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सभी बड़े शहरों में हुआ भ्रष्टाचार:उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग को पत्र लिख बड़े शहरों में दिए अस्थायी कनेक्शन की जांच करने की मांग उठाई

लखनऊ2 महीने पहले
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अस्थायी कनेक्शन की जांच की मांग तेज होने लगी है। - Dainik Bhaskar
अस्थायी कनेक्शन की जांच की मांग तेज होने लगी है।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा अस्थायी कनेक्शन देने के नाम पर हुए भ्रष्टाचार का मामला अब बढ़ गया है। आंकड़ों को आधार बनाकर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के सभी महानगरों में अस्थायी कनेक्शन की जांच कराने की मांग उठाई है। दलील है कि पूरे प्रदेश में अस्थायी कनेक्शन के फिक्स चार्ज केवल 27 करोड़ रुपए का रेवेन्यू आ रहा है। वहीं, उन कनेक्शन धारकों द्वारा खर्च बिजली से 188 करोड़ रुपए प्राप्त हो रहे है। उपभोक्ता परिषद का कहना है कि पहली नजर में यह पैसा काफी कम है। इससे यह प्रतीत होता है कि ज्यादातर कनेक्शन कम लोड के दिए गए है और उससे बड़े इमारत या अन्य काम किए जा रहे हैं।

अस्थायी कनेक्शन एलएमवी ( कनेक्शन का विभागीय मानक ) 9 की श्रेणी में आता है। उन्होंने मांग उठाई है कि लखनऊ, बरेली, कानपुर, बनारस समेत कई शहरों में एलएमवी 9 के कनेक्शन की जांच होनी चाहिए। यहां भी नोएडा और ग्रेटर नोएडा की तरह बड़ा भ्रष्टाचार निकल कर सामने आएगा। दरअसल, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बिना मीटर के अस्थायी कनेक्शन दे दिया गया था। इसमें 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का भ्रष्टाचार हुआ है। अभी तक इस मामले में 23 इंजीनियरों का तबादला कर दिया गया है।

बिल्डरों और आवासीय कॉलोनी में होता खेल

अभी तक की जांच में यह बात सामने आई है कि सबसे ज्यादा खेल बिल्डर और आवासीय काॅलाेनियों में हुआ है। जहां दो से तीन किलो वॉट के कनेक्शन पर बड़ी - बड़ी इमारत खड़ी हो गई है। शहर के आउटर इलाकों में ऐसे खेल सबसे ज्यादा होते हैं। वर्ष 2019- 20 में एलएमवी -9 में 207 मिलियन यूनिट बिजली की सेल्स देखी गयी लेकिन वर्ष 2020-21 में इस कैटेगरी में सेल्स मात्रा 157 मिलियन यूनिट रही। इसमें करीब 24 फीसदी की गिरावट आई है।

215 करोड़ रुपए के आय का अनुमान

एलएमवी 9 के कनेक्शन से पूरे प्रदेश में पावर कार्पोरेशन को लगभग 215 करोड़ राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। लेकिन जिस प्रकार से अनियमितता सामने आ रही अगर उसको सही कर दिया जाता तो यह लाभ बढ़ जाता। अभी पूरे प्रदेश में लगभग 12396 उपभोक्ता है जो अस्थायी कैटेगरी के हैं। इनसे फिक्स्ड चार्ज के रूप में केवल पूरे प्रदेश से 27 करोड़ राजस्व प्राप्त होता है। इनसे एनर्जी चार्ज से लगभग 188 करोड़ रुपए आना यह सिद्ध करता है कि अस्थायी संयोजनों में बड़ा घोटाला है।

रेट लिस्ट

- आवास के लिए 200 रुपए प्रति किलो वॉट और 8 रुपए प्रति यूनिट - अन्य निर्माण के लिए 300 रुपए प्रति किलो वॉट और 9 रुपए यूनिट

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