जन्माष्टमी पर मथुरा में 500 करोड़ का कारोबार:2 महीने से बन रहीं कान्हा की पोशाक; अमेरिका-कनाडा, पोलैंड, दुबई समेत 18 देशों से ऑर्डर

मथुरा2 महीने पहले

18 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है। जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को रंग-बिरंगी पोशाकें पहनाई जाएंगी। इन दिनों मथुरा में कान्हा की पोशाक बन रही हैं, इनकी डिमांड विदेशों तक है। रूस, दुबई, कनाडा, पोलैंड, अमेरिका समेत 18 से ज्यादा देशों के ऑर्डर आए हैं। बिजनेस 500 करोड़ तक पहुंचने के आसार हैं। सबसे बड़ी बात है कि विदेशों के बाजारों में मथुरा में बने ये कपड़े हाथों-हाथ बिकते हैं।

मथुरा के घर-घर में तैयार हो रहे कान्हा के कपड़े
मथुरा-वृंदावन में करीब 20 हजार लोग कान्हा के कपड़े तैयार करते हैं। इनमें कारीगर, कच्चा सामान बेचने वाले और पोशाक व्यापारी शामिल हैं। वैसे तो साल भर पोशाक तैयार की जाती है। मगर, इस काम में जन्माष्टमी से 2 महीने पहले ज्यादा तेजी आ जाती है। इसका कारण है बड़े पैमाने पर मिलने वाले ऑर्डर। इसीलिए जन्माष्टमी से पहले इन दिनों मथुरा-वृंदावन में घर-घर में भगवान की पोशाक बनाने का काम किया जा रहा है।

महिला कारीगर भी इस समय पोशाक के ऑर्डर पूरा करने के लिए 10 से 12 घंटे तक काम कर रही हैं।
महिला कारीगर भी इस समय पोशाक के ऑर्डर पूरा करने के लिए 10 से 12 घंटे तक काम कर रही हैं।

देश-विदेश से आ रहे ऑर्डर
काफी भक्त तो मथुरा-वृंदावन पहुंच कर ही भगवान के लिए नई पोशाक खरीद रहे हैं। मगर, बड़ी संख्या उन ग्राहकों की भी है, जो किसी कारण यहां नहीं आ पाए हैं। ये भक्त चाहे देश में हों या विदेश में, अपने आराध्य के लिए नई पोशाक का ऑर्डर दे चुके हैं।

अलग-अलग राज्यों के अलावा अमेरिका, कनाडा, पोलैंड, दुबई से भी भगवान की पोशाक के लिए ऑर्डर आ रहे हैं।
अलग-अलग राज्यों के अलावा अमेरिका, कनाडा, पोलैंड, दुबई से भी भगवान की पोशाक के लिए ऑर्डर आ रहे हैं।

दो महीने पहले ही शुरू होता है पोशाक बनाने का काम
जन्माष्टमी पर भगवान की पोशाक से जुड़ा कारोबार 2 महीने पहले ही शुरू हो जाता है। इस काम में मथुरा-वृंदावन में करीब 20 हजार लोग जुड़े हैं। इनमें कारीगर, कच्चा सामान बेचने वाले और पोशाक व्यापारी शामिल हैं।

भगवान की पोशाक तैयार करते मुस्लिम कारीगर।
भगवान की पोशाक तैयार करते मुस्लिम कारीगर।

रोज 12 से 14 घंटे कर रहे काम
इस कारोबार से जुड़े लोग 12 से 14 घंटे तक काम कर रहे हैं। पोशाक कारीगर दिन-रात एक कर ऑर्डर पूरा करने में लगे हैं। वहीं व्यापारी ऑर्डर को जन्माष्टमी से पहले ही भेजने में लगे हुए हैं।

जन्माष्टमी से पहले काम करता एक पोशाक कारीगर।
जन्माष्टमी से पहले काम करता एक पोशाक कारीगर।

500 करोड़ से ज्यादा का हो सकता है कारोबार
अग्रवाल पोशाक उद्योग के मालिक जवाहर अग्रवाल ने बताया कि जन्माष्टमी से पहले बड़ी संख्या में ऑर्डर आते हैं। वह पोशाक का थोक में काम करते हैं। वह कहते हैं कि इन ऑर्डर को जन्माष्टमी से पहले ही पूरा कर दिया जाता है। जवाहर अग्रवाल के मुताबिक, जन्माष्टमी पर्व पर इस काम से करीब 500 करोड़ का कारोबार हो जाएगा।

