मथुरा में भगवान गोवर्धन को लगा 56 भोग:श्रद्धालुओं ने 21 किमी की परिक्रमा लगाई, विदेश से भी आए कृष्ण भक्त, उर्जा मंत्री ने किया दुग्धाभिषेक

मथुरा3 महीने पहले
ब्रज भूमि के साथ साथ देशभर में गोवर्धन पूजा की धूम है।

कछु माखन को बल बढ़ो कछु गोपन करी सहाय। श्री राधे जी की कृपा से गिरवर लियो उठाय।

यह पंक्तियां लीलाधर भगवान कृष्ण की गोवर्धन पर्वत उठाने के प्रसंग का बखान करती हैं। दिवाली के दूसरे दिन आज शुक्रवार को मथुरा में गोवर्धन पूजा के लिए तमाम श्रद्धालु पहुंचे हैं। इस दौरान भक्त अपने आराध्य के दर्शनों के लिए आतुर नजर आए। 21 किलोमीटर (7 कोस) का परिक्रमा मार्ग श्रद्धालुओं से भर गया। गोवर्धन पूजा के लिए विदेशी भक्त भी ब्रज पहुंचे हैं। भक्तों ने इस दौरान भगवान को विभिन्न व्यंजन अर्पित किए। किसी ने भगवान का दुग्धाभिषेक किया तो किसी ने रोली-चंदन लगाकर पूजा अर्चना की। इस मौके पर गिरिराज जी को 56 भोग लगाया गया।

गिरिराज को दूध अर्पित करते मंत्री श्रीकांत शर्मा।
गिरिराज को दूध अर्पित करते मंत्री श्रीकांत शर्मा।

गिरिराजजी की भक्ति में भाव-विभोर हुए विदेशी श्रद्धालु
ब्रज धाम की पवित्र तीर्थ स्थली गोवर्धन में इस समय दीपावली गोवर्धन पूजा का पांच दिवसीय महोत्सव चल रहा है। जिसमें देश विदेश से श्रद्धालुओं का सैलाब गोवर्धन में उमड़ रहा है। महोत्सव में शामिल होने आए श्रद्धालुओं ने सिर पर छप्पन भोग की सुंदर टोकरिया सजाकर गिरिराज महाराज की परिक्रमा लगाई और उसके बाद गिरधारी गोरिया मठ मंदिर में भगवान का पूजा अर्चन कर संकीर्तन किया। अमेरिका और अन्य देशों से आए श्रद्धालुओं ने अपनी भाषा में गिर्राज जी की महिमा का गुणगान किया और इस पावन अवसर को अपने लिए आनंदमई बताया। इस दौरान लोग भजन गाते हुए थिरकते हुए भी नजर आए।

द्वारिकाधीश मंदिर में अन्नकूट महोत्सव में शामिल श्रीकांत शर्मा व अन्य श्रद्धालु।
द्वारिकाधीश मंदिर में अन्नकूट महोत्सव में शामिल श्रीकांत शर्मा व अन्य श्रद्धालु।

द्वारकाधीश में हुई भव्य गोवर्धन पूजा और अन्नकूट के दर्शन
मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि दीपावली के दिन सायंकाल मंदिर में दीपावली पूजन हुआ और उसी के साथ कान जगाई का कार्यक्रम भी हुआ। कान जगाई से तात्पर्य है कि अन्नकूट के लिए गोवर्धन पूजा के लिए गाय के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण को बुलाना। इसके बाद शुक्रवार को मंदिर के प्रांगण में गोबर से निर्मित भगवान गोवर्धन की पूजा मंदिर के मुखिया तथा अन्य ने साथ में की। इस अवसर पर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री क्षेत्रीय विधायक श्रीकांत शर्मा भी मौजूद रहे और उन्होंने बड़े ही भाव से भगवान गोवर्धन की परिक्रमा लगाई और ठाकुर जी के दर्शन किए।

