UP में 10 दिन में 123 बच्चे छुड़ाए गए:पुलिस ने 27 तस्कर भी दबोचे, मदरसों में पढ़ाई के नाम पर बच्चे बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से लाए जा रहे

लखनऊ3 महीने पहले
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उत्तर प्रदेश में मानव तस्करी के मामले बढ़ गए हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि मदरसों में बच्चों को पढ़ाने ले जाने की बात कहकर तस्कर पैरेंट्स को गुमराह कर रहे हैं। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बच्चे तस्करों का सॉफ्ट टारगेट बन रहे हैं। पिछले दस दिनों में दिल्ली की एक संस्था की सूचना पर लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर, अलीगढ़, फिरोजाबाद और मुरादाबाद जैसे बड़े जिलों से ऐसे 123 बच्चे मुक्त कराए गए।

इसके बाद यूपी पुलिस की ह्यूमन ट्रैफिकिंग विंग और प्रशासन की बाल कल्याण टीम के कामकाज पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इतनी बड़ी धरपकड़ के बाद पुलिस ने इसके पीछे बाल मजदूरी और धर्म परिवर्तन के प्वाइंट्स पर जांच शुरू कर दी है।

28 तस्करों की गिरफ्तारी हुई है

रेस्क्यू आपरेशन से जुड़े सूर्य प्रताप मिश्रा (स्टेट कोऑर्डिनेटर उत्तर प्रदेश, बचपन बचाओ आंदोलन) ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पिछले दस दिनों में ट्रेनों व बसों से 123 बच्चों रेस्क्यू किया गया है। 28 तस्करों की गिरफ्तारी हुई है। यह बच्चे बिहार के कटिहार , सीतामढ़ी, अररिया जिला से विभिन्न ट्रेनों, बसों में लाए जा रहे थे। बच्चों को मुक्त कराकर आरोपियों के खिलाफ किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख व संरक्षण) अधिनियम की धारा 75और 79, बाल और किशोर श्रम ( प्रतिषेध एवं विनियम) अधिनियम की धारा 14, IPC की धारा 370, 374 में कई FIR दर्ज हुई हैं।

धर्म परिवर्तन या बाल मजदूरी के लिए तस्करी
संस्था व पुलिस के मुताबिक जब बच्चों के साथ पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की गई तो उनका कहना था कि वह बच्चों को पढ़ाई के लिए दिल्ली के तुगलकाबाद स्थित मदरसे में ले जा रहे थे। साथ ही खुद को बच्चों का रिश्तेदार बता रहे थे। हालांकि वह लोग बच्चों के परिजनों व मदरसे के प्रबंधक से बात कराने को कहने पर बात नहीं करा सके। बच्चों को किस लिए ले जाया जा रहा था इसकी जांच शुरू कर दी गई।

अलीगढ़ में बीते दिनों 25 बच्चे बरामद हुए।
अलीगढ़ में बीते दिनों 25 बच्चे बरामद हुए।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने भी लिया संज्ञान
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मानव तस्करी ने भी इसे गंभीरता से लिया है। मंत्रालय ने इससे जुड़े विधेयक 2021 के मसौदे पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इस विधेयक में मानव तस्करी का दोषी पाए जाने पर आरोपी को कम से कम सात वर्ष की सजा होगी, जिसे बढ़ाकर 10 वर्ष तक किया जा सकेगा। साथ ही एक लाख से पांच लाख रुपए तक का जुर्माना होगा।

यूपी में नौकरी के नाम पर 25 महिलाओं को भेजा जा चुका खाड़ी देश
लखनऊ, कानपुर, फतेहपुर, उन्नाव समेत कई जिलों की 25 महिलाओं को नौकरी के नाम पर खाड़ी देश (ओमान, सऊदी अरब, कुवैत ) भेजा गया। कानपुर में इसका खुलासा होने पर पुलिस ने रेस्क्यू कर कुछ महिलाओं को बचाया। इन महिलाओं से अच्छी नौकरी की जगह बंधक बनाकर शेख के घरों पर काम करवाया जा रहा था। विदेशों से फ्लाइट न आने से अभी भी कई महिलाएं खाड़ी देश में फसी हैं। इससे जुड़े दो मानव तस्करों अतीकुर्रहमान व मुजम्मिल को पुलिस जेल भेज चुकी है।

ह्युमन ट्रैफिकिंग से निपटने को लेकर ट्रेनिंग देते सूर्य प्रताप। पुलिस विभाग को भी ट्रेंड किया जा रहा है।
ह्युमन ट्रैफिकिंग से निपटने को लेकर ट्रेनिंग देते सूर्य प्रताप। पुलिस विभाग को भी ट्रेंड किया जा रहा है।

ह्युमन ट्रैफिकिंग के केस बढ़ने पर शुरू हो गई ट्रेनिंग

कोराना काल के बाद अचानक ह्युमन ट्रैफिकिंग के केस बढ़ने के बाद अब जिम्मेदारों की आंख खुली है। पुलिस विभाग ने बचपन बचाओ आन्दोलन ,बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इससे निपटने के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू कर दिए है। साथ ही विभिन्न जज जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वाधान में अब तक 258 बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों, एंटी ह्युमन ट्रैफिकिंग पुलिस स्टेशनों को बाल तस्करी रोक थाम के लिए प्रशिक्षित करने के साथ उन्हें सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं।

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