पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Uttar pradesh
  • Lucknow
  • UP Special Police Operation Team Latest Updates। Team Of SPOT Formed In ATS Will Conducted In Agra Ghaziabad Varanasi Gorakhpur Uttar Pradesh

UP के सरहद की निगेहबानी करेगा SPOT:गोरखपुर, आगरा, गाजियाबाद और बनारस में तैनात होगी स्पेशल पुलिस ऑपरेशन टीम; हाई टेक्निकल हथियारों से लैस होंगे जवान

लखनऊ3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
हाल ही में धर्मान्तरण के मामले में पकड़े गए आरोपियों से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI समेत कई आतंकी संगठनों की यूपी में दखल भी सामने आई है। इससे निपटने के लिए ATS अपने विशेष दस्ते का विस्तार कर रहा है।- प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
हाल ही में धर्मान्तरण के मामले में पकड़े गए आरोपियों से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI समेत कई आतंकी संगठनों की यूपी में दखल भी सामने आई है। इससे निपटने के लिए ATS अपने विशेष दस्ते का विस्तार कर रहा है।- प्रतीकात्मक फोटो
  • प्रदेश में पैर पसार रहे आतंकी संगठनों की गतिविधियों को रोकने के लिए सरकार ने लिया फैसला
  • नागरिक पुलिस और PAC से तैयार किए जा रहे कमांडो, अभी चार जिलों में फिर हर जिले में होगी तैनाती

आतंकी संगठनों से ताल्लुक रखने वाले अपराधियों के प्रदेश विरोधी मंसूबे पूरा होना अब आसान नही होंगे। इनके मकसद को भांपकर ब्लैक कमांडो इन पर कहर बनकर टूट पड़ेंगे। इसके लिए UPATS अपने स्पेशल पुलिस ऑपरेशन टीम (SPOT) की एक यूनिट हर जिले में तैनात कर रहा है। फिलहाल संख्या बल को देखते हुए अभी प्रदेश के चार जिलों में यूनिट तैनात करने की कवायद शुरू हो चुकी है। इस टीम में शामिल जवान एक साथ तीन हथियार चला सकते हैं। सभी को हाई टेक्निकल हथियारों से लैस किया जाएगा।

प्रदेश में बढ़ती आतंकी गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की जा रही है। हाल ही में धर्मान्तरण के मामले में पकड़े गए आरोपियों से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI समेत कई आतंकी संगठनों की यूपी में दखल भी सामने आई है। इससे निपटने के लिए ATS अपने विशेष दस्ते का विस्तार कर रहा है। शुरुआती चरण में इंडो-नेपाल सीमा से सटे गोरखपुर, राजस्थान की सीमा से लगे आगरा, देश की राजधानी दिल्ली की सीमा पर गाजियाबाद और बिहार से सटे प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र बनारस में SPOT की टुकड़ियां तैनात करने का फैसला लिया गया है।

जवानों को दिया गया मनोवैज्ञानिक और आधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण

SPOT में पुलिस और पीएसी के जवानों को शामिल किया गया है। 40 साल से कम उम्र के इन जवानों को चेहरा देखकर मन की बात भांप लेने के लिए मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा देश मे उपलब्ध दुनिया के आधुनिकतम हथियारों को चलाने की भी ट्रेनिंग दी गयी है। यह जवान अपने पोस्टिंग वाले जिलों और उसकी चारों तरफ की शरहद पर हर वक्त नजर रखेंगे। साथ ही अपना ऐसा मुखबिर तंत्र विकसित करेंगे जो इन्हें हर आपराधिक गतिविधि और षड्यंत्र की जानकारी दे। इस तरह की किसी भी हरकत का अंदाजा होते ही यह हरकत में आ जाएंगे। इसकी सूचना लखनऊ स्थित मुख्यालय को देंगे और वहाँ से परमीशन मिलते ही ऑपरेशन शुरू कर देंगे।

बड़े जिलों तक ही थी ATS की पहुंच, यूनिट पहुंचने में होती थी देर

अभी तक कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, आगरा, नोएडा जैसे बड़े जिलों में ATS की यूनिट है, जिसमे एक इंस्पेक्टर और सिपाही हैं। जिलों में किसी आतंकी घटना या विस्फोटक की सूचना पर लखनऊ से कमांडो की टुकड़ी भेजनी पड़ती है। इन्हें पहुँचने कभी-कभी इतनी देर हो जाती है कि घटना घटित होने का खतरा रहता है। इसे देखते हुए अब सभी जिलों में SPOT को तैनात करने का फैसला लिया गया है। इसके लिए पुलिस और पीएसी के जवानों को बड़ी संख्या में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

पूर्व IG असीम अरुण ने तैयार की थी SPOT की रूपरेखा

प्रदेश के कोने-कोने तक ATS की पहुँच हो इसके लिए पूर्व IG ATS असीम अरुण ने SPOT की रूपरेखा तैयार की थी। इसे लागू करवाने के लिए उन्होंने करीब दो साल तक जद्दोजहद की थी। पूर्व DGP ओपी सिंह को यह सुझाव मुनासिब लगा और उन्होंने ही इसे शासन से मंजूरी दिलवाई। इसके बाद नवंबर 2017 में इसका गठन किया गया। लेकिन इसमे भर्ती की कठिन शर्तो की वजह से नगरिक पुलिस के जवान आवेदन करने को तैयार नही थे। जबकि इस टीम में शामिल।होने वाले जवानों को 30 फीसदी अतरिक्त जोखिम भत्ता देने का का भी प्राविधान रखा गया है।

एक साथ तीन हथियार चलाना, आंख बंद करके अचूक निशाना लगाना था

SPOT में शामिल होने वाले जवानों को हर वक्त अपने साथ तीन हथियार रखना पड़ता है। जरूरत पड़ने पर तीनों को एक साथ कैसे चलना है इसका इन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके साथ दोनों आंख बंद करके टारगेट पर गोली मारना भी सिखाया जाता है। इनकी ट्रेनिंग का सबसे बड़ा पार्ट किसी अपहृत को जोखिम से सुरक्षित निकलना होता है। इसके लिए इन जवानों को अपने जान की बाजी लगाकर पलक झपकते ही अपहरणकर्ताओं पर टूटना पड़ता है, लेकिन पीड़ित को कोई नुकसान न हो इसका ख्याल रखना इनकी अहम जिम्मेदारी होती है।

खबरें और भी हैं...