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सावन का पहला सोमवार:बृज के शिवालयों में दर्शन के लिए पहुंचे सैकड़ों भक्त, बम बम भोले के जयकारों से गूंजी कान्हा की नगरी

मथुरा2 महीने पहले
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महामारी को देखते हुए बारी बारी से भक्तों को दर्शन की अनुमति दी गई। - Dainik Bhaskar
महामारी को देखते हुए बारी बारी से भक्तों को दर्शन की अनुमति दी गई।

श्रावण मास के पहले सोमवार पर कान्हा की नगरी श्री धाम वृंदावन में आस्था अपने चरम पर दिखाई दी।भगवान भोलेनाथ के भक्तों ने जल चढ़ाकर कोरोना मुक्ति की कामना की। बृज के प्राचीन गोपेश्वर महादेव मंदिर पर प्रातः काल से ही शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़नी शुरू हो गयी । मन्दिर में सोशल डिस्टेंशिंग का पालन कराते हुए भक्तो को प्रवेश कराया जा रहा था। लेकिन आस्था के सैलाब से सभी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गयी।

शिवालयों में भक्तों ने किया जलाभिषेक

शिवभक्तों ने हर हर महादेव का जयघोष करते हुए प्राचीन शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। मंदिर में रुद्री व शिव पंचाष्टक स्त्रोत के स्वर गुंजायमान हो रहे थे। इसके अलावा नगर के अन्य शिव मंदिरों पर भगवान भोले के भक्तों ने जलाभिषेक कर श्रद्धा पूर्वक भगवान शिव की आराधना की। वही कालेश्वर महादेव मंदिर ,बनखंडेश्वर महादेव मंदिर ,बिहारीश्वर,सहित अन्य शिव मंदिरों पर फूल बंगले सजाए गये। महामारी को देखते हुए बारी बारी से भक्तों को दर्शन की अनुमति दी गई।

शिवभक्तों ने हर हर महादेव का जयघोष करते हुए प्राचीन शिवलिंग पर जलाभिषेक किया
शिवभक्तों ने हर हर महादेव का जयघोष करते हुए प्राचीन शिवलिंग पर जलाभिषेक किया

करीब पांच हजार वर्ष प्राचीन है गोपेश्वर महादेव का शिवलिंग

भगवान श्री कृष्ण के प्रपौत्र ब्रजनाभ जी ने करीब पांच हजार वर्ष पूर्व इस प्राचीन शिवलिंग की स्थापना यमुनातट पर की थी। पुराणों में वर्णित है कि भोलेनाथ भगवान ने द्वापरयुग में रास रच्चैया कृष्ण की रासलीला का रसास्वादन करने के लिये इसी स्थान पर सोलह श्रंगार कर गोपी रूप धारण किया था। तब श्री कृष्ण ने महादेव को गोपेश्वर नाम से सम्बोधित किया था। श्री मद्भागवत जी मे भी देवाधिदेव महादेव के गोपी रूप धारण कर मदमस्त होकर नृत्य करने का सुंदर वर्णन मिलता है। कालांतर में श्री कृष्ण की लीलास्थलियो का पुनरुद्धार करते समय इस पौराणिक स्थल की स्थापना की थी। जो शैव मत के भक्तो के साथ वैष्णव भक्तो के लिए भी पूजनीय है।

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