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कोरोना ने छीन ली सांसें, अब मोक्ष का इंतजार:लखनऊ में गोमती के घाटों पर चिता जलाकर गए परिवार लौटकर अस्थियां लेने नहीं आए, अब अस्थियों का विसर्जन करेंगे समाजसेवी

लखनऊ4 महीने पहले
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रिद्धी के मुताबिक अगले महीने की 10 तारीख को अमावस्या है। हिंदू धर्म में अस्थि विसर्जन के लिए यह दिन शुभ माना जाता है। इसी दिन सभी अस्थियां लेकर उनकी संस्था के कार्यकर्ता अस्थियां लेकर प्रयागराज जाएंगे। - Dainik Bhaskar
रिद्धी के मुताबिक अगले महीने की 10 तारीख को अमावस्या है। हिंदू धर्म में अस्थि विसर्जन के लिए यह दिन शुभ माना जाता है। इसी दिन सभी अस्थियां लेकर उनकी संस्था के कार्यकर्ता अस्थियां लेकर प्रयागराज जाएंगे।
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कोरोना महामारी से उत्तर प्रदेश में हुई मौतों के भयावह मंजर ने लोगों को इतना कमजोर कर दिया कि संस्कारों को निभा पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। एक तरफ हजारों शव जो गंगा की धारा से दो गज की दूरी पर दफन होने के बाद भी मोक्ष के लिए मां गंगा का सानिध्य नहीं पा सके, वहीं, दूसरी ओर लखनऊ में गोमती किनारे जली चिताएं जिनकी अस्थियां मां गंगा तक पहुंचने के लिए अपनों का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में एक समाजसेवी ने अस्थियों के विसर्जन की जिम्मेदारी ली है। वे संगम नगरी प्रयागराज जाएंगे, जहां 10 जून को अमावस्या के दिन अस्थियों का विसर्जन करेंगे।

105 परिवार अपनों की अस्थियां लेने वापस नहीं आए
कोरोना की दूसरी लहर में अप्रैल की शुरुआत से मौतों का सिलसिला शुरु हो गया। प्रदेश की राजधानी और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था की वजह से दूर-दराज के जिलों और पड़ोसी राज्य बिहार व मध्य प्रदेश तक से लोग इलाज के लिए लखनऊ आने लगे। लेकिन लखनऊ उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा और जिन्हें सांसे देने वह यहां आए थे, उन्हें खो दिए।

संक्रमित शव को वापस अपने पिंड तक ले जाना चुनौती भरा और घातक था लिहाजा यहीं पर भैसाकुंड और गुलाला धाट पर दाह संस्कार करके लौट गए। कुछ ने लकड़ी से चिता चलाकर विधि विधान से दाह संस्कार किया तो कुछ ने कोरोना प्रोटोकॉल और नगर निगम की व्यवस्था को सुगम समझकर शव को विद्युत शवदाह गृह के हवाले कर दिया।

मटके और पोटलियों में रखी अस्थियां। ये अस्थियां उनकी हैं, जिनके परिजन अभी तक लेने नहीं आए।
मटके और पोटलियों में रखी अस्थियां। ये अस्थियां उनकी हैं, जिनके परिजन अभी तक लेने नहीं आए।

लेकिन संस्कारों से बंधे ये परिवार जाते-जाते अपनों की अस्थियां सुरक्षित रखने का जिम्मा वहां के पंडों को सौंप गए। पंडों ने इसके लिए कुछ शुल्क लिया। लिहाजा अस्थियों को लॉकर और घड़ों में रखकर उन पर मृतकों नामों का पर्चा चिपका दिया। लेकिन 105 परिवार अपनों की अस्थियां लेने अभी तक लौटकर वापस नहीं आए।

मोक्ष तो गंगा में प्रवाहित होकर मिलेगा, अपने करें या पराए

लखनऊ में श्मशान घाट पर बने लॉकर में रखी अस्थियां।
लखनऊ में श्मशान घाट पर बने लॉकर में रखी अस्थियां।

राजधानी में लबे समय से लावारिस और बेसहारा परिवारों के सदस्यों के शवों का अंतिम संस्कार करवाने वाली संस्था शुभ संस्कार के रिद्धी गौड़ कोरोना से मरने वालों के अंतिम संस्कार में अहम भूमिका निभा रहे हैं। मार्च से अब तक वह करीब सौ से ज्यादा शवों की चिताएं खुद सजा चुके हैं।

रिद्धी ने बताया कि उन्हें घाट के पंडों का फोन आया कि इन अस्थियों का गंगा में प्रवाहित करने का इंतजाम करें। उन्होंने दोनों घाटों पर देखा तो 105 अस्थियां पड़ी थी। इनका दाह संस्कार करने वालों ने अपने जो मोबाइल नंबर यहां दर्ज करवाए थे संपर्क करने पर कुछ बंद मिले कुछ ने आने से इंकार कर दिया। पंडों ने कहा कि मोक्ष के लिए अस्थियों का गंगा में प्रवाहित होना जरुरी है, वह अपने करें या पराए।

रिद्धी के मुताबिक अगले महीने की 10 तारीख को अमावस्या है। हिंदू धर्म में अस्थि विसर्जन के लिए यह दिन शुभ माना जाता है। इसी दिन सभी अस्थियां लेकर उनकी संस्था के कार्यकर्ता अस्थियां लेकर प्रयागराज जाएंगे।

पंडों ने मटकों पर मृतकों के नाम चस्पा किए हैं। ताकि पहचान हो सके। लेकिन इनके परिजनों के नंबर नहीं मिल रहे हैं।
पंडों ने मटकों पर मृतकों के नाम चस्पा किए हैं। ताकि पहचान हो सके। लेकिन इनके परिजनों के नंबर नहीं मिल रहे हैं।

लखनऊ में इतनी अस्थियां

  • भैसाकुंड विद्युत शवदाह गृह- 35
  • भैसकुंड घाट पर चिताओं पर जली- 25
  • गुलाला घाट विद्युत शवदाह गृह में- 30
  • गुलाला घाट पर चिताओं पर जली- 15