गुरु पूर्णिमा से पहले मुड़िया संतो ने कराया मुंडन:मथुरा में शोभा यात्रा से एक दिन पहले संतों ने मुंडवाया सिर, 463 साल से चली आ रही है परंपरा

मथुरा3 महीने पहले
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24 जुलाई को 463 पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए संत शोभायात्रा निकालेंगे और गोवर्द्धन की परिक्रमा करेंगे। - Dainik Bhaskar
24 जुलाई को 463 पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए संत शोभायात्रा निकालेंगे और गोवर्द्धन की परिक्रमा करेंगे।

मथुरा में मुड़िया पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) मेला निरस्त होने के बाद गुरु-शिष्य के बीच चली आ रही प्राचीन परंपरा को निभाते हुए शुक्रवार को मुड़िया संतों ने मुंडन कराया। 24 जुलाई को परंपरा का निर्वहन करते हुए संत शोभायात्रा निकालेंगे और गोवर्द्धन की परिक्रमा करेंगे।

शोभा यात्रा निकालने को मिली हैं सशर्त अनुमति

शोभा यात्रा की सशर्त अनुमति मिलने के बाद मुड़िया पूर्णिमा के मौके पर पूज्यपाद सनातन गोस्वामी की याद में शनिवार को चकलेश्वर के राधा-श्याम सुंदर मंदिर से शोभा यात्रा निकाली जाएगी। अनुयायियों ने शोभायात्रा को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। राधा श्याम सुंदर मंदिर के महंत ने बताया कि कोरोना के चलते भक्तों से गोवर्धन न आने का अनुरोध किया है। शोभा यात्रा में कम संख्या में साधु-संत शामिल होंगे।

गुरु पूर्णिमा को बृज में कहते हैं मुड़िया पूर्णिमा

पूरे देश में मनाए जाने वाला गुरु पूर्णिमा पर्व गोवर्धन धाम में मुड़िया पूर्णिमा मेला के नाम से मनाया जाता है। यहां सनातन गोस्वामी के गोलोकधाम पधारने पर उनके शिष्यों ने शोभायात्रा निकालकर मानसी गंगा की परिक्रमा की थी। साथ ही उनके अनुयायियों ने सिर मुंडवाकर और मानसी गंगा में स्नान कर विमान निकाला। उसी समय से मुड़िया नाम से यह मेला जाना जाता है।

463 साल पुरानी परंपरा का फिर होगा निर्हवहन
संत श्याम सुंदर दास ने बताया कि यहां सनातन गोस्वामी के 1558 में गोलोकधाम पधारने पर उनके शिष्यों ने सिर मुड़ाकर मानसी गंगा की परिक्रमा की थी। उसी परंपरा का गोवर्धन के चकलेश्वर स्थित श्रीराधा श्याम सुंदर मन्दिर के संत निर्वहन करते चले आ रहे हैं। शुक्रवार को अनुयायी भक्तों ने मंदिर में मुंडन कराया है। शनिवार को मानसी गंगा में स्नान कर 463वीं बार मुड़िया शोभायात्रा हरिनाम संकीर्तन के साथ निकाली जायेगी।

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