महंत की मौत की कहानी, सेवादार की जुबानी:शाम 5 बजे तक नरेंद्र गिरि कमरे से बाहर नहीं निकले थे, मध्यप्रदेश से गुरुमंत्र लेने आए कुछ भक्त बाहर इंतजार कर थे

लखनऊ2 महीने पहले
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महंत नरेंद्र गिरि के सेवादार सर्वेश कुमार द्विवेदी। - Dainik Bhaskar
महंत नरेंद्र गिरि के सेवादार सर्वेश कुमार द्विवेदी।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरि (70) की मौत को लेकर सस्पेंस बरकरार है। महंत की मौत के 12 घंटे बाद उनके सेवादार सर्वेश कुमार द्विवेदी ने रहस्यमय खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार शाम 5 बजे तक महंत नरेंद्र गिरि कमरे से बाहर नहीं निकले थे। मध्य प्रदेश से कुछ भक्त गुरुमंत्र लेने आए थे, माना जा रहा था कि शाम को ही महंत नरेंद्र गिरि इन्हें गुरुमंत्र देंगे।

उधर, सभी लोग कमरे के बाहर महंत का इंतजार कर रहे। मगर महंत बाहर ही नहीं निकले। सेवादार ने बताया कि महंत के कमरे में जाने के दो दरवाजे थे, मगर दोनों ही अंदर से बंद मिले। दरवाजा खटखटाया गया, मगर कोई जवाब नहीं मिला। सेवादारों के धक्का देने पर अंदर से लगी कुंडी टूट गई और दरवाजा खुल गया।

फंदे से लटकते मिले महंत
सेवादार सर्वेश कुमार द्विवेदी, सुमित तिवारी व धनंजय के साथ कमरे के अंदर पहुंचे। सेवादार सर्वेश के मुताबिक, कमरे में महंत नरेंद्र गिरि का शव रस्सी के सहारे पंखे से फंदे पर लटकता हुआ मिला। रस्सी काटकर फंदे से महंत के शव को उतारा और पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना के करीब 10-15 मिनट बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को छानबीन में कमरे से 7 पन्नों का सुसाइड नोट मिला।

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