मिलिए महराजगंज के बिग-बी टीचर जावेद से:कौन बनेगा सैकड़ा पति गेम से करवाते जीके की पढ़ाई, चॉक से बना लेते दाढ़ी

महराजगंज3 महीने पहले

देवियों और सज्जनों एक बार फिर वही ज्ञानदार, धनदार और शानदार कौन बनेगा सैकड़ापति में आपका स्वागत है…एक बार फिर ज्ञान की बरसात होगी और ज्ञान के साथ आपको मिलेगा धन। आइए तो शुरू करते हैं आज का गेम और बुलाते हैं अपनी पहली प्रतिभागी अनुराधा को। जोरदार तालियों से स्वागत करिए इनका…आइए प्लीज

ये जो सीन है वो किसी सीरियल का नहीं बल्कि महराजगंज के रौतार गांव के जूनियर हाईस्कूल का है और जो युवक यहां पर बच्चों का स्वागत कर रहा है वो कोई एक्टर नहीं बल्कि यहां के शिक्षक हैं। जिनका नाम है जावेद आलम।

बच्चों का अमिताभ बच्चन की तरह स्वागत करते जावेद।
बच्चों का अमिताभ बच्चन की तरह स्वागत करते जावेद।

केबीसी की तरह हर सवाल के बाद बढ़ जाता है बच्चों का पैसा

जावेद ने स्कूल के बच्चों का जनरल नॉलेज स्ट्रांग करने के लिए ये अनोखा तरीका अपनाया है। वो स्कूल के अंदर हर शनिवार ये शो करके बच्चों से सवाल-जवाब करते हैं। केबीसी की तरह हर सवाल के बाद पैसा बढ़ा देते हैं। कुल 12 सवाल वो बच्चे से पूछते हैं। पहला जवाब सही देने पर 5 रुपए देते हैं। उसके बाद दूसरे सही जवाब पर 10 रुपए देते हैं। ऐसी ही पैसे बढ़ते रहते हैं। वो बच्चों को मदद के लिए हेल्प लाइन भी देते हैं।

बिग-बी की स्टाइल में शो के अंदर आते जावेद।
बिग-बी की स्टाइल में शो के अंदर आते जावेद।

स्कूल के बरामदे में 2 हॉट सीट भी रखी गई हैं। जिसमें एक सीट पर प्रतिभागी बैठता है और दूसरी पर जावेद। जावेद पर्ची पर सवाल लिखकर प्रतिभागी को देते हैं। उसी में 4 ऑप्शन भी लिख देते हैं। उसके बाद वो प्रतिभागी से जवाब मांगते हैं। प्रतिभागी के जवाब देने पर वो उससे पूछते हैं, क्या इसे लॉक कर दें। हां कहने पर वो प्रतिभागी को जवाब के सही या गलत होने की जानकारी देते हैं।

जावेद का पढ़ाई का ये अनोखा अंदाज देखकर भास्कर ने उनसे बात की। जावेद आलम बताते हैं, "इस तरह से बच्चों को पढ़ाने का बस एक ही मकसद है…वो है बच्चों की संख्या बढ़ाना। शनिवार के दिन बहुत कम बच्चे स्कूल आते थे लेकिन जब से ये शो शुरू हुआ है, हर बच्चा स्कूल आता है। कभी-कभी तो गांव के लोग भी इसमें भाग लेते हैं। लोगों का कहना है, इस शो से वो अपडेट रहते हैं।"

हॉट सीट पर बच्चों से करते हैं सवाल।
हॉट सीट पर बच्चों से करते हैं सवाल।

जावेद ने बताया, "वो बिग-बी के बहुत बड़े फैन हैं। उनको बिग-बी का हर अंदाज बहुत अच्छा लगता है। वो इस शो में उन्हीं की तरह तैयार होते हैं। उन्होंने स्कूल में 2 कोट-पैंट के सेट रख लिए हैं। शो के दौरान वो वही पहन लेते हैं। चॉक से दाढ़ी बना लेते हैं। बालों को भी चॉक से सफेद कर लेते हैं। शनिवार के दिन शो के दौरान वो 2-3 बच्चों को ही बुलाते हैं। उन्हीं के साथ गेम खेलते हैं। हर शनिवार को वो अपना प्रतिभागी बदल देते हैं।"

