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मथुरा...विवादों में K D मेडिकल कॉलेज:Covid- 19 बीमारी के दौरान मरीजों से धन वसूलने व इलाज में लापरवाही का मामला, शिकायत पर CMO कार्यालय ने दर्ज कराई FIR

मथुरा8 महीने पहले
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मथुरा का नामचीन के डी मेडिकल कॉलेज एक बार फिर विवादों में है। - Dainik Bhaskar
मथुरा का नामचीन के डी मेडिकल कॉलेज एक बार फिर विवादों में है।

मथुरा का नामचीन के डी मेडिकल कॉलेज एक बार फिर विवादों में है। के डी मेडिकल कॉलेज पर कोरोना महामारी के दौरान मरीजों से धन वसूलने का मामला सामने आया है। पीड़ित मरीजों की शिकायत पर सीएमओ कार्यालय में तैनात नोडल अधिकारी ने शनिवार को के डी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज कराया है।

मरीजों के परिजनों ने की थी शिकायत

कोरोना महामारी के दौरान मरीज अरविंद शुक्ला, मनोज कुमार शर्मा व पूनम अग्रवाल के परिजनों ने डीएम से शिकायत की। आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इलाज में लापरवाही की और साथ ही अधिक रकम वसूली। जिलाधिकारी ने इसके लिए एक जॉइंट मजिस्ट्रेट दीक्षा श्री की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई । जांच के बाद शिकायत को सही पाया गया, जिसके बाद CMO के आदेश पर सीएमओ कार्यालय पर तैनात नोडल अधिकारी डॉ मनीष पौरुष ने के डी मेडिकल प्रबंधन के खिलाफ महामारी अधिनियम की धारा में मुकद्दमा दर्ज कराया।

नोडल अधिकारी डॉ मनीष पौरुष ने के डी मेडिकल प्रबंधन के खिलाफ थाना छाता में धारा 269, 270 व महामारी अधिनियम की धारा 3 में मुकद्दमा दर्ज कराया है
नोडल अधिकारी डॉ मनीष पौरुष ने के डी मेडिकल प्रबंधन के खिलाफ थाना छाता में धारा 269, 270 व महामारी अधिनियम की धारा 3 में मुकद्दमा दर्ज कराया है

सीएमओ को नहीं पता मुकद्दमा दर्ज होने के बारे में

सीएमओ डॉक्टर रचना गुप्ता से जब बात की गई तो उन्होंने बताया की उनके द्वारा 23 सितंबर को तहरीर दे दी गई थी, लेकिन FIR दर्ज हुई या नहीं यह नहीं पता। उनसे जब स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जाने वाली कार्यवाही के बारे में जानकारी ली। तो उनका बयान संदेह खड़ा करने वाला था। सीएमओ ने बताया कि आगे देखेंगे क्या निष्कर्ष आता है जो कार्यवाही बनती है वह कर ही रहे हैं जो अधिक पैसे वसूले हैं वह वापस कराये जाएंगे ।

खड़े हो रहे कई सवाल

के डी मेडिकल कॉलेज का विवादों से नाता रहा है। यहां कोरोना काल के दौरान मरीजों से धन वसूलने के आरोप तो लगे ही थे इसके साथ ही पीएम केयर फंड से सरकारी अस्पतालों के उपयोग के लिए आये वैंटिलेटर के प्रयोग का मामला भी सामने आया था। सीएमओ के आदेश पर भले ही मुकद्दमा दर्ज करा दिया गया है, लेकिन कई सवाल है जो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है। मसलन, दीक्षा श्री कमेटी ने अगस्त के शुरुआत में ही जांच रिपोर्ट सौंप दी थी फिर करीब दो महीने बाद रिपोर्ट दर्ज क्यों कराई। क्या स्वास्थ्य विभाग किसी को बचाना चाहता है।

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