मथुरा के मांट में मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं का तांता:ऐसा मंदिर जहां मां लक्ष्मी आज भी कर रहीं तपस्या, श्रीकृष्ण खिचड़ी, गजक और रेवड़ी का लगाते हैं भोग

मांट4 महीने पहले

मथुरा के मांट तहसील क्षेत्र अंतर्गत आने वाले जंहागीरपुर गांव के निकट स्थित प्रसिद्ध बेलवन मंदिर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। यहां मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां लक्ष्मी के दर्शन कर पूजा अर्चना की और खिचड़ी, गजक और रेवड़ी का भोग लगाया।

पूरी होती हैं मनोकामनाएं

मान्यता है कि यहां मां लक्ष्मी आज भी तपस्या कर रही हैं और मकर संक्रांति पर भगवान श्री कृष्ण उन्हें खिचड़ी, गजक और रेवड़ी का भोग लगाते हैं। आज के दिन मांगी गईं सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। दर्शनों के उपरांत श्रद्धालु यहां आयोजित मेले में खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण करके खुद को धन्य मानते हैं।

मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण मांट के निकटवर्ती यमुना किनारे बेल वन में रास रचाने आते थे। एक बार जब भगवान वहां रास रचाने आए और उन्होने बांसुरी बजाई तो उसकी आवाज देवलोक और स्वर्गलोक तक पहुंची। मधुर आवाज सुनकर महालक्ष्मी जी ने नारद जी से पूछा कि, यह आवाज कैसी है। नारद जी बोले कि, बेलवन में यमुना किनारे भगवान श्रीकृष्ण बांसुरी बजा रहे हैं। महालक्ष्मी जी से रहा नही गया और वह बेलवन आ गईं।

रास में जाने से गोपियों ने रोका

यहां पहुंचकर जैसे ही उन्होंने रास में प्रवेश करना चाहा तो वहां पर मौजूद गोपियों ने उन्हें रोक दिया। इस पर महालक्ष्मी जी ने गोपियों को भला-बुरा कह दिया जो भगवान को बुरा लगा और उन्होंने महालक्ष्मी से कहा कि, यह साधारण गोपियां नहीं हैं। इन गोपियों ने मेरे रास में शामिल होने के लिए हजारों वर्ष तपस्या किया है तब इन्होंने रास में शामिल होने का शौभाग्य प्राप्त किया है।

महालक्ष्मी जी कर रहीं हैं तपस्या

श्री कृष्ण जी ने कहा कि महालक्ष्मी जी यदि आपको रास में शामिल होना है तो पहले हजारों वर्ष तपस्या करनी होगी और गोपियों को प्रसन्न करना होगा तब आपको रास में शामिल करूंगा। मान्यता है कि तब से महालक्ष्मी जी यहां गोपी रूप में तपस्या कर लोगों की मनोकामना पूर्ण कर रही हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय इस वन में वेल की प्रचुरता के कारण इस स्थान को बेलवन कहा जाता है। पौष माह में यहां पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है।

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