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अशोक चोटिया के आनंद गिरि बनने की कहानी:12 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर, 7 साल पहले नरेंद्र गिरि का चेला बन मालामाल हुए; भीलवाड़ा में सब्जी बेचते हैं भाई

भीलवाड़ा3 महीने पहले

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। मामले में मिले कथित सुसाइड नोट में उनके शिष्य आनंद गिरि का जिक्र है। यूपी पुलिस हरिद्वार से स्वामी आनंद गिरि को प्रयागराज ले आई है। पुलिस लाइन में उससे पूछताछ जारी है।

इस बीच दैनिक भास्कर आपको बता रहा है कि राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के रहने वाले अशोक चोटिया 7 साल में कैसे स्वामी आनंद गिरि बन गए। हम आपको आनंद गिरि के घर लेकर चल रहे हैं, जहां उनका बचपन गुजरा। 12 साल की उम्र में ही आनंद ने घर छोड़ दिया था। प्रयागराज के महंत नरेंद्र गिरि के आश्रम पहुंचकर 2014 में उनका शिष्य बने।

पढ़ें आनंद गिरि के गांव से रिपोर्ट....

पिता किसान, भाई का सब्जी का काम
खुद को घुमंतू योगी बताने वाले आनंद गिरि का राजस्थान से कनेक्शन है। यहां के भीलवाड़ा जिले के आसींद तहसील के गांव ब्राह्मणों की सरेरी में उनका पैतृक आवास है। यहां रह रहे परिवार में पिता रामेश्वरलाल किसान, तीन बड़े भाई, एक छोटी बहन है। मां नानू देवी का निधन जून 2020 में हो चुका है।

बताया जा रहा है कि एक भाई सरेरी गांव में ही सब्जी का ठेला लगाते हैं और दो भाई सूरत में कबाड़ का काम करते हैं। पूरा सरेरी गांव आनंद गिरि को अच्छे संत के तौर पर मानता है। लोग उन्हें शांत और शालीन स्वभाव का बताते हैं।

संन्यास लेने से पहले आनंद गिरि का नाम अशोक चोटिया था। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के आसींद तहसील के गांव ब्राह्मणों की सरेरी में उनका घर है।
संन्यास लेने से पहले आनंद गिरि का नाम अशोक चोटिया था। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के आसींद तहसील के गांव ब्राह्मणों की सरेरी में उनका घर है।

परिवार को बिना बताए छोड़ा था घर
आनंद गिरि के पैतृक आवास के पास ही चारभुजा मंदिर है। बचपन से ही आनंद गिरि इस मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए जाया करते थे। 1996 में जब आनंद 12 साल के थे, तभी घर छोड़कर प्रयागराज चले गए। परिवार वालों को इसकी जानकारी भी नहीं थी कि वह आखिर कहां गए? बाद में परिवार को जानकारी मिली कि हरिद्वार के कुंभ में हैं। उनके पिता वहां पहुंचे, लेकिन तब तक वह महंत नरेंद्र गिरि के आश्रम में पहुंच कर उनके शिष्य बन गए थे।

आनंद गिरि के पिता रामेश्वरलाल।
आनंद गिरि के पिता रामेश्वरलाल।

अब तक सिर्फ दो बार आए हैं गांव
गांव के लोगों के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान मां के निधन पर जून 2020 में आनंद गिरि अपने गांव आए थे। इससे पहले साल 2014 जब वह महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य बने थे, तब अपने गांव आए थे और माता-पिता से आशीर्वाद लिया था। अचानक से महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद उन पर लगे आरोपों से पूरा सरेरी गांव हैरान है।

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आनंद 12 साल के थे, तभी घर छोड़कर प्रयागराज चले गए थे।
आनंद 12 साल के थे, तभी घर छोड़कर प्रयागराज चले गए थे।

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आनंद गिरि के पैतृक आवास के पास ही चारभुजा मंदिर है। बचपन से ही आनंद गिरि इस मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए जाया करते थे।
आनंद गिरि के पैतृक आवास के पास ही चारभुजा मंदिर है। बचपन से ही आनंद गिरि इस मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए जाया करते थे।
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