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नरेंद्र गिरि, 13 अखाड़े और सियासत के समीकरण:67 साल पहले बनी थी अखाड़ा परिषद, कुंभ और महाकुंभ करवाना ही इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी

प्रयागराज/लखनऊ4 महीने पहले
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महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हालात में हुई मौत ने कई सवाल खड़े किए हैं। महंत की मौत से देश में हलचल मच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शोक जताया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत भाजपा के तमाम नेता नरेंद्र गिरि के अंतिम दर्शन के लिए भी पहुंचे हैं। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी महंत के अंतिम दर्शन किए हैं, लेकिन महज इस सियासी हलचल से महंत नरेंद्र गिरि की महता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

आइए जानिए कि क्या है महंत नरेंद्र गिरि की महता? क्यों वे सियासतदानों के इतने करीब थे? और क्या है अखाड़ों की राजनीति?

महंत नरेंद्र गिरि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष थे। देश में 13 अखाड़े हैं और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद इन्हीं अखाड़ों की सर्वोच्च संस्था है। इसमें अलग-अलग संप्रदाय के साधुओं के अखाड़ों का समन्वय है। 3 अक्टूबर 2019 को महंत नरेंद्र गिरि को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के पद पर पांच साल के लिए संत समाज ने दोबारा चुना था। यह चुनाव हरिद्वार (उत्तराखंड) में 13 अखाड़ों की बैठक में किया गया था। वे मूलत: प्रयागराज में ही फूलपुर के रहने वाले थे।

क्या है अखाड़ा परिषद की भूमिका?

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की स्थापना आज से 67 साल पहले 1954 में की गई थी। जिसका उद्देश्य अखाड़ों के बीच में आपसी तालमेल रखने के साथ-साथ कुंभ और महाकुंभ जैसे आयोजनों को सुचारू रूप से संपन्न करवाने में बड़ी भूमिका निभाना भी था।

अखाड़ों का महत्व क्या है?

आदि शंकराचार्य ने सदियों पहले बौद्ध धर्म के बढ़ते प्रसार और मुगलों के आक्रमण से हिंदू संस्कृति को बचाने के लिए अखाड़ों की स्थापना की थी। शाही सवारी, हाथी-घोड़े की सजावट, घंटा-नाद, नागा-अखाड़ों के करतब, तलवार और बंदूक का खुले आम प्रदर्शन इन अखाड़ों की पहचान है। यह साधुओं का वह दल है, जो शस्त्र विद्या में पारंगत होता है।

अखाड़ों से जुड़े संतों के मुताबिक जो शास्त्र से नहीं मानते, उन्हें शस्त्र से मनाने के लिए अखाड़ों का जन्म हुआ। इन अखाड़ों ने स्वतंत्रता संघर्ष में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आजादी के बाद इन अखाड़ों ने अपना सैन्य चरित्र त्याग दिया था। शुरू में सिर्फ 4 प्रमुख अखाड़े थे, लेकिन वैचारिक मतभेद की वजह से उनका बंटवारा होता गया।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाघंबरी मठ पहुंचकर महंत नरेंद्र गिरि को नमन किया।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाघंबरी मठ पहुंचकर महंत नरेंद्र गिरि को नमन किया।

हिंदू धर्म के ये 13 अखाड़े तीन मतों में बंटे हुए हैं

परंपरा के मुताबिक शैव, वैष्णव और उदासीन पंथ के संन्यासियों के मान्यता प्राप्त कुल 13 अखाड़े हैं।

1- शैव संन्यासी संप्रदाय- शिव और उनके अवतारों को मानने वाले शैव कहलाते हैं। इनके सात अखाड़े हैं, इनमें जूना अखाड़ा सबसे बड़ा है। शैव में शाक्त, नाथ, दशनामी, नाग जैसे उप संप्रदाय हैं।

  • श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा (वाराणसी, यूपी)
  • श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी (प्रयागराज, यूपी)
  • श्री पंच अटल अखाड़ा (वाराणसी, यूपी)
  • श्री पंचदशनाम आह्वान अखाड़ा (वाराणसी, यूपी)
  • श्री तपोनिधि आनंद अखाड़ा पंचायती (नासिक, महाराष्ट्र)
  • श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी (प्रयागराज, यूपी)
  • श्री पंचदशनाम पंच अग्नि अखाड़ा (जूनागढ़, गुजरात)

2- वैरागी संप्रदाय- इनके तीन अखाड़े हैं और ये भगवान विष्णु को मानते हैं। भगवान विष्णु को मानने वाले वैष्णव कहलाते हैं। वैष्णवों में बैरागी, दास, रामानंद, वल्लभ, माधव, राधावल्लभ जैसे अन्य उप संप्रदाय हैं।दिगंबर अनी अखाड़े को वैष्णव संप्रदाय में राजा कहा जाता है।

  • श्री दिगंबर अनी अखाड़ा (साबरकांठा, गुजरात)
  • श्री निर्वाणी अनी अखाड़ा (अयोध्या, यूपी)
  • श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा (मथुरा, यूपी)

3- उदासीन संप्रदाय- ये सिख साधुओं का संप्रदाय है, जिसकी कुछ शिक्षाएं सिख पंथ से ली गई हैं। इसमें तीन अखाड़े हैं जो सनातन धर्म को मानते हैं।

  • श्री पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा (प्रयागराज, यूपी)
  • श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन (हरिद्वार, उत्तराखंड)
  • श्री निर्मल पंचायती अखाड़ा (हरिद्वार, उत्तराखंड)

अखाड़ों की राजनीति को समझना जरूरी

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की एक बड़ी जिम्मेदारी संत-महंतों की भूमिका को तय करना भी है। भारतीय अखाड़ा परिषद संत की उपाधि भी देता है। साथ ही अखाड़ा परिषद हिंदू समाज में फैले फर्जी बाबाओं को ब्लैक लिस्ट भी करता है। 10 सितंबर 2017 को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की एक बैठक हुई थी। इसमें 14 बाबाओं की लिस्ट जारी कर उन्हें फर्जी करार दिया गया था।

इन 14 बाबाओं में आसाराम उर्फ आशुमल शिरमानी, सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां, सच्चिदानंद गिरि उर्फ सचिन दत्ता, गुरमीत राम रहीम डेरा सच्चा सिरसा, ओम बाबा उर्फ विवेकानंद झा, निर्मल बाबा उर्फ निर्मलजीत सिंह, इच्छाधारी भीमानंद उर्फ शिवमूर्ति द्विवेदी, स्वामी असीमानंद, ऊं नम: शिवाय बाबा, नारायण साईं, रामपाल, खुशी मुनि, बृहस्पति गिरि और मलखान गिरि के नाम शामिल थे।

साल 2019 में अमित शाह ने प्रयागराज कुंभ में स्नान किया था। तब गंगा पूजन के बाद शाह ने महंत नरेंद्र गिरि का तिलक किया था।
साल 2019 में अमित शाह ने प्रयागराज कुंभ में स्नान किया था। तब गंगा पूजन के बाद शाह ने महंत नरेंद्र गिरि का तिलक किया था।

नरेंद्र गिरि की सपा-भाजपा में थी गहरी नजदीकियां
अखाड़ों का राजनीतिक जुड़ाव भी किसी से छिपा नहीं है। देश के सबसे बड़े जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर साध्वी निरंजना ज्योति केंद्र की मोदी सरकार में राज्यमंत्री हैं। महंत नरेंद्र गिरि का भी समाजवादी पार्टी से गहरा नाता रहा है। उन्हें मुलायम-अखिलेश परिवार का राजनीतिक गुरू भी कहा गया। हालांकि, सत्ता परिवर्तन के बाद से उनकी नजदीकी भाजपा से हो गई। यही वजह रही कि आनंद गिरि से विवाद में सपा-भाजपा दोनों पार्टियों के नेता समझौता कराने में थे।

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