प्रियंका के काव्या पाठ पर विवाद:लेखक पुष्यमित्र ने चोरी का लगाया आरोप, कहा- घटिया राजनीति के लिए मेरी कविता नहीं

लखनऊ10 महीने पहले
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प्रियंका गांधी पर कविता चोरी करने का आरोप लगा है। कांग्रेस महासचिव पर यह आरोप 'उठो द्रौपदी शस्त्र संभालो' कविता के लेखक पुष्यमित्र ने ही लगाया है। दरअसल बुधवार को प्रियंका गांधी चित्रकूट दौरे पर थीं। इस दौरान उन्होंने मंदाकिनी नदी किनारे रामघाट पर महिलाओं से संवाद किया। संवाद के दौरान यूपी प्रभारी प्रियंका ने 'उठो द्रौपदी शस्त्र संभालो' काव्य की पंक्तियां पढ़ीं थीं। अब इस बात पर कवि पुष्यमित्र उपाध्याय ने आपत्ति जता दी है। पुष्यमित्र ने प्रियंका पर कविता चोरी करने का आरोप लगाया।

ट्विटर पर आपत्ति जताकर लिखा मैंने आपको अनुमति नहीं दी थी

पुष्यमित्र ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की उस पोस्ट को री-ट्वीट भी किया है, जिसमें उन्होंने प्रियंका गांधी का वीडियो शेयर किया था। पुष्पमित्र ने लिखा, ‘प्रियंकाजी ये कविता मैंने देश की स्त्रियों के लिए लिखी थी न कि आपकी घटिया राजनीति के लिए। न तो मैं आपकी विचारधारा का समर्थन करता हूं और न आपको ये अनुमति देता हूं कि आप मेरी साहित्यिक संपत्ति का राजनीतिक उपयोग करें। कविता भी चोरी कर लेने वालों से देश क्या उम्मीद रखेगा?’

पुष्यमित्र ने आगे कहा, ‘2012 में निर्भया प्रकरण पर लिखी गई कविता का संदेश और आह्वान आपकी राजनीतिक कुंठाओं से अलग और व्यापक है। राजनीतिक संस्थानों से अनुरोध है कि कविता का प्रयोग क्षुद्र राजनीतिक आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए कर के इसके मर्म को दूषित न करें।’

पुष्पमित्र उपाध्याय को उनकी इस कविता के लिए हिंदी संस्थान की तरफ से पुरस्कार भी मिल चुका है।
पुष्पमित्र उपाध्याय को उनकी इस कविता के लिए हिंदी संस्थान की तरफ से पुरस्कार भी मिल चुका है।

प्रियंका ने कहा था- राजनीति में महिलाओं का आना होगा आगे

प्रियंका ने बुधवार को चित्रकूट में मत्स्यगजेन्द्रनाथ मंदिर में पूजा पाठ कर मंदाकिनी नदी के रामघाट पर महिलाओं से संवाद किया था। यहां उन्होंने कहा, ‘राजनीति में आजकल बहुत क्रूरता और हिंसा है। लखीमपुर में मंत्री के बेटे ने किसानों को कुचल ​दिया। सरकार ने अत्याचारी की मदद की। आशा बहनों को प्रशासन ने अपनी मांगों को उठाने पर बुरी तरह पीटा।’

प्रियंका ने आगे कहा, ‘जब आपका शोषण किया जा रहा है और आप पर अत्याचार किया जा रहा है, आपको पीटने वालों से अपना हक मांगेंगे तो वो हक कभी नहीं मिलेगा। अपने हक के लिए लड़ना पड़ेगा। जो सरकार आपके लिए कुछ कर ही नहीं रही है तो उसे आगे क्यों बढ़ाना?’ इसी वक्त उन्होंने कवि पुष्यमित्र की कविता का इस्तेमाल अपने भाषण में किया था।

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