मथुरा में भगवान भी स्टूडेंट:भक्त ने बाल गोपाल का कराया एडमिशन, रोज लंच बॉक्स और ड्रेस पहनाकर ले जाते हैं

मथुरा3 महीने पहले

भक्त भगवान के प्रति अपने-अपने तरीके से आस्था जताते हैं। कोई भगवान का फूलों से शृंगार करता है, तो कोई छप्पन भोग लगाता है। मगर, मथुरा में एक भक्त की भगवान के प्रति अनूठी आस्था है। इस भक्ति की कहानी को आप भी पढ़िए।

भगवान को मानते हैं अपना बेटा
65 साल के रामगोपाल दिल्ली में रहते थे। उनके एक बेटा और एक बेटी हैं। दोनों की शादी करने के बाद मन भगवान की भक्ति की ओर झुकने लगा। बस फिर क्या था, 7 साल पहले वह पत्नी के साथ वृंदावन आ गए। यहां से रामगोपाल अपने साथ बाल गोपाल को भी लेकर आए। बाल गोपाल को वह दूसरा बेटा मानते हैं। बाल गोपाल को वह हर पल अपने साथ अपनी नजरों के सामने रखते हैं।

दूसरे बच्चों को देख आया बाल गोपाल को पढ़ाने का विचार

भगवान को तैयार करके स्कूल में पढ़ाने के लिए रामगोपाल रोज ले जाते हैं। लंच और पानी की बोतल भी दी जाती है।
भगवान को तैयार करके स्कूल में पढ़ाने के लिए रामगोपाल रोज ले जाते हैं। लंच और पानी की बोतल भी दी जाती है।

चार साल पहले रामगोपाल एक दिन अपने भगवान बाल गोपाल के साथ इस्कॉन मंदिर गए थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात एक विदेशी कृष्ण भक्त महिला से हुई। रामगोपाल को उदास देख उस महिला ने उनके दुखी होने का कारण पूछा। इस पर उन्होंने बताया कि वह दूसरे बच्चों की तरह अपने बाल गोपाल को स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। रामगोपाल का भाव देखकर महिला ने उनको बताया कि वह अपने बाल गोपाल को संदीपन मुनि के स्कूल में पढ़ाएं। इस स्कूल में वह विदेशी महिला पहले काम कर चुकी थी।

प्रिंसिपल ने मांगे डॉक्यूमेंट, संस्थापक ने दी सहमति
रामगोपाल अगले दिन अपने बाल गोपाल को लेकर वृंदावन के चैतन्य विहार इलाके में स्थित संदीपन मुनि स्कूल पहुंच गए। यहां उनकी मुलाकात स्कूल की प्रिंसिपल दीपिका शर्मा से हुई। रामगोपाल ने जब प्रिंसिपल को कहा कि वह भगवान को पढ़ाना चाहते हैं, तो दीपिका हैरान हो गईं। मगर, रामगोपाल जिद करने लगे। इसके बाद प्रिंसिपल ने कहा कि वह अपने बाल गोपाल का आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र और अन्य डॉक्यूमेंट लेकर आएं। यह सुनकर रामगोपाल परेशान हो गए।

इसी दौरान स्कूल के संस्थापक और इस्कॉन भक्त रूपा रघुनाथ दास वहां आ गए। रूपा रघुनाथ दास ने जब रामगोपाल को परेशान देखा, तो उन्होंने कहा कि एडमिशन तो नहीं कर सकते, मगर आप बाल गोपाल को पढ़ने के लिए भेजिए। इसके बाद रामगोपाल की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। प्रिंसिपल दीपिका ने बताया कि शुरू में हमने डॉक्यूमेंट मांगे थे, लेकिन बाद में भगवान स्कूल आने लगे।

