8 लाख भक्त जन्मभूमि पहुंचे, 50 हजार लाइन में:मथुरा के 700 से ज्यादा होटल-धर्मशालाएं फुल; सड़कों पर रात गुजारेंगे भक्त; देखें तस्वीरें

मथुराएक महीने पहलेलेखक: गौरव, आशीष, देवांशु, पवन

मथुरा कृष्ण के रंग में रंग गई है। 8 लाख से ज्यादा श्रद्धालु जन्मभूमि पहुंच चुके हैं। 50 हजार से ज्यादा भक्त जन्मभूमि मंदिर की लाइन में लगे हैं। शहर के 700 से ज्यादा होटल-धर्मशालाओं के 18 हजार कमरे फुल हो गए हैं। देशभर से आए भक्त सड़कों पर रात गुजार रहे हैं। सड़कों पर चारों तरफ बच्चे-बड़े कान्हा बने हैं। सड़कों-चौराहों में राधे-राधे के भजन-कीर्तन हो रहे हैं। विदेश से आए श्रद्धालु भी नाचते-गाते नजर आए।

रात में भी श्रद्धालु मथुरा पहुंच रहे हैं। मथुरा जन्मभूमि के आस-पास का इलाका श्रद्धालुओं से भरा हुआ है। लोग सड़कों पर ही सो रहे हैं। सुरक्षा को देखते हुए पुलिस रात में भी ड्रोन से निगरानी कर रही है।

दैनिक भास्कर की टीम मथुरा-वृंदावन में है। वहां से हर जरूरी खबर से आपको अपडेट करवाया जा रहा है। अभी तक क्या हुआ, आगे क्या होगा? आइए सब जानते हैं।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में 30 हजार से ज्यादा भक्त लाइन में लगे हुए हैं। दिनभर में दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु मंदिर का दर्शन कर चुके हैं।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में 30 हजार से ज्यादा भक्त लाइन में लगे हुए हैं। दिनभर में दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु मंदिर का दर्शन कर चुके हैं।
कृष्ण कन्हैया की नगरी में जन्माष्टमी के उत्सव की धूम मची हुई है। मुरलीवाले का दर्शन करने के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा है।
कृष्ण कन्हैया की नगरी में जन्माष्टमी के उत्सव की धूम मची हुई है। मुरलीवाले का दर्शन करने के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा है।
मथुरा जन्मभूमि के आस-पास का इलाका श्रद्धालुओं से भरा हुआ है। लोग सड़कों पर ही सो रहे हैं।
मथुरा जन्मभूमि के आस-पास का इलाका श्रद्धालुओं से भरा हुआ है। लोग सड़कों पर ही सो रहे हैं।
यह तस्वीर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बाहर की है। यहां रात में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे हैं।
यह तस्वीर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बाहर की है। यहां रात में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे हैं।
मथुरा की सभी होटल और धर्मशालाएं फुल हो गई हैं। कहीं कोई कमरा नहीं मिल रहा है। भक्त सड़कों पर रात गुजारने को मजबूर है।
मथुरा की सभी होटल और धर्मशालाएं फुल हो गई हैं। कहीं कोई कमरा नहीं मिल रहा है। भक्त सड़कों पर रात गुजारने को मजबूर है।

जन्माष्टमी से जुड़े LIVE अपडेट्स...

