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कांवड़ यात्रा पर यूपी सरकार इसलिए है बेचैन:4 करोड़ कांवड़ियों के लिए 1200 से ज्यादा शिविर लगते हैं... विधानसभा चुनाव से पहले आस्था का ऐसा हुजूम कहीं नहीं मिलेगा

13 दिन पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तरप्रदेश में कांवड़ यात्रा को लेकर स्वत: संज्ञान लिया है और यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है। यूपी के डॉक्टर्स भी कह रहे हैं कि कांवड़ यात्रा कोरोना संक्रमण का कारण बन सकती है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि भीड़ से बचना है। उधर उत्तराखंड सरकार कांवड़ यात्रा को बैन कर चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डॉक्टर सब कह चुके हैं कि यह तीसरी लहर को न्यौता हो सकता है। तो इसके बावजूद यूपी सरकार क्यों अपनी जिद पर अड़ी है? इसकी वजह है कि यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा के चुनाव। हिन्दुत्व की ब्रांडिंग में कांवड़ यात्रा बहुत अहम है।

लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉक्टर प्रोफेसर D. R साहू का कहना है कि यूपी सरकार के मुख्यमंत्री के द्वारा कावड़ यात्रा निकालने का ऐलान पूर्ण रुप से उनकी धार्मिक प्रवृत्ति से जुड़ा है। क्योंकि वह खुद एक पीठ के महंत हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा स्वतः संज्ञान लिया है।

पिछले साल भी नहीं हुई थी कांवड़ यात्रा लेकिन हल्ला नहीं हुआ

कोरोना संक्रमण के चलते पिछली बार भी कांवड़ यात्रा नहीं हुई लेकिन इतना हल्ला नहीं हुआ। न सरकार ने जिद की न हिन्दू संगठनों ने। इस बार चूंकि 8 महीने बाद यूपी में चुनाव होने हैं और कांवड़ यात्रा प्रचार का अच्छा जरिया है।

वेस्ट यूपी में 1200 से ज्यादा शिविर लगते हैं कांवड़ियों के लिए

कावड़ यात्रा उत्तराखंड में गौमुख,गंगोत्री, ऋषिकेश, हरिद्वार से शुरू होकर उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर हापुड़, अलीगढ़, आगरा, मुरादाबाद, बिजनौर, के अलावा दूसरे राज्यों जिनमे दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश तक भी कांवड़िए अपने गंतव्य को जाते हैं। मेरठ मंडल के मेरठ गाजियाबाद, गौतमबुधनगर, हापुड़, बुलंदशहर और बागपत में करीब कावड़ यात्रा के 900 शिविर लगाए जाते हैं। जबकि सहारनपुर मंडल के सहारनपुर, शामली और मुजफ्फरनगर में 350 से अधिक शिविर लगाए जाते हैं। कावड़ यात्रा से वेस्ट यूपी के सभी जिलों से सबसे ज्यादा सैलाब उमड़ता है।

2019 में हरिद्वार से 4 करोड़ कावड़ियों ने जल उठाया

कोरोना संक्रमण के चलते साल 2020 में भी सावन माह की कावड़ यात्रा नहीं हुई थी। इस बार 2021 के लिए भी उत्तराखंड सरकार साफ तौर पर कावड़ यात्रा पर रोक लगा चुकी है। लेकिन 2019 की बात करें तो सावन माह में हरिद्वार से अनुमान के तौर पर चार करोड़ शिव भक्तों ने गंगाजल उठाया था।

योगी बैठकें करके यात्रा की तैयारियोें के निर्देश दे रहे हैं

यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश के सभी मंडलों के कमिश्नर व पुलिस अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर निर्देश दे रहे हैं कि कांवड़ यात्रा की तैयारियां पूरी कर ली जाए। 25 जुलाई से सावन माह के साथ ही कावड़ यात्रा शुरू होती है। यूपी में बिजनौर के बैराज, मेरठ की सीमा में हस्तिनापुर, बुलंदशहर की सीमा में अनूपशहर, रामघाट, नरोरा, हापुड़ की सीमा में ब्रजघाट व गंगा के किनारे से जल उठाने को लेकर चर्चा चल रही हैं।

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