पर्यटन उद्योग पर कोविड का साया:मथुरा में कोरोना संक्रमण ने किए पर्यटन से जुड़े उद्योग चौपट, होटल व्यवसाय को 150 करोड़ का नुकसान

मथुरा6 महीने पहले
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मथुरा में कोरोना के कारण यह उद्योग बर्बाद, ट्रैवल कंपनी संचालक नहीं निकाल पा रहे टैक्सियों की किश्त। - Dainik Bhaskar
मथुरा में कोरोना के कारण यह उद्योग बर्बाद, ट्रैवल कंपनी संचालक नहीं निकाल पा रहे टैक्सियों की किश्त।

उत्तर प्रदेश का मथुरा जिला धार्मिक क्षेत्र होने के कारण पर्यटन उद्योग का बड़ा केंद्र भी हैं। यहां हर साल करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु अपने आराध्य के दर्शनों के लिए आते हैं। देश-विदेश से आने वाले यह श्रद्धालु यहां पर्यटन से जुड़े लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, बृज क्षेत्र में हर साल 5 से 10 करोड़ लोग आते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से यहां पर्यटन के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों को अच्छी खासी आय होती हैं। लेकिन इस बार कोरोना के कारण यह उद्योग बर्बादी के कगार पर हैं ।

होटल व्यवसाय को हुआ 100 से डेढ़ सौ करोड़ का नुकसान
मथुरा जनपद में होटल एसोसिएशन के अनुसार करीब डेढ़ सौ होटल हैं। इसके अलावा गेस्ट हाउस और धर्मशाला की अलग बड़ी संख्या हैं। यहां कोरोना की दूसरी लहर के कारण बंद हुए मंदिरों के चलते श्रद्धालुओं का आना ठप्प हो गया था। जिसकी वजह से होटल व्यवसाय को करीब डेढ़ सौ करोड़ के नुकसान का अनुमान हैं। होटल एसोसिएशन के महामंत्री अमित जैन ने बताया कि इस समय होटल का संचालन करना बड़ी चुनौती हैं। लेबर खर्च, बिजली का खर्चा एवं मेंटेन करना पर्यटकों के न आने से बड़ी समस्या बन गया हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की जीडीपी का 10 प्रतिशत हिस्सा होटल एवं टूरिज्म उद्योग से आता है। वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से यह उद्योग बिल्कुल खत्म होने की कगार पर आ गया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पर्यटन उद्योग को उद्योग का दर्जा दिया जाए। वहीं, कोरोना महामारी से रेस्टोरेंट उद्योग पर भी अच्छी खासी मार पड़ी हैं। बसेरा रेस्टोरेंट के संचालक प्रवीण कालरा कहते हैं कि सरकार ने भले ही अब होम डिलीवरी की अनुमति दे दी हो, लेकिन कोरोना के कारण रही बंदी के चलते पर्यटकों का आगमन नहीं हुआ है। जिसकी वजह से रेस्टोरेंट बिल्कुल भी नहीं चल रहे हैं। अब होम डिलीवरी की जो अनुमति दी हैं, उससे केवल 20 प्रतिशत ही कारोबार चला हैं। जिसमें खर्चा निकालना भी मुश्किल हैं।

ट्रैवल कंपनी संचालक नहीं निकाल पा रहे टैक्सियों की किश्त
पर्यटन उद्योग से जुड़ा दूसरा अहम स्थान रखता हैं ट्रैवल उद्योग। मथुरा दिल्ली, आगरा और जयपुर के बीच में होने के कारण यहां साल भर पर्यटकों का आवागमन लगा रहता हैं। पर्यटक घूमने के लिए टैक्सी भी किराए पर लेते हैं। लेकिन कोरोना के कारण पर्यटकों का आगमन बंद हुआ तो इसका असर ट्रैवल कंपनियों पर भी पड़ गया। वृंदावन टैक्सी एसोसिएशन के सचिव बृज किशोर पचौरी के अनुसार, जिले में करीब 2500 टैक्सी परमिट गाड़ी हैं। जिसमें से करीब 90 प्रतिशत लोन पर हैं। कोरोना के कारण पर्यटकों के न आने से अब लोन निकालना भी भारी पड़ रहा हैं। कोरोना की पहली वेब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 महीने की बैंक किश्त जमा करने की छूट दे दी थी। लेकिन इस बार वह भी नहीं मिली। बैंक किश्त जमा करने के लिए दवाव बना रहे हैं।

करोड़ों की संख्या में आते हैं साल भर बृज घूमने पर्यटक
जिला पर्यटन अधिकारी डी के शर्मा की मानें तो बृज में हर साल आने वालों की संख्या करोड़ों में हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2020 में मथुरा में 1364135 भारतीय पर्यटक तो 6837 विदेशी पर्यटक आए। वहीं, वृंदावन में 256826 भारतीय और 12156 विदेशी, बरसाना में 1457700 भारतीय और 1085 विदेशी, नंदगांव में 627400 भारतीय और 550 विदेशी, गोवर्द्धन में 1245944 भारतीय और 844 विदेशी, कुसुम सरोबर में 181575 भारतीय और 379 विदेशी, राधा कुंड में 544100 भारतीय और 389 विदेशी, गोकुल में 341070 भारतीय और 348 विदेशी, महावन में 181250 भारतीय और 228 विदेशी व बलदेव में 594000 भारतीय और 624 विदेशी पर्यटक आए।

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