बीएसए ने भी खेला सैकड़ा पति गेम। इनाम भी जीता।
बीएसए ने भी खेला सैकड़ा पति गेम। इनाम भी जीता।

आलम आगे बताते हैं, "इस शो की रील बनाने की वजह से उनका सस्पेंशन लेटर आ गया था। किसी ने उनकी शिकायत कर दी थी। लेकिन जब वो बीएसए के पास पहुंचे तो उन्होंने इस शो के बारे में उनको विस्तार से बताया। उन्हें बताया, इस शो में कुछ भी गलत नहीं है। बच्चे इस शो में बहुत कुछ सीख रहे हैं। जिसके बाद मेरा लेटर उन्होंने कैंसल कर दिया था।"

जिस स्कूल में पोस्टिंग हुई वहां पर नहीं बना था स्कूल, किराए पर कमरा लेकर शुरू करवाई पढ़ाई

जावेद बताते हैं, "पढ़ाई पूरी होने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग महराजगंज के कटका गांव में 2013 में हुई थी। वहां पर प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के रूप में उनकी पोस्टिंग हुई थी। उस स्कूल की हालत ऐसी थी कि वहां कोई भी बच्चा पढ़ने नहीं आता था। बस बच्चे खेलने कूदने के लिए स्कूल आते फिर चले जाते। मुझे ये देखकर बहुत बुरा लगा। धीरे-धीरे मैंने वहां के लोगों के बीच में पढ़ाई को लेकर जागरूकता पैदा की। बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाना शुरू किया। जिसके बाद उस स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ने लगी। स्कूल के बच्चे बाहर खेलने भी जाया करते थे। यहां 3 साल नौकरी करने के बाद मेरा प्रमोशन हो गया। साथ में ट्रांसफर भी हो गया। मुझे महराजगंज के रौतार गांव के जूनियर हाईस्कूल में भेज दिया गया। यहां से मेरी अग्नि परीक्षा शुरू हो जाती है।"

बच्चों को स्कूल लाने के लिए जावेद उन्हें गिफ्ट देते, गुब्बारे देते।
बच्चों को स्कूल लाने के लिए जावेद उन्हें गिफ्ट देते, गुब्बारे देते।

"जब मैं पहले दिन स्कूल जाने के लिए रातौर गांव पहुंता तो वहां पर जूनियर हाईस्कूल के नाम पर तबेला बना हुआ था। मतलब स्कूल खंडहर था। वहां पर गांव के लोगों ने गाय-भैंस बांध रखी थी। मैंने अधिकारियों से फोन पर बात की तो उन्होंने कहा, पेड़ के नीचे बैठाकर बच्चों को पढ़ा दो। लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। मैंने ठान लिया था कि यहां स्कूल जरूर बनवाऊंगा। मेरे साथ मेरे दोस्त सुमित भी थे। उन्होंने भी मेरा पूरा साथ दिया।"

स्कूल के अंदर चल रहा था तबेला। कोई क्लास नहीं बनी हुई थी।
स्कूल के अंदर चल रहा था तबेला। कोई क्लास नहीं बनी हुई थी।

"पहले तो जल्द से जल्द बच्चों की पढ़ाई शुरू करवाने के लिए मैंने बगल में बने प्राथमिक विद्यालय में एक कमरा किराए पर लिया। उसमें एक क्लास में बच्चों के बैठने की व्यवस्था की। तब कुछ 10 से 12 बच्चे स्कूल आया करते थे। उसके बाद हम लोग गांव में निकल गए बच्चों को स्कूल लाने के लिए। धीरे-धीरे हमारे क्लास में बच्चे आने लगे। उधर हमने स्कूल बनवाने के लिए बजट का प्रस्ताव भी रखा। कुछ ही दिनों में बजट पास हो गया। उसके बाद हम लोग सुबह बच्चों को पढ़ाते, शाम में स्कूल बनवाते।"

गांव के पशु पालक अपने जानवरों को स्कूल में बांध देते थे।
गांव के पशु पालक अपने जानवरों को स्कूल में बांध देते थे।

