UP के फूलपुर से नीतीश कुमार लड़ेंगे चुनाव ?:लोकसभा चुनाव की तैयारी में JDU, अंबेडकरनगर और मिर्जापुर से भी ऑफर

लखनऊ16 दिन पहले

राजनीति में एक पुरानी कहावत है कि दिल्ली की गद्दी का रास्ता यूपी से होकर जाता है। इसी गद्दी तक पहुंचने के लिए बिहार के CM नीतीश कुमार विपक्षी एकता की बात कर रहे हैं। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि खबर है कि नीतीश कुमार यूपी के प्रयागराज के फूलपुर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं।

JDU यानी जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष लल्लन सिंह ने कहा है, "कार्यकर्ताओं की मांग है कि नीतीश कुमार यूपी के फूलपुर, मिर्जापुर या अंबेडकर नगर से चुनाव लड़ें। हालांकि, अभी इस पर अंतिम फैसला लिया जाना बाकी है।" लल्लन सिंह के बयान के बाद यूपी की सियासत में हलचल मच गई है।

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नीतीश कुमार का दिल्ली वाया यूपी प्लान क्या है?
जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने रविवार को संकेत दिया था कि नीतीश कुमार यूपी से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह माना जाएगा कि नीतीश दिल्ली की गद्दी पर बैठना चाहते हैं। जिस तरह से पीएम मोदी 2014 के लोकसभा चुनाव में काशी से चुनाव लड़कर दिल्ली की गद्दी पर पहुंचे थे।

यह फोटो नीतीश कुमार की है। लोकसभा चुनाव- 2024 में यूपी के फूलपुर से चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है।
यह फोटो नीतीश कुमार की है। लोकसभा चुनाव- 2024 में यूपी के फूलपुर से चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है।

कुछ ऐसे ही, नीतीश कुमार भी फूलपुर से सीधे दिल्ली की गद्दी तक पहुंचना चाहते हैं। दूसरी वजह यह भी हो सकती है कि फूलपुर की यह सीट पीएम मोदी की लोकसभा सीट वाराणसी से महज 100 किलोमीटर की दूरी पर है। इस सीट पर नजर के मायने सीधे पीएम मोदी को चुनौती देना भी हो सकता है।

यह फोटो नीतीश कुमार और मुलायम सिंह यादव की दिल्ली के अस्पताल में मुलाकात के दौरान की है।
यह फोटो नीतीश कुमार और मुलायम सिंह यादव की दिल्ली के अस्पताल में मुलाकात के दौरान की है।

फूलपुर से चुनाव लड़ने के मायने?
फूलपुर लोकसभा सीट कई मायनों में नीतीश कुमार के लिए सहज है। फूलपुर में कुर्मी यानी पटेल वोटर निर्णायक भूमिका में हैं। इसके अलावा यादव-दलित व मुस्लिम भी किसी का गणित बनाने व बिगाड़ने की हालत में हैं। अखिलेश का साथ मिलने से नीतीश कुमार के लिए यह सीट आसान हो सकती है। साथ ही फूलपुर, अंबेडकरनगर या फिर मिर्जापुर से चुनाव लड़कर नीतीश पूर्वांचल के सियासी माहौल को बदल सकते हैं।

ओबीसी की कुर्मी और यादव जाति को साथ लेकर नीतीश कुमार पूर्वांचल की कई सीटों पर असर डाल सकते हैं। ललन सिंह ने भी कहा है, ''यूपी में 80 लोकसभा सीट है। इसमें 65 पर बीजेपी काबिज है। अगर अखिलेश यादव और नीतीश कुमार मिल जाए तो बीजेपी 15-20 सीटों पर सिमट जाएगी।''

बिना UP साधे PM का ख्वाब अधूरा होगा
नीतीश कुमार यह जानते हैं कि बिहार की महज 40 सीटों के दम पर वो पीएम की कुर्सी तक नहीं पहुंच सकते हैं। इसीलिए वह लगातार विपक्षी दलों को जोड़ने की बात कर रहे हैं। देश में सबसे ज्यादा सांसद देने वाला राज्य यूपी है। अखिलेश यादव की सपा सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी। शायद इसीलिए दिल्ली में नीतीश कुमार की मुलायम और अखिलेश से मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है।

खबर तो यह भी है कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नीतीश को राज्य में अपनी पसंद की किसी भी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिए हैं। साथ ही अपनी पार्टी के समर्थन का वादा भी किया है।

यह फोटो लखनऊ में सपा दफ्तर के बाहर लगे पोस्ट की है। इस पोस्टर में लिखा था, 'यूपी+बिहार= गयी मोदी सरकार'।
यह फोटो लखनऊ में सपा दफ्तर के बाहर लगे पोस्ट की है। इस पोस्टर में लिखा था, 'यूपी+बिहार= गयी मोदी सरकार'।