मनोहरी तीर्थ स्थल गोवर्धन जिले के मुख्यालय से 23 किलोमीटर दूर बसा हुआ है।
मनोहरी तीर्थ स्थल गोवर्धन जिले के मुख्यालय से 23 किलोमीटर दूर बसा हुआ है।

ये है गोवर्धन पूजा की कथा
द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण माता यशोदा और नंदबाबा के साथ ब्रज में रहते थे। माना जाता है कि उस समय अच्छी बारिश के लिए सभी लोग भगवान इंद्र का पूजन करते थे। एक बार भगवान श्रीकृष्ण ने तय किया कि वो इंद्र का घमंड तोड़ेंगे। श्रीकृष्ण ने गांव के लोगों से कहा कि वे इंद्र का पूजन न करें, बल्कि गोवर्धन पर्वत की पूजा करें। सभी ने कान्हा की बात मान ली, लेकिन ऐसा करने से इंद्रदेव गुस्सा हो गए और उन्होंने तेज बारिश शुरू कर दी।

ब्रजवासियों की रक्षा के लिए कन्हैया ने गोवर्धन पर्वत को अपनी तर्जनी अंगुली पर उठा लिया और सभी लोगों ने इस गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली। इंद्र का क्रोध बरसता रहा, भगवान मुस्कान के साथ पर्वत को अपनी उंगली पर थामे रहे। जब इंद्र को अपनी गलती समझ आ गई, तब उनका क्रोध शांत हुआ। माना जाता है उसके बाद से ही गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हुई है। सात कोस में फैला विष्णु रूपी गिरिराज गोवर्धन पर्वत यूपी के मथुरा जिले में स्थित है। यह मनोहरी तीर्थ स्थल गोवर्धन जिले के मुख्यालय से 23 किलोमीटर दूर बसा हुआ है।

घरों में विभिन्न व्यंजन बनाकर गोवर्धन को भोग लगाया जाता है।
घरों में विभिन्न व्यंजन बनाकर गोवर्धन को भोग लगाया जाता है।

अन्नकूट का लगाया जाता है भोग
गोवर्धन पूजा के दिन सुबह उनका अभिषेक किया जाता है। घरों में विभिन्न व्यंजन बनाकर उनका भोग लगाया जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन घरों में अन्नकूट बनता है। अन्नकूट बनाने में कई तरह की सब्जियां, दूध और मावे से बने मिठाई और चावल का प्रयोग किया जाता है। अन्नकूट में मौसमी अन्न, फल, सब्जियों का प्रसाद बनाया जाता है। प्रमुख तौर पर कढ़ी, चावल बनाया जाता है। ब्रज के गोवर्धन में तो यह मुख्य आयोजन होता ही है, इसके अलावा हर मंदिर और घरों में भी अन्नकूट बनाया जाता है।

अन्नकूट में मौसमी अन्न, फल, सब्जियों का प्रसाद बनाया जाता है।
अन्नकूट में मौसमी अन्न, फल, सब्जियों का प्रसाद बनाया जाता है।

ऐसे कर सकते हैं गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा पर्व पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाया जाता है। पर्वत के शिखर पर श्री गोवर्धन जी स्थापित किए जाते हैं। पर्वत को फूलों से सजाया जाता है। इस दिन लोग अपने पालतू पशुओं को भी सजाते हैं। नवीन फसलों से बने व्यंजनों का भोग गोवर्धन पर्वत को लगाया जाता है। ये प्रकृति, पशु, परमात्मा और मनुष्यों के बीच प्रेम और सम्मान बनाए रखने का पर्व है।

इस दिन पूजा के लिए किसान और पशुपालक खासतौर पर तैयारी करते हैं। घर के आंगन या खेत में गाय के गोबर से देवता बनाए जाते हैं। उन्हें भोग भी लगाया जाता है। गोवर्धन देव के साथ ही इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का दूध से अभिषेक करना चाहिए।