श्री कृष्ण जन्मस्थान शाही ईदगाह मामला:कोर्ट ने शैलेंद्र सिंह का वाद किया खारिज,पक्षकार के कोर्ट में न रहने पर सुनाया फैसला

मथुरा4 महीने पहले
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श्री कृष्ण जन्मस्थान शाही ईदगाह मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के एडवोकेट शैलेंद्र सिंह के जिला जज की अदालत में दाखिल दावे को मथुरा कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह फैसला पक्षकार के कोर्ट न पहुंचने पर विपक्ष द्वारा की गई बहस के बाद सुनाया। शैलेंद्र सिंह ने लॉ की छात्राओं के साथ मथुरा कोर्ट में दावा 17 मई को दाखिल किया था।

सीपीसी 92 के तहत दाखिल किया था वाद

लखनऊ के एडवोकेट शैलेंद्र सिंह ने लॉ स्टूडेंट के साथ मिलकर मथुरा जिला जज की अदालत में सीपीसी 92 के तहत एक दावा किया था। इसके तहत शैलेंद्र सिंह व अन्य लॉ स्टूडेंट का कहना था कि उनकी याचिका अब तक इस पूरे मामले में दायर किए गए सभी दावों से अलग है। यह दावा पूरे हिंदू समाज की तरफ से दाखिल किया गया है।

एडवोकेट शैलेंद्र सिंह ने लॉ स्टूडेंट के साथ मिलकर मथुरा जिला जज की अदालत में सीपीसी 92 के तहत एक दावा किया था
एडवोकेट शैलेंद्र सिंह ने लॉ स्टूडेंट के साथ मिलकर मथुरा जिला जज की अदालत में सीपीसी 92 के तहत एक दावा किया था

एडीजे 7th की कोर्ट ने किया दावा खारिज

एडवोकेट शैलेंद्र सिंह व अन्य लॉ स्टूडेंट की तरफ से दाखिल वाद पर एडीजे 7th कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। कोर्ट ने इस मामले में पक्षकार को अंतिम अवसर दिया था। लेकिन शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान वह कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद कोर्ट ने विपक्षी के एडवोकेट तनवीर अहमद के द्वारा की गई बहस के बाद कोर्ट ने दावा खारिज कर दिया।

एडवोकेट तनवीर अहमद अन्य अधिवक्ताओं के साथ
एडवोकेट तनवीर अहमद अन्य अधिवक्ताओं के साथ

पूर्व में भी कोर्ट ने लगाया था जुर्माना

वाद दाखिल करने के बाद पक्षकार शैलेंद्र सिंह अपने दाखिल किए दावे में कभी उपस्थित हुए कभी नहीं। जिसके बाद कोर्ट ने दो बार उन पर गैरमौजूद रहने के कारण 500 रुपए और 1000 रुपए का जुर्माना लगाया था। विपक्षी तनवीर अहमद ने बताया कि शैलेंद्र सिंह का वाद एडीजे 7th कोर्ट में चल रहा था। लेकिन वह लगातार सुनवाई को टालते रहते हैं। जबकि उच्च न्यायालय ने एक आदेश भी दिया था।

मथुरा कोर्ट को कि श्री कृष्ण जन्मस्थान शाही ईदगाह प्रकरण से संबंधित मुकदमो की सुनवाई जल्द की जाए। इसके बावजूद भी वह उपस्थित नहीं होते स्थगन प्रार्थना पत्र देते रहते हैं। जब भी सुनवाई होती है वह अलग अलग प्रार्थना पत्र देते हैं उनको पर्याप्त अवसर दिए गए। लेकिन अनुपस्थित रहने के कारण न्यायालय ने वाद खारिज कर दिया।

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