बच्चों के साथ क्लास में बैठते हैं भगवान

क्लास में अन्य बच्चों के साथ पढ़ाई करते हुए बाल गोपाल। बच्चे भी भगवान के साथ पढ़ते हैं।
क्लास में अन्य बच्चों के साथ पढ़ाई करते हुए बाल गोपाल। बच्चे भी भगवान के साथ पढ़ते हैं।

स्कूल में पहुंचने के बाद बाल गोपाल का नामकरण भी हो गया। यहां बाल गोपाल का नाम रखा गया मुच्चउ गोपाल। भगवान का नया नामकरण होने के बाद मुच्चउ गोपाल बाकी बच्चों की तरह क्लास में बैठने लगे। टीचर बच्चों के साथ-साथ मुच्चउ गोपाल को भी पढ़ाने लगी।

कभी पढ़ते हैं ABCD तो कभी 123 मुच्चउ गोपाल जब स्कूल जाने लगे, तो उनको बाकी बच्चों की तरह टीचर उन्हें भी ABCD और 123 के अलावा अन्य विषय पढ़ाने लगीं। भगवान को अपने बीच देख क्लास में पढ़ने वाले बच्चों को पहले कुछ दिन तो अजीब-सा लगा।

स्कूल में लेकर जाते हैं पानी की बोतल और लंच
दूसरे बच्चों की तरह रामगोपाल अपने भगवान गोपाल को सुबह तैयार करते हैं। भगवान का शृंगार करने के बाद रामगोपाल उनको स्कूल ड्रेस की बेल्ट लगाते हैं। पानी की बोतल और लंच बॉक्स देकर उनको हैंड ट्रॉली में बैठा देते हैं। इसके बाद स्कूल का ई-रिक्शा आता है और फिर रामगोपाल भगवान को लेकर स्कूल पहुंच जाते हैं।

भगवान के क्लास में रहने के दौरान बाहर बैठकर भजन करते हैं रामगोपाल

जब भगवान की क्लास में होते हैं तो रामगोपाल बाहर बैठकर भजन करते हैं।
जब भगवान की क्लास में होते हैं तो रामगोपाल बाहर बैठकर भजन करते हैं।

​​स्कूल पहुंचने के बाद मुच्चउ गोपाल को नर्सरी क्लास में ले जाया जाता है। वहां वह अन्य बच्चों के बीच एक स्टूल पर विराजमान कर दिए जाते हैं। 4 से 5 घंटे या जब तक मुच्चउ गोपाल स्कूल में रहते हैं, उतनी देर रामगोपाल बाहर बैठकर भजन करते रहते हैं।

रामगोपाल ने बताया कि मुच्चउ गोपाल उनके पास 30 साल से हैं। पहले दिल्ली में रहकर वह उनके साथ व्यापार करते थे। अब वृंदावन में आकर स्कूल पढ़ने जाते हैं। रामगोपाल ने बताया कि वह मुच्चउ गोपाल को अपने दूसरे बेटे की तरह मानते हैं। परिवार के लोग भी मुच्चउ गोपाल से बहुत स्नेह रखते हैं। बेटी एक बार अपने भाई के राखी बांधने न जाए, लेकिन मुच्चउ गोपाल के राखी बांधने जरूर आती है।

संदीपन मुनि स्कूल में फ्री में पढ़ते हैं बच्चे वृंदावन के चैतन्य विहार इलाके में स्थित संदीपन मुनि स्कूल में उन बेटियों को पढ़ाया जाता है, जिनके माता-पिता उनकी पढ़ाई का खर्चा उठाने में असमर्थ होते हैं। क्लास प्लेग्रुप से लेकर 12वीं तक दी जाने वाली शिक्षा पूरी तरह मुफ्त है। यहां बेटियों को न केवल शिक्षा फ्री दी जाती है बल्कि उनको स्टेशनरी, ड्रेस, दोपहर का खाना भी दिया जाता है और स्कूल आने-जाने के लिए वाहन का भी शुल्क नहीं लिया जाता है।

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