ये बनकर तैयार हुईं पोशाक की फोटो है।
ये बनकर तैयार हुईं पोशाक की फोटो है।

दो साल बाद मिल रहे ऑर्डर
जन्माष्टमी पर भगवान की पोशाक लेने के लिए 2 साल बाद बड़ी संख्या में ऑर्डर आ रहे हैं। दो साल कोरोना के कारण विदेशों से तो ऑर्डर आए ही नहीं, देश से भी न के बराबर ऑर्डर मिले थे। मगर, इस बार देश के साथ विदेशों से भी ऑर्डर आ रहे हैं। इससे इस कारोबार को फायदा होने की उम्मीद है।

कोरोना के कारण 2 साल बाद व्यापारियों को भगवान की पोशाक के ऑर्डर मिले हैं।
कोरोना के कारण 2 साल बाद व्यापारियों को भगवान की पोशाक के ऑर्डर मिले हैं।

भगवान के लिए खरीद रहे नई पोशाक
पोशाक खरीदने आई दिल्ली से संतोष सिंघल भी मथुरा आईं। उन्होंने बताया कि वह अपने भगवान के लिए पोशाक खरीदने आई हैं। दो साल कोरोना के कारण वह नहीं आ सकीं, लेकिन इस बार जन्माष्टमी अच्छे से सेलिब्रेट करेंगे।

भक्त मथुरा-वृंदावन पहुंचकर भी भगवान के लिए नई पोशाक खरीद रहे हैं।
भक्त मथुरा-वृंदावन पहुंचकर भी भगवान के लिए नई पोशाक खरीद रहे हैं।

मुस्लिम कारीगर पोशाक को बना रहे आकर्षक
वृंदावन में बनी रंग-बिरंगी पोशाक देश में ही नहीं, विदेशों में भी काफी लोकप्रिय है। कान्हा का जन्मदिन नजदीक है। उनकी पोशाक बनाने का काम भी चरम पर चल रहा है। भगवान की पोशाक को बनाने का काम जहां हिंदू करते हैं, वहीं मुस्लिम कारीगर बेजोड़ कारीगरी करके इन पोशाक को तैयार करते हैं।

श्रद्धालु भी यहां की बेजोड़ कारीगरी के मुरीद बन गए हैं। इस बार ठाकुर जी मोतियों और स्टोन से बनी पचरंगी पोशाक में अपनी अलग ही छठा बिखेरेंगे। इस बार नई-नई डिजाइन की बड़ी सुंदर-सुंदर पोशाक तैयार की जा रही हैं। यहां बनी पोशाकों की कीमत 10 रुपए से लेकर लाखों में होती है। भगवान की पोशाक बनाते समय मुस्लिम कारीगर उसकी पवित्रता का भी ध्यान रखते हैं।

इस बार बाजार में पीली पोशाक के अलावा शेषनाग पोशाक की भी काफी डिमांड है।
इस बार बाजार में पीली पोशाक के अलावा शेषनाग पोशाक की भी काफी डिमांड है।

इस बार बाजार में आई शेषनाग पोशाक
जन्माष्टमी पर वैसे तो पीले रंग की भगवान को पोशाक पहनाई जाती है। मगर, इस बार बाजार में शेषनाग पोशाक की डिमांड ज्यादा है। जन्माष्टमी के लिए खासतौर पर तैयार की गई यह पोशाक बेहद आकर्षक है। पोशाक व्यवसायी सुनील कुमार ने बताया कि भगवान के जन्म के बाद जब वासुदेव जी उनको सूप में रखकर गोकुल ले गए, तब शेषनाग ने छत्र बनाया था। उसी तरह से यह पोशाक बनाई गई है। जब भगवान इसे धारण करेंगे, तो शेषनाग छत्र के रूप में विराजमान नजर आएगा।

भगवान की पोशाक दिखाता एक कारीगर।
भगवान की पोशाक दिखाता एक कारीगर।