  • सीएम योगी 19 अगस्त को मथुरा जाएंगे। वे ढाई घंटे वृंदावन और 30 मिनट मथुरा में रहेंगे। वृंदावन में अन्नपूर्णा भवन का लोकार्पण करेंगे। श्रद्धालुओं को प्रसाद बांटेंगे।
  • कान्हा के जन्मस्थान को इस बार प्राचीन कारागार जैसा बनाया गया है। गर्भगृह के प्रवेश और निकास द्वार पर प्लास्टिक पाइप और लकड़ी से कृत्रिम सलाखें बनाई गई हैं।
  • यूपी में पहली बार गौशालाओं में जन्माष्टमी पर गो-पूजा होगी। पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने इसका निर्देश दिया है। भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा, "ऐसा पहली बार हो रहा है, जब गौशालाओं में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा।
  • मंत्री ने बताया, "उत्तर प्रदेश में 581 गौशालाएं हैं। इन सभी गौशालाओं की सजावट होगी। विभाग के अधिकारी और इलाके के जनप्रतिनिधि इनमें पूजा भी करेंगे।"
मथुरा में जन्माष्टमी के एक दिन पहले ही मंदिरों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगी हैं।
मथुरा में जन्माष्टमी के एक दिन पहले ही मंदिरों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगी हैं।
वृंदावन के प्रेम मंदिर पर जन्माष्टमी मनाने 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे हैं। यहां 40 झांकियां सजी हैं। उनमें पूतना वध, गोवर्धन पर्वत, माखन चोरी की रास लीला दिखाई गई है।
वृंदावन के प्रेम मंदिर पर जन्माष्टमी मनाने 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे हैं। यहां 40 झांकियां सजी हैं। उनमें पूतना वध, गोवर्धन पर्वत, माखन चोरी की रास लीला दिखाई गई है।

बांके बिहारी मंदिर को सजा रहे 3000 कारीगर
बांके बिहारी मंदिर और कान्हा को सजाने के लिए 3 हजार कारीगर दिल्ली से खास ट्रेनिंग लेकर आए हैं। वह दिन-रात मंदिर को सजाने में जुटे हैं। कृष्ण भगवान को शीतलता देने के लिए देसी और विदेशी फूलों की एक विशेष शैया तैयार की जा रही है। 12 सालों से दुकान लगा रहे केशव माली ने बताया कि उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के श्रृंगार के लिए अकेले 10 क्विंटल फूल मंगवाए हैं। मथुरा में पोतरा कुंड मेंशन के सामने, डींग गेट सब्जी मंडी, भूतेश्वर चौराहा, कृष्णापुरी तिराहा, नया बस अड्डा, गोवर्धन चौराहा, परासौली और बीएसए कॉलेज के सामने सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।

प्रेम मंदिर के बाहर उज्जैन से श्रद्धालु आए हैं। यह श्रद्धालु मंदिर के बाहर डमरू बजा रहे हैं।
प्रेम मंदिर के बाहर उज्जैन से श्रद्धालु आए हैं। यह श्रद्धालु मंदिर के बाहर डमरू बजा रहे हैं।

हरिकांता पोशाक पहनेंगे राधा-श्रीकृष्ण, एक महीने में हुई तैयार
श्रीकृष्ण जन्मस्थान में विराजमान राधा-कृष्ण श्री हरिकांता पोशाक धारण करेंगे। सिल्क, जरी और रेशम से पोशाक बनाई गई है। इस खास पोशाक को बनाने में कोलकाता और मथुरा के 12 कारीगर जुटे थे। इसे बनाने में एक महीना लगा है। पोशाक में मोर की आकृति की थीम पर लता, पता, वृक्ष, मनोरम बेल की कलाकृति बहुत ही कलात्मक रूप से उकेरी गई है। ब्रज के मंदिरों की प्राचीन कला के अनुरूप इस पोशाक को बनाया गया है।