"जब हमारा स्कूल बनकर तैयार हुआ तो गांव के लोगों और बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं था। पूजा-पाठ के बाद हम लोग स्कूल के अंदर गए। उसके बाद वहां पर पढ़ाई शुरू की। सब कुछ ठीक था लेकिन बच्चे ज्यादा टाइम स्कूल में रुकते नहीं थे। वो लोग खेलने के बाद स्कूल से भाग जाते। जिसके बाद मैंने खेल और पढ़ाई को मिला दिया। कुछ ही दिनों में स्कूल में बच्चों की संख्या 50 हो गई।"

बच्चों के साथ नुक्कड़ नाटक करते।
बच्चों के साथ नुक्कड़ नाटक करते।

अब जावेद मैथ ग्राउंड में पढ़ाते हैं। हिंदी डांस करके और इंग्लिश गाना गाकर। लेकिन शनिवार के दिन स्कूल खाली रहता। कोई बच्चा पढ़ने नहीं आता था। उसके बाद हम लोगों ने ये शो शुरू कर दिया और बच्चों की संख्या बढ़ती ही चली गई।

ग्राउंड पर बच्चों के साथ खेलते।
ग्राउंड पर बच्चों के साथ खेलते।

सिर्फ शो ही नहीं चलाते जावेद, बच्चों को गुब्बारे की निशानेबाजी से पढ़ाते हैं हिंदी की वर्णमाला

जावेद स्कूल में रोज ही कुछ-न-कुछ नया करके बच्चों को खुश करते रहते हैं। वो हिंदी के शब्दों को गुब्बारे पर लिख देते हैं। उसके बाद बच्चों से कहते हैं, मैं जो शब्द बोलूं, उस पर निशाना लगाना। ऐसा करने से बच्चों को सारे शब्द आसानी से याद हो जाते हैं। इसके अलावा वो बच्चों को नकली बंदर को हाथ में लेकर पढ़ाते हैं।

हाथ में बंदर लेकर बच्चों से पूछते सवाल।
हाथ में बंदर लेकर बच्चों से पूछते सवाल।

उनके हाथ में टंगा बंदर बच्चों से सवाल पूछता है और बच्चे खुशी-खुशी जवाब देते हैं। वो बच्चों के झुंड से त्रिभुज, गुणा, वर्ग की आकृति बनवाते हैं। साथ ही बच्चों को जागरुक करने के लिए नुक्कड़ नाटक का आयोजन भी करवाते हैं। हर त्योहार में बच्चों को सजाते हैं और कार्यक्रम करवाते हैं। पढ़ाते-पढ़ाते बच्चों के साथ डांस करने लगते हैं। जिससे बच्चों का मन लगा रहे।

ब्लैक बोर्ड पर गुब्बारे चिपका कर करवाते बच्चों की पढ़ाई।
ब्लैक बोर्ड पर गुब्बारे चिपका कर करवाते बच्चों की पढ़ाई।

जावेद बताते हैं, "स्कूल के बच्चे उनको बहुत प्यार करते हैं। उनकी बर्थडे पर उनके लिए कमरा सजाते हैं और गिफ्ट लाते हैं। केक वो लेकर जाते हैं। फिर सब मिलकर काटते हैं। बच्चों को अपने हाथों से नहलाते हैं। उनको तैयार करते हैं। बताते हैं, उनको कभी भी किसी बच्चे को डांटने की जरूरत नहीं पड़ी। सब बच्चे उनकी बहुत बात मानते हैं।"

स्कूल के अंदर जन्माष्टमी मनाते जावेद।
स्कूल के अंदर जन्माष्टमी मनाते जावेद।

बता दें जावेद ने 2013 में शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहली नौकरी की। उन्होंने बीटीसी, बीएड और नेट कर रखा है। उनकी पत्नी प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं। उनके 2 बच्चे भी हैं। वो महराजगंज के ही रहने वाले हैं।

अपने स्कूल के बच्चों के साथ मस्ती करते जावेद।
अपने स्कूल के बच्चों के साथ मस्ती करते जावेद।
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