महराजगंज में दो परिवारों के बीच सियासत:नौतनवा विधानसभा में संकट में रहे सियासी दल, ठाकुर और ब्राह्मण परिवारों के बीच घूमती है सियासी धुरी

5 महीने पहले
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जनसंपर्क में जुटे अमनमणि त्रिपाठी। - Dainik Bhaskar
जनसंपर्क में जुटे अमनमणि त्रिपाठी।

महराजगंज की नौतनवा विधानसभा में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जानकारों की मानें तो यहां की राजनीति ठाकुर बनाम ब्राह्मण परिवारों के इर्दगिर्द ही सिमटती रही है। बाहुबली नेताओं की गढ़ रही नौतनवा विधानसभा प्रदेश की चुनिंदा विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। यहां भाजपा अब तक कमल खिलाने में नाकाम रही है। इस बार भी भाजपा की जीत पर असमंजस की स्थिति है।

दो परिवारों के बीच सिमटी सियासत
बीते चार दशक के चुनाव परिणाम पर नजर डालें तो नौतनवा की सियासत दो परिवारों के बीच ही सिमट गई है। किसी तीसरे को यहां से पनपने का मौका ही नहीं मिला। यहां के चुनाव परिणाम भी यह बताते हैं यहां सियासी दलों का अपना कोई वोट बैंक नहीं है। सियासी हालत यह है कि जिस दल से यह दोनों परिवार चुनाव लड़ा, उसी दल को जीत मिली।

लक्ष्मीपुर विधानसभा का नाम नौतनवा किया गया
पिछले विधानसभा में मोदी लहर के बाद भी यहां पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के पुत्र अमन मणि निर्दल चुनाव लड़े और विधायक बन गए। परिसीमन के बाद लक्ष्मीपुर विधानसभा का नाम नौतनवा कर दिया गया। स्थिति यह है कि चुनावी तस्वीर जेहन में आते ही नौतनवा विधानसभा के सियासी अक्स में अमरमणि त्रिपाठी व कुंवर अखिलेश सिंह की तस्वीर पहले उमड़ती है। वीरेन्द्र प्रताप शाही व अखिलेश सिंह दो-दो बार तो अमर मणि त्रिपाठी यहां से चार बार विधायक रह चुके हैं। कुंवर अखिलेश सिंह के बाद उनके छोटे भाई कुंवर कौशल सिंह और अमर मणि के पुत्र अमन मणि एक-एक बार विधायक बने हैं। इनके अलावा किसी तीसरे की सियासी दाल यहां नहीं गल पाई है।

जनसंपर्क करते पूर्व विधायक कुंवर कौशल सिंह मुन्ना ।
जनसंपर्क करते पूर्व विधायक कुंवर कौशल सिंह मुन्ना ।

80 के दशक से रहीं सियासी सरगर्मियां
अस्सी के दशक में इस विधानसभा की पहचान लक्ष्मीपुर के रूप में थी। तब पहली बार छात्र राजनीति से उभरे बाहुबली नेता वीरेन्द्र प्रताप शाही ने लक्ष्मीपुर से विधानसभा की सियासत में कदम रखा। उनको अखिलेश सिंह का साथ मिला। निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में वीरेन्द्र प्रताप शाही पहली बार अमर मणि को शिकस्त देकर विधायक बने। उस चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी से गठबंधन के टिकट पर अमर मणि चुनाव लड़े थे। पांच साल बाद 1985 के चुनाव में वीरेन्द्र प्रताप शाही को लगातार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत मिली। रेलवे के ठेका को लेकर वीरेन्द्र प्रताप शाही की हत्या के बाद 1989 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के टिकट पर अमरमणि लक्ष्मीपुर से विधानसभा चुनाव में उतरे और पहली बार विधायक बने। पर, वर्ष 1991 के चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार कुंवर अखिलेश सिंह से अमर मणि चुनाव हार गए। वहीं, 1993 के चुनाव में कुंवर कौशल सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर विधायक बने। उसके बाद लगातार तीन चुनाव 1996, 2002 व 2007 के चुनाव में अमर मणि कांग्रेस, बसपा व सपा के टिकट पर चुनाव लड़े और जीत की हैट्रिक लगाई। कल्याण सिंह के सरकार में पहली बार अमर मणि त्रिपाठी मंत्री बने। पर, उसी सरकार में एक अपहरणकांड में अमर मणि का नाम सामने आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया।