प्रेम मंदिर के बनी झांकियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं। इसके सामने से गुजरने वाला हर भक्त इसकी फोटो खींच रहा है।
प्रेम मंदिर के बनी झांकियां लोगों को आकर्षित कर रही हैं। इसके सामने से गुजरने वाला हर भक्त इसकी फोटो खींच रहा है।
प्रेम मंदिर के अंदर गोवर्धन पर्वत उठाए श्रीकृष्ण की यह आकर्षक छवि लोगों की नजर को अपनी तरफ खींच रही है।
प्रेम मंदिर के अंदर गोवर्धन पर्वत उठाए श्रीकृष्ण की यह आकर्षक छवि लोगों की नजर को अपनी तरफ खींच रही है।
वृंदावन में यह दृश्य जगह-जगह दिख रहे हैं। भक्त भगवान कृष्ण, कंस की वेशभूषा में सड़कों पर निकले हैं।
वृंदावन में यह दृश्य जगह-जगह दिख रहे हैं। भक्त भगवान कृष्ण, कंस की वेशभूषा में सड़कों पर निकले हैं।
मंदिर के आसपास भी झाकियां सजायी गई हैं।
मंदिर के आसपास भी झाकियां सजायी गई हैं।
कृष्णभक्ति से सराबोर श्रद्धालु बरसाना की मंदिर में दर्शन करने पहुंचे हैं।
कृष्णभक्ति से सराबोर श्रद्धालु बरसाना की मंदिर में दर्शन करने पहुंचे हैं।
मथुरा के हर चौराहों की साफ-सफाई करके उसे सजा दिया गया है।
मथुरा के हर चौराहों की साफ-सफाई करके उसे सजा दिया गया है।
बांके बिहारी मंदिर के बाहर देशी-विदेशी फूलों की मांग बढ़ गई है। विदेशों से कान्हा के लिए ग्लेडियोलस, लिली और ओरचिड फूल मंगाए गए हैं।
बांके बिहारी मंदिर के बाहर देशी-विदेशी फूलों की मांग बढ़ गई है। विदेशों से कान्हा के लिए ग्लेडियोलस, लिली और ओरचिड फूल मंगाए गए हैं।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान को बेशकीमती आभूषण धारण कराए जाते हैं, जो रत्नों से जड़ित होते हैं।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान को बेशकीमती आभूषण धारण कराए जाते हैं, जो रत्नों से जड़ित होते हैं।

रत्नों से जड़े आभूषण पहनेंगे भगवान कृष्ण

  • बांके बिहारी को मोर मुकुट, कौंधनी, बेशकीमती हार के अलावा अन्य आभूषण पहनाए जाएंगे।

अब बात मुस्लिम कारीगारों की, जो दिन-रात भगवान की पोशाक बनाने में जुटे हैं..

  • वृंदावन में भगवान की पोशाक बनाने वाले 40 कारखाने हैं।
  • इनमें 10 हजार से ज्यादा मुस्लिम कारीगर दिन-रात काम कर रहे हैं।

भगवान कृष्ण के जन्मदिन को लेकर यहां के मुस्लिमों में कितना उत्साह है? इस काम को वो कब से कर रहे हैं? ऐसे कई सवाल लेकर भास्कर वृंदावन के 12 कारखानों में पहुंचा। आइए, बारी-बारी कारीगरों की बातों पर चलते हैं…

60 साल से बना रहे भगवान की पोशाक

साई मस्जिद के ठीक सामने मौजूद मैनुद्दीन खान के कारखाने में 15 से 20 कारीगर काम करते हैं। मैनुद्दीन ने बताया, “मैं भगवान की पोशाक बनाने का काम पिछले 40 साल से कर रहा हूं। सिर्फ राधा-कृष्ण ही नहीं, हम सभी भगवान की पोशाक बनाने का काम करते हैं।”
साई मस्जिद के ठीक सामने मौजूद मैनुद्दीन खान के कारखाने में 15 से 20 कारीगर काम करते हैं। मैनुद्दीन ने बताया, “मैं भगवान की पोशाक बनाने का काम पिछले 40 साल से कर रहा हूं। सिर्फ राधा-कृष्ण ही नहीं, हम सभी भगवान की पोशाक बनाने का काम करते हैं।”

राधा का लहंगा बनने में लगते हैं 8 दिन, कीमत 8 हजार

राधा की चुनरी और लहंगा बनाने वाले सोनू खान कहते हैं, “बांके-बिहारी का पटका, पगड़ी, धोती और राधा की चुनरी बनाने में 1-2 दिन का ही वक्त लगता है, लेकिन राधा का लहंगा बनाने में 7 से 8 दिन लग जाते हैं। इस लहंगे की कीमत 8 से 10 हजार तक होती है।
राधा की चुनरी और लहंगा बनाने वाले सोनू खान कहते हैं, “बांके-बिहारी का पटका, पगड़ी, धोती और राधा की चुनरी बनाने में 1-2 दिन का ही वक्त लगता है, लेकिन राधा का लहंगा बनाने में 7 से 8 दिन लग जाते हैं। इस लहंगे की कीमत 8 से 10 हजार तक होती है।

