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योगी सरकार का 'डैमेज कंट्रोल':गोरखपुर का दौरा छोड़कर CM लौटे लखनऊ, देर रात मीटिंग की; बड़े अधिकारियों को मौके पर भेजा, 24 घंटे में लखीमपुर हिंसा पर पाया काबू

लखनऊ9 महीने पहले
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उत्तर प्रदेश में महज 5 महीने बाद विधानसभा 2022 के चुनाव हैं। किसान आंदोलन के चलते पश्चिम यूपी पहले से ही भाजपा के लिए चुनौती बना हुआ था। वहीं, बीते 3 अक्टूबर यानी रविवार को लखीमपुर खीरी हिंसा में 4 किसानों समेत 9 लोगों की मौत के बाद खड़ा हो गया। विवाद और किसान नेताओं का आंदोलन भाजपा के सियासी गणित को बिगाड़ सकता है।

सीएम योगी गोरखपुर दौरे पर थे, घटना की जानकारी मिलते ही वापस लखनऊ लौटे। इससे पहले ही सरकार ने एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार को लखीमपुर खीरी रवाना किया। इधर, लखनऊ पहुंचते ही सीएम ने देर रात अफसरों के साथ मीटिंग की। डैमेज कंट्रोल स्ट्रेटेजी बनाई। इसके बाद महज 24 घंटे के अंदर ही इस पर काबू पा लिया गया।

योगी सरकार की डैमेज कंट्रोल की ये स्ट्रेटेजी क्या है? कैसे सरकार ने इस हिंसा को फैलने से रोका ? और भाजपा के लिए इसके सियासी मायने क्या हैं? आइए आपको 5 प्वाइंट में समझाते है...योगी सरकार की डैमेज कंट्रोल की रणनीति।

ये हैं 5 प्वाइंट

  • एक्शन में आए CM, पूरी सरकार को रखा हाई-अलर्ट पर

बीते रविवार (3 अक्टूबर) को जैसे ही लखीमपुर खीरी में आंदोलन हिंसक हुआ। किसानों के मौत की खबरें आई। सीएम योगी भी एक्शन में आ गए। सीएम योगी अपना गोरखपुर का दौरा बीच में ही रद कर वापस लखनऊ लौट आए। सीएम ने तुरंत ही सभी सीनियर अधिकारियों की अपने आवास पर बैठक बुलाई। देर रात तक मंथन हुआ।

तय हुआ कि सरकार के दूत के तौर पर सीनियर पुलिस अधिकारी को मौके पर बातचीत के लिए भेजा जाए। लखीमपुर खीरी को सियासी अखाड़ा बनने से रोकने के लिए विपक्ष के नेताओं को वहां जाने से रोका जाए। साथ ही पूरे यूपी को हाई-अलर्ट पर रखने के पुलिस बल तैनात किया जाए। इसके अलावा लखीमपुर में अफवाह को फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट नेटवर्क को बंद किया जाए। सीएम के इस निर्देश पर तुरंत एक्शन शुरू हुआ।

प्रियंका गांधी रविवाद देर रात ही लखीमपुर के लिए निकली थीं, इसके पहले ही CM योगी ने सीमा क्षेत्रों पर फोर्स तैनात कर दी। किसी को भी प्रवेश नहीं मिला।
प्रियंका गांधी रविवाद देर रात ही लखीमपुर के लिए निकली थीं, इसके पहले ही CM योगी ने सीमा क्षेत्रों पर फोर्स तैनात कर दी। किसी को भी प्रवेश नहीं मिला।
यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखीमपुर खीरी में हुए हिंसक आंदोलन को कंट्रोल करने के लिए सीमा पर भारी फोर्स तैनात कर दी।
यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखीमपुर खीरी में हुए हिंसक आंदोलन को कंट्रोल करने के लिए सीमा पर भारी फोर्स तैनात कर दी।
  • ADG प्रशांत कुमार को सरकार का दूत बनाकर लखीमपुर भेजा गया

सरकार ने तुरंत ही एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार को लखीमपुर खीरी रवाना किया। प्रशांत कुमार के साथ अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी को भी भेजा गया। प्रशांत कुमार को सरकार की तरफ से मौके पर फैसले लेने के लिए अधिकृत किया गया। प्रशांत कुमार बतौर पुलिस अधिकारी लंबे समया तक पश्चिमी यूपी में तैनात रहें है। कहा जाता है कि राकेश टिकैत समते कई किसान नेताओं से प्रशांत कुमार के रिश्ते बहुत अच्छे है। प्रशांत को इन रिश्तों का फायदा मिला। राकेश टिकैत तमाम दूसरे लोकल किसान नेता भी बातचीत के लिए तैयार हो गए।

राकेश टिकैत तमाम दूसरे लोकल किसान नेताओं से बातचीत कर एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार ने डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया।
राकेश टिकैत तमाम दूसरे लोकल किसान नेताओं से बातचीत कर एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार ने डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया।
  • राकेश टिकैत को लखीमपुर खीरी जाने की दी इजाजत

योगी सरकार ने लखीमपुर जाने वाले तमाम रास्तों पर कड़ा पहरा बैठा दिया। किसी को भी लखीमपुर खीरी जाने की इजाजत नहीं दी गई। राकेश टिकैत को सरकार ने लखीमपुर जाने से नहीं रोका। सरकार ने साफ कर दिया था कि इस पर सियासत नहीं होगी। किसानों से जुड़े इस मसले पर किसानों के साथ ही बात होगी। लिहाजा राकेश टिकैत को जाने की इजाजत दी गई। राकेश टिकैत ने वहां पहुंच कर किसानों से बातचीत किया। मृतकों के परिवार से मिलने के बाद सरकार के तरफ से भेजे गए अधिकारी प्रशांत कुमार और देवेश चतुर्वेदी से बातचीत शुरू हुई।

प्रियंका गांधी 3 अक्टूबर की रात ही लखनऊ से निकलने में कामयाब रही, लेकिन उन्हे सीतापुर में रोक लिया गया।
प्रियंका गांधी 3 अक्टूबर की रात ही लखनऊ से निकलने में कामयाब रही, लेकिन उन्हे सीतापुर में रोक लिया गया।
  • किसानों की हर मांग तुरंत मान ली गई

एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार को सीएम के तरफ से किसानों से बातचीत कर मसले को जल्द से जल्द सुलझाने का निर्देश दिया गया था। प्रशांत कुमार अपने रिश्तों के आधार पर बातचीत को सकारात्मक दिशा में ले गए। किसानों के नेता राकेश टिकैत से बातचीत के बाद सरकार ने उनकी मांग मानते हुए घोषणा की कि मृतक 4 किसानों के परिवार वालों को 45 लाख की आर्थिक मदद, सरकारी नौकरी, घायलों को 10 लाख और मामले की जांच रिटायर्ड हाईकोर्ट के जज से कराई जाएगी। किसान भी इससे सहमत हो गये। बातचीत का नतीजा सकारात्मक रहा।

  • लखीमपुर को सियासी अखाड़ा बनने से रोका

नेताओं को लखीमपुर खीरी जाने से रोकने के लिए वहां धारा 144 लगा दी गई। भारी पुलिस बलों की तैनाती कर दी गई। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी 3 अक्टूबर की रात ही लखनऊ से निकलने में कामयाब रही, लेकिन उन्हे सीतापुर में रोक लिया गया। फिर हाउस अरेस्ट कर लिया गया। बसपा नेता सतीश मिश्रा को लखनऊ में उनके ही घर में नजरबंद कर दिया गया। सुबह अखिलेश यादव अपने घर से निकल कर लखीमपुर जाते, इससे पहले ही भारी फोर्स तैनाती कर दी गई।

लखीमपुर खीरी पहुंचने की रणनीति प्रियंका की फेल हो गई। इस दौरान पुलिस से धक्का मुक्की भी हुई।
लखीमपुर खीरी पहुंचने की रणनीति प्रियंका की फेल हो गई। इस दौरान पुलिस से धक्का मुक्की भी हुई।

अखिलेश समेत सपा के तमाम नेताओं को हिरासत में लेकर इको गार्डन में रखा गया। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल और कांग्रेस के बाकी नेताओं को भी हाउस अरेस्ट कर लिया गया। छत्तीसगढ़ सीएम भूपेश बघेल और पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्‍नी को लखनऊ में लैंड करने की परमिशन नहीं दी गई। भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर रावण और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के अध्यक्ष जंयत चौधरी समेत तमाम नेताओं को रोकने में भी सरकार कामयाब रही।

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