अमनमणि त्रिपाठी की बहनों ने संभाली थी कमान
मधुमिता हत्याकांड में अमर मणि त्रिपाठी को सजा होने के बाद सोलहवीं विधानसभा में उनके पुत्र अमन मणि सपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन वह कुंवर अखिलेश सिंह के छोटे भाई कुंवर कौशल सिंह उर्फ मुन्ना सिंह से चुनाव हार गए। कुंवर कौशल सिंह कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़े थे। कांग्रेस का विधायक होने के बाद भी मुन्ना सिंह ने अपने भाई व वरिष्ठ सपा नेता पूर्व सांसद कुंवर अखिलेश सिंह के समर्थन में कई बार साइकिल चलाई। नतीजतन सत्रहवीं विधानसभा में वह सपा में शामिल हो गए। सपा ने अमन मणि का टिकट काट कुंवर कौशल सिंह उर्फ मुन्ना सिंह को दे दिया। उनके मुकाबले निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जेल में बंद रहते हुए अमन मणि ने ताल ठोंक दिया। बहनों ने प्रचार की कमान संभाली। जिसमें अमन मणि त्रिपाठी को जीत हासिल हुई और वह विधायक बने।

कई उम्मीदवार ठोक रहे हैं दावा
पूर्वांचल की सुर्खियों में रहने वाली नौतनवा विधानसभा सीट से अभी किसी दल ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है । उसके मुताबिक भाजपा के जिला महामंत्री ऋषि त्रिपाठी, पूर्व जिलाध्यक्ष व पूर्व प्रत्याशी समीर त्रिपाठी व लालचंद चौधरी भारतीय जनता पार्टी की टिकट के लिए दावेदारी ठोंके हैं। हालांकि, अभी तक पार्टी ने प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। सपा से पूर्व विधायक कुंवर कौशल सिंह उर्फ मुन्ना सिंह के अलावा एजाज खान टिकट की दौड़ में शामिल हैं, लेकिन सपा ने भी अपना पत्ता नहीं खोला है। यही हाल बसपा व कांग्रेस का भी है। खबर यह आ रही है कि निर्दलीय विधायक अमन मणि त्रिपाठी भी किसी दल से टिकट पर चुनाव लड़ने की कोशिश में हैं। हालांकि, स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

पिछली बार 61.47 फीसदी मतदान हुआ था
नौतनवा विधानसभा में वर्ष 2017 विधानसभा चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या 3 लाख 49 हजार 621 थी। 61.47 फीसदी मतदान हुआ था। चुनाव मैदान में दस प्रत्याशी उतरे थे। जिसमें निर्दल प्रत्याशी अमन मणि त्रिपाठी को सर्वाधिक 37.07 फीसदी वोट मिले और वह विधायक निर्वाचित हुए थे। उनको 79 हजार 666 वोट मिले थे। दूसरे स्थान पर सपा प्रत्याशी कुंवर कौशल सिंह उर्फ मुन्ना सिंह रहे। उनको 47 हजार 410 मत मिले थे। भाजपा प्रत्याशी समीर त्रिपाठी 45 हजार 50 वोट के साथ तीसरे व बसपा प्रत्याशी एजाज अहमदी 26 हजार 210 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। निर्बल भारत शोषित हमारा आम दल के प्रत्याशी अनिल को 5 हजार 47, रालोद के प्रत्याशी सदामोहन को 2770 वोट, एआईएमआईएम की प्रत्याशी कामिनी जायसवाल को 1797 वोट, बहुजन मुक्ति पार्टी के उम्मीदवार को 1358, जन अधिकार पार्टी के प्रत्याशी अभिषेक को 927 व राकांपा के प्रत्याशी को 802 वोट मिले थे।

इस बार तीन मार्च को होगा मतदान
नौतनवा विधानसभा क्षेत्र में इस बार 3 लाख 65 हजार 764 मतदाता अपने विधायक का चुनाव करेंगे। इसके लिए 451 मतदान स्थल बनाए गए हैं। मतदाताओं में महिलाओं की संख्या 1 लाख 72 हजार 312 है। छठवें चरण में तीन मार्च को मतदान होगा। दस मार्च को चुनाव परिणाम सामने आएगा। अभी भाजपा, सपा, बसपा व कांग्रेस ने इस सीट से अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं किया है।