विधानसभा चुनाव के लिए रालोद- सपा ने जारी की सूची:रालोद - सपा ने पहली लिस्ट में 29 प्रत्याशियों के नाम किये घोषित, मथुरा की 3 विधानसभा सीट पर घोषित किये प्रत्याशी

मथुरा4 महीने पहले
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सपा रालोद गठबंधन ने मथुरा से 3 प्रत्याशियों की घोषणा की - Dainik Bhaskar
सपा रालोद गठबंधन ने मथुरा से 3 प्रत्याशियों की घोषणा की

विधानसभा चुनाव के आगाज के साथ ही राजनीतिक दलों ने अब अपने प्रत्याशी घोषित करना शुरू कर दिया है। गुरुवार की दोपहर को जहां कांग्रेस ने 125 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की तो देर शाम सपा रालोद गठबंधन ने भी 29 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी। सपा रालोद गठबंधन ने मथुरा से 3 प्रत्याशियों की घोषणा की।

गोवर्धन से प्रीतम सिंह होंगे रालोद प्रत्याशी

गोवर्धन विधानसभा सीट रालोद के खाते में जाने से यहां राष्ट्रीय लोकदल ने अपना प्रत्याशी प्रीतम सिंह को बनाया। बिल्डर प्रीतम सिंह 1995 से राजनीति में सक्रिय हैं। प्रीतम 1995 में गोवर्धन ब्लॉक के पाली डूंगरा गांव से प्रधान बने। इसके बाद वह 2010 में क्षेत्र पंचायत सदस्य बने और उनकी मां गोवर्धन ब्लॉक प्रमुख। इसके बाद प्रीतम 2012 में समाजवादी पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़ा। लेकिन हार का मुंह देखना पड़ा। इस बार प्रीतम सिंह ने एक बार फिर अपने भाई विपिन सिंह को गोवर्धन ब्लॉक प्रमुख बनाया तो खुद विधानसभा चुनाव के लिए मैदान में उतर गए हैं।

इंजीनियर की पत्नी होंगी बलदेव से रालोद प्रत्याशी

जाट बाहुल्य सीट बलदेव से राष्ट्रीय लोकदल ने अपना दांव बबिता देवी पर खेला है। हाइडिल में स्टोर इंचार्ज इंजीनियर प्रमोद कुमार की पत्नी बबिता देवी ग्रेजुएट हैं और वर्तमान में आगरा की खंदौली सीट से जिला पंचायत सदस्य है।

क्या छाता में चलेगा हैंडपम्प

इस सीट पर 1992 के बाद से रिकॉर्ड है कि यहां से कोई पार्टी दो बार लगातार चुनाव नहीं जीती। 1993 से 2017 तक हुए 6 चुनाव में तीन बार चौधरी लक्ष्मी नारायण तो तीन बार ठाकुर तेजपाल सिंह को विधायक बनाया है। यहां करीब साढ़े तीन लाख वोटर्स हैं। इनमें 90 हजार वोटों के साथ ठाकुर पहले नंबर पर, 65 हजार वोटों के साथ जाट दूसरे नंबर पर आते हैं। इस सीट पर करीब 45 हजार ब्राह्मण, 35 हजार जाटव, 30 हजार मुस्लिम,15 हजार वाल्मीकि, 15 हजार बघेल और 15 हजार गुर्जर के अलावा 50 हजार से ऊपर दूसरी जातियां हैं। इस तरह देखा जाए तो डेढ़ लाख से ज्यादा वोटों के साथ जाट-ठाकुर यहां निर्णायक भूमिका में हैं।1985 में लोकदल प्रत्याशी के रूप में चौधरी लक्ष्मी नारायण पहली बार जीते। 1989 में बीजेपी से किशोरी श्याम जीते। 1993 और 1995 में तेजपाल सिंह (जनता दल) जीते। फिर 1996 में चौधरी लक्ष्मी नारायण ने कांग्रेस के टिकट पर एंट्री ली। 2002 में ठाकुर तेजपाल सिंह लोकदल से चुनकर आते है। लेकिन चौधरी लक्ष्मी नारायण इस बार बीएसपी के टिकट पर 2007 में जीत जाते है हालांकि तेजपाल सिंह की वापसी 2012 में फिर होती है। लेकिन 2017 के चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चौधरी लक्ष्मी नारायण जीतते है।

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