लखीमपुर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार:सुप्रीम कोर्ट ने UP सरकार से कल तक जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी, पूछा- जिनके खिलाफ FIR हुई, वो गिरफ्तार हुए क्या?

नई दिल्ली/लखनऊ10 दिन पहले

लखीमपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से कल तक (शुक्रवार) जांच की स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने पूछा है कि जिनके खिलाफ FIR हुई, वे गिरफ्तार हुए क्या? गुरुवार को हिंसा मामले पर चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना की अगुवाई में तीन जजों की बेंच ने सुनवाई की। बेंच ने अगली सुनवाई कल तक के लिए स्थगित करते हुए यह आदेश दिया।

सीजेआई रमन्ना ने कहा- मंगलवार को दो वकीलों ने एक पत्र लिखा था। पत्र को जनहित याचिका के तौर पर दाखिल करने का आदेश दिया था। लेकिन कुछ खामी के कारण स्वत: संज्ञान के तौर पर रजिस्टर कर दिया है। दोनों वकीलों को बुलाया गया। कोर्ट ने कहा कि स्टेटस रिपोर्ट में आरोपियों का ब्योरा होना चाहिए। मृतक किसान लवप्रीत सिंह अपने बेटे की मौत के सदमे से बीमार हैं। सीजेआई ने अटार्नी जनरल को इलाज का प्रबंध करने के लिए कहा है।

सरकार के वकील ने कहा- घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी
कोर्ट ने अधिवक्ता शिव कुमार त्रिपाठी को सुना। शिव कुमार, उन दो वकीलों में से एक हैं जिन्होंने जनहित याचिका के लिए पत्र लिखा था। त्रिपाठी ने कहा, यूपी सरकार ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए कोई उचित कदम नहीं उठाया है। वहीं, यूपी सरकार की तरफ से पेश महाधिवक्ता वरिष्ठ वकील गरिमा ने स्वीकार किया कि पूरी घटना दुर्भाग्यपूर्ण थी। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठन की गई है। न्यायिक आयोग भी बन गया है।

सीजेआई ने वकील गरिमा से पूछा कि इस घटना के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका का क्या हुआ? जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि आरोपी कौन हैं और क्या उन्हें गिरफ्तार किया गया है? जज ने कहा कि इसका पूरा ब्योरा देने के लिए स्टेटस रिपोर्ट दीजिए।

सरकार ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अगुवाई में एकल सदस्यीय जांच आयोग बनाया है। इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी गई।
सरकार ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अगुवाई में एकल सदस्यीय जांच आयोग बनाया है। इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी गई।

लखीमपुर में 3 अक्टूबर को भड़की थी हिंसा
रविवार तीन अक्टूबर को किसानों ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र का विरोध करते हुए काले झंडे दिखाए थे। इसी दौरान एक गाड़ी ने किसानों को कुचल दिया था। इससे 4 किसानों की मौत हो गई थी। इसके बाद भड़की हिंसा में आरोप है कि किसानों ने एक ड्राइवर समेत चार लोगों को पीट-पीटकर मार डाला था। इस हिंसा में एक पत्रकार भी मारा गया था।

इस मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र समेत 15 लोगों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश का केस दर्ज किया गया है। सरकार और किसानों के बीच समझौता हुआ। सरकार ने मृतकों के परिवार को 45 लाख रुपए मुआवजा दिया। एक सदस्य को सरकारी नौकरी के साथ घटना की न्यायिक जांच और 8 दिन में आरोपियों की गिरफ्तारी का वादा भी किया गया है।

खबरें और भी हैं...