धागे को गीला करके स्पेशल तरीके से बनाते कान्हा की पोषक

सोनू खान आगे कहते हैं, “भगवान की पोशाक बनाते समय हम साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हैं। बांके बिहारी को राजी-खुशी करना ही हमारा मकसद है।
सोनू खान आगे कहते हैं, “भगवान की पोशाक बनाते समय हम साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हैं। बांके बिहारी को राजी-खुशी करना ही हमारा मकसद है।

वृंदावन सबसे बड़ी पोशाक मंडी, विदेशों तक होती है सप्लाई

जरी-पोशाक का कारखाना चला रहे रिजवान ने बताया, “वृंदावन में बनने वाली भगवान की पोशाक देश के साथ दुनियाभर में प्रचलित है। देश और दुनिया के करीब 90% मंदिरों के भगवान वृंदावन की बनी पोशाक ही पहनते हैं।”
जरी-पोशाक का कारखाना चला रहे रिजवान ने बताया, “वृंदावन में बनने वाली भगवान की पोशाक देश के साथ दुनियाभर में प्रचलित है। देश और दुनिया के करीब 90% मंदिरों के भगवान वृंदावन की बनी पोशाक ही पहनते हैं।”

वृंदावन में 40 हजार मुस्लिम आबादी, पीढ़ियों से बना रहे भगवान की ड्रेस

वृंदावन में मुस्लिमों की आबादी 20 हजार है। यहां मथुरा गेट इलाके में ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं। यहां की एक और खासियत है इलाके की साई मस्जिद और माता पथवारी देवी मंदिर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। यहां रहने वाले मो. अशरफ बताते हैं, "ईद हो या दीपावली यहां के लोग मिलकर त्योहार मनाते हैं। दीपावली में मुस्लिम समुदाय के लोग भी मां पथवारी देवी मंदिर के सामने मोमबत्ती जलाते हैं। यहां पीढ़ी दर पीढ़ी लोग कान्हा की पोशाक बनाते आ रहे हैं।"
वृंदावन में मुस्लिमों की आबादी 20 हजार है। यहां मथुरा गेट इलाके में ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं। यहां की एक और खासियत है इलाके की साई मस्जिद और माता पथवारी देवी मंदिर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। यहां रहने वाले मो. अशरफ बताते हैं, "ईद हो या दीपावली यहां के लोग मिलकर त्योहार मनाते हैं। दीपावली में मुस्लिम समुदाय के लोग भी मां पथवारी देवी मंदिर के सामने मोमबत्ती जलाते हैं। यहां पीढ़ी दर पीढ़ी लोग कान्हा की पोशाक बनाते आ रहे हैं।"

आखिर में मुस्लिम कामगारों के बनाए हुए कृष्ण पोशाक को तस्वीरों में देख लेते हैं...

ये रिजवान कारखाने में तैयार बांके बिहारी जी की मोरपंखी पोशाक है। इसे तैयार होने में 10 से 15 दिन का समय लगता है।
ये रिजवान कारखाने में तैयार बांके बिहारी जी की मोरपंखी पोशाक है। इसे तैयार होने में 10 से 15 दिन का समय लगता है।
मैनुद्दीन खान के कारखाने पर राधा रानी की पीतांबर फूल की चुनरी तैयार हो रही है। इसे 6 कारीगर मिलकर एक हफ्ते में तैयार करते हैं।
मैनुद्दीन खान के कारखाने पर राधा रानी की पीतांबर फूल की चुनरी तैयार हो रही है। इसे 6 कारीगर मिलकर एक हफ्ते में तैयार करते हैं।
सोनू खान के कारखाने पर तैयार होने वाला तोते का लंहगा पूरे वृंदावन में मशहूर है।
सोनू खान के कारखाने पर तैयार होने वाला तोते का लंहगा पूरे वृंदावन में मशहूर है।

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