके हैं। 2017 में खेरागढ़ से भाजपा विधायक महेश गोयल ने इन्हें हराया था। खेरागढ़ सीट पर कुशवाह व अन्य पिछड़ी जाति के वोट बैंक को देखते हुए इन्हें टिकट दिया है। कुछ दिनों पहले ही ये भाजपा में आए हैं।

आगरा फतेहपुर सीकरी से चौधरी बाबूलाल

फतेहपुर सीकरी जाट बाहुल्य क्षेत्र है। इस क्षेत्र में इनकी अच्छी पकड़ है। पूर्व में रालोद के टिकट पर चौधरी बाबूलाल मंत्री रह चुके हैं। 2012 में भाजपा के टिकट पर फतेहपुर सीकरी क्षेत्र से सांसद रहे थे। 2019 में इनका टिकट काट दिया था। अब पार्टी ने इन्हें विधानसभा का टिकट दिया है। वहीं, इन पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। आगरा के चर्चित पनवारी कांड में भी इनका नाम है।

आगरा फतेहाबाद सीट से छोटे लाल वर्मा

फतेहाबाद में निषाद वोट बैंक अधिक है। निषादों में अच्छी पकड़ है। दो बार भाजपा से विधायक रह चुके हैं। इसके बाद बसपा से 2012 में फतेहाबाद से चुनाव जीते। इसके बाद इन्होंने सपा जॉइन कर ली। मगर, इसके बाद भाजपा में हैं। भाजपा ने जातीय समीकरण को देखते हुए इन्हें टिकट दिया है।

आगरा ग्रामीण से बेबी रानी मौर्य

आगरा ग्रामीण पर एससी वोट ज्यादा हैं। बेबी रानी मौर्य को भाजपा दलित चेहरे के रूप में प्रजेंट कर रही है। यह आगरा में मेयर रह चुकी हैं। इन्हें उत्तराखंड का राज्यपाल भी बनाया गया था। तीन माह पहले इनसे इस्तीफा ले लिया गया था। इसके बाद बेबी रानी मौर्य को भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया।

आगरा एत्मादपुर से धर्मपाल सिंह

एत्मादपुर में ठाकुर वोट करीब सवा लाख हैं। यह 2012 में बसपा की टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। 2017 में बसपा की टिकट पर फिर चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए। करीब छह माह पहले सपा जॉइन की थी। सपा के संभावित प्रत्याशी थे, लेकिन तीन दिन पहले भाजपा जॉइन की और टिकट मिल गया।

मथुरा मांट से राजेश चौधरी

भाजपा के विद्यार्थी परिषद से कार्यकर्ता हैं। वह जाट समुदाय से आते हैं। मांट जाट बाहुल्य सीट है। चूंकि वह युवा हैं और धर्मेंद्र प्रधान के नजदीकी भी हैं। इसलिए उन्हें टिकट दिया गया है। वह नौहझील विकास खंड के गांव सदीकपुर के रहने वाले हैं। मौजूदा में नौहझील ब्लाक प्रमुख सुमन चौधरी के पति हैं। वहीं भाजपा की तरफ से प्रदेश के प्रवक्ता हैं। टेलीविजन पर प्रदेश की योजनाओं के बारे में जानकारी देते हैं।

गढ़मुक्तेश्वर से हरेंद्र सिंह तेवतिया

वह पूर्व जिला पंचायत सदस्य हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, हरेंद्र सिंह के स्व. दादा के छोटे भाई थे। हरेंद्र सिंह की पत्नी ममता तेवतिया 2000 में ग्राम प्रधान बनीं। 2005 में वह फिर ग्राम प्रधान निर्वाचित हुईं और हापुड़ ब्लाक की प्रमुख बनीं। 2010 में ममता तेवतिया दोबारा ब्लाक प्रमुख बनीं। 2015 में हरेंद्र सिंह ने वार्ड संख्या 13 से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और मेरठ मंडल में सबसे अधिक वोटों से जीत दर्ज की।

अमरोहा नौगावां सादात से देवेंद्र नागपाल

वह अमरोहा से सांसद रह चुके हैं। उनमें लोगों को जोड़ने की क्षमता का अब तक इतिहास रहा है। वह निर्दलीय लड़कर भी विधानसभा का चुनाव जीते। उसी दौरान अपने बड़े भाई हरीश नागपाल को चेतन चौहान के सामने संसदीय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतारकर जिताया था।

इसके अलावा बरेली कैंट से संजीव अग्रवाल, खुर्जा से मीनाक्षी सिंह, नकुड़ से मुकेश चौधरी, बेहट से नरेश सैनी, बरौली से जयवीर, बरेली की बिथरी चैनपुर सीट से डॉ. राघवेंद्र शर्मा को भाजपा ने अपना प्रत्याशी घोषित किया है।

खबरें और भी हैं...