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रंगेश्वर महादेव के दिल में बसती है प्रचंड महाकाली:श्री कृष्ण स्वरूप महाकाली को लौरी, मखमली बिस्तर लगाकर कराया जाता है अर्द्ध रात्रि शयन, अमृत सुख बरसाती है रंगेश्वर वाली काली

मथुरा9 महीने पहले
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द्धि शक्ति मां रंगेश्वरी महाकाली आज भी रोजाना ऐसे ऐसे चमत्कार दिखा रही है, उनके दरबार में एक दीपक जलाकर भक्त अपनी सभी मनोकामना पूर्ण करते है - Dainik Bhaskar
द्धि शक्ति मां रंगेश्वरी महाकाली आज भी रोजाना ऐसे ऐसे चमत्कार दिखा रही है, उनके दरबार में एक दीपक जलाकर भक्त अपनी सभी मनोकामना पूर्ण करते है

मथुरा योगी राज श्री कृष्ण की नगरी के नाम से पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं, यहां भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर युग में जन्म लिया था। बालकृष्ण और बलदाऊ ने कंस का वध किया था और वहां रंग रंग कहकर जमीन फाड़कर प्रकट हुए रंगेश्वर महादेव ने दोनों भाइयों का विवाद समाप्त किया था। उन्हीं की आद्धि शक्ति मां रंगेश्वरी महाकाली आज भी रोजाना ऐसे ऐसे चमत्कार दिखा रही है, उनके दरबार में एक दीपक जलाकर भक्त अपनी सभी मनोकामना पूर्ण करते है। यह विश्व में एक ऐसा मंदिर है जहां दुर्गा काली मां श्री कृष्ण के स्वरूप में पूजी जाती है, यहां रंगेश्वरी महाकाली पर तुलसी की माला पहनाई जाती है व् तुलसी दल का भोग लगाया जाता है .

रंगेश्वर काली मूर्ति का इतिहास- महादेव की मूर्ति लेने गए जयपुर, भूल वश महाकाली में हुई तब्दील मूर्ति

करीब 26 वर्ष पूर्व समाजसेवी अशोक कुमार गुप्ता माई दास तथा उनके बड़े भाई कैलाश चंद गुप्ता और कन्हैया लाल अग्रवाल ने बकाये दार से रुपये मांगे। बकाये दार के बेईमान होने पर सहमति रुपये महादेव मंदिर में रखने की बात कही। जब बकाये दार ने रुपये मंदिर में रख दिए तो डूबी हुई रकम पाने के बाद उन्होंने निर्णय लिया कि यह रकम रंगेश्वर महादेव मंदिर की अमानत है, यहां महादेव जी की मूर्ति लाकर स्थापित की जाए। इसके बाद जयपुर से किसी व्यक्ति द्वारा महादेव की मूर्ति मंगाई गयी जो भूल वश काली की प्रतिमा में तब्दील हो गई। जिसे समाजसेवी कैलाश चंद गुप्ता और अशोक कुमार गुप्ता माई दास ने अपने घर पर रख लिया था, मूर्ति घर पर रखने के बाद अशोक कुमार गुप्ता को वह मूर्ति चमत्कार दिखाने लगी, जो वह कहते वह सत्य होने लगा। घर परिवार वाले उन्हें पागल कहने लगे। उसी समय रंगेश्वर महादेव मंदिर में कार्यरत सेवायत पुजारी को स्वप्न आया कि माँ काली की प्रतिमा को रंगेश्वर महादेव के पास ही स्थापित कराया जाएं। रंगेश्वर महाकाली की प्रतिमा का रंगेश्वर महादेव मंदिर में गोपाल दास कैलाश चन्द फर्म, कन्हैया लाल अशोक कुमार ने माघ शुक्ला द्वितीया संवत 2051 दिनांक 01 फरवरी1995 में स्थापित करवाया गया, उसी दिन से यहां रोजाना चार पहर रंगेश्वरी महाकाली का श्रृंगार तथा आरती होती है और इस आरती में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते है।

इसलिए आद्या शक्ति मां को कृष्ण काली रूप अति प्रिय

सर्व शक्ति स्वरुपिणी मां जगदंबा के प्राकम्य के पीछे करूणा मयी एवं ममता मयी होना है। अपने दरवार में आशीर्वाद से दयामयी मां सभी भक्तों के कष्टों का निवारण करती है। तुलसीदल, माखन का भोग, आद्याशक्ति मां को कृष्ण काली के रूप को अति प्रिय है। जगत तारिणी मां के चरणों में शिवलिंग की अद्भुत छटा के दर्शन से क्लेशों एवं चिंता दूर हो जाती है। उनके त्रिपुंड पर दीपक अपनी अखंडता से प्रकाश अलौकिक एवं अनोखी छटा बिखेरता है। ऐसा प्रतीत होता है कि त्रिपुंड मणियों से जड़ित हो, तुलसीदल द्वारा माताजी को मिठाई एवं खाने का भोग लगता है, मां कृष्ण रूप रंगेश्वरी देवी जी को तुलसीजी से अधिक प्यार है। उन्होंने जमीन से प्रकट होकर कहा था कि हे कृष्ण तुमने छल से तो बलराम ने बल से कंस को मारा है। जिसे सुनकर दोनों भाई संतुष्ट हुए थे। इसी लिए मेरे पति रंगेश्वर महादेव और रंगेश्वरी महाकाली कृष्ण स्वरूप में यहां स्थापित है। सुख का अमृत बरसाती है रंगेश्वरी महाकाली, जिसका वचन नहीं जाता कभी खाली। इसी मान्यता को लेकर जिसकी मनौती पूरी हो जाती है वह उनको पोशाक श्रृंगार आदि चढ़ाता है, जिसको लेकर आज भी लंदन, यूके, दुबई तथा अन्य देशों में रह रहे महामाई के भक्त रंगेश्वर महाकाली को पोशाक चढ़ाने के लिए एक साल पूर्व से ही नम्बर लगाते है।

20 वर्षों से एक चिकित्सक भक्त रात्रि में करता उनका अलौकिक श्रृंगार-आरती

चाहे सर्दी की प्रकोप हो, मूसलाधार बरसात हो, भयंकर गर्मी हो , या फिर कोराना काल की रातें हो आज तक इनकी रात्रि की आरती होना, अलौकिक श्रृंगार होना छूटा नहीं है। इस मंदिर में सुबह मंगला आरती