8 दिन पहले सपा कार्यालय पर लगे थे पोस्टर
साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश में हैं। नीतीश कुमार के दिल्ली दौरे से राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई थी। इसी दौरान समाजवादी पार्टी ने नीतीश कुमार और अखिलेश यादव के साथ एक पोस्टर पिछले शनिवार को जारी किया था। इसमें लखनऊ में सपा कार्यालय के बाहर लगाया गया था। इस पोस्टर में लिखा था, 'यूपी+बिहार= गयी मोदी सरकार'।

कभी PM की सीट होती थी फूलपुर
कुर्मी बाहुल्य फूलपुर सीट को देश का पहला प्रधानमंत्री देने का रुतबा हासिल है। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू यहां से तीन बार साल 1952, 1957 और 1962 में सांसद चुने गए थे। पंडित नेहरू के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह भी 1971 में यहां से सांसद रहे हैं।

पंडित नेहरू की विरासत वाली इस सीट पर कई दिग्गज हस्तियों को जीत मिली है। साथ ही, डॉक्टर राम मनोहर लोहिया, बीएसपी संस्थापक कांशीराम और पूर्व केंद्रीय मंत्री जनेश्वर मिश्र जैसे बड़े नेताओं को हार का सामना भी करना पड़ा है। भाजपा को इस सीट पर पहली बार 2014 की मोदी लहर में ही जीत मिली थी।

यह फोटो दोनों डिप्टी सीएम केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक की है।
यह फोटो दोनों डिप्टी सीएम केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक की है।

केशव बोले- मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख रहे हैं नीतीश कुमार
नीतीश के यूपी के फूलपुर से चुनाव लड़ने की खबर पर डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने तंज कसा है। केशव ने कहा है कि नीतीश कुमार मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख रहे हैं। साल 2014 में लोकसभा का चुनाव अकेले लड़े थे। केवल दो सीटों पर विजय मिली थी।

इस बार दो सीट भी जीत पाएंगे या नहीं, क्योंकि इस बार तो उनकी सीट पर बैठ कर सुपर सीएम की तरह लालू सरकार चला रहे हैं। 2024 में हम यूपी के सभी 80 सीटें जीतेंगे। इस बार यूपी में सपा का भी खाता तक नहीं खुलेगा। अखिलेश यादव जिस तरह सत्ता के लिए तड़प रहे हैं। वैसे ही तड़पते रहेंगे। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा है कि यूपी में नीतीश कुमार कुछ नहीं कर पाएंगे।

नीतीश और अखिलेश के साथ आने से बदलेगी यूपी की सियासत?
लोकसभा चुनाव में नीतीश और अखिलेश के साथ आने का मतलब क्या है? भाजपा को रोकने में यह कितना कारगर होगा? यह समझने के लिए हमें 2019 में हुए लोकसभा चुनाव को समझना होगा। उत्तर-प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटें हैं। बिहार में 40 यानी इस तरह दोनों यूपी और बिहार को मिलाकर कुल 120 लोकसभा की सीटें है।

UP में भाजपा ने 62 और सहयोगी अपना दल ने 2 सीटें जीती थीं। इस प्रकार NDA 64 सीटें जीती थी। जबकि बिहार NDA ने 39 सीटें जीती थीं। दोनों राज्यों में 120 में से NDA को 103 सीटें मिली थीं।

यह फोटो नीतीश कुमार और अखिलेश यादव की है। मेदांता में नीतीश कुमार मुलायम सिंह यादव से मिलने गए थे।
यह फोटो नीतीश कुमार और अखिलेश यादव की है। मेदांता में नीतीश कुमार मुलायम सिंह यादव से मिलने गए थे।

UP में भाजपा बनाम अन्य
2019 के लोकसभा चुनाव में UP में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 62 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं, उसकी सहयोगी अपना दल को भी 2 सीटें मिली हैं। दूसरी तरफ विपक्षी सपा-बसपा-रालोद का महागठबंधन सिर्फ 15 और कांग्रेस 1 सीटों पर सिमट गई।

इस चुनाव में सपा के खाते में महज 5 सीटें ही आई थीं, जबकि बसपा को 10 सीटें मिली थीं। इतना ही नहीं वोट शेयर भी भाजपा का सपा और बसपा से ज्यादा था। चुनाव आयोग से मिले आंकड़ों के मुताबिक भाजपा का 49.6% वोट शेयर था। दूसरी, ओर बसपा का वोट शेयर 19.26%, सपा का 17.96% , और रालोद को 1.67% वोट शेयर था। वहीं कांग्रेस का वोट शेयर महज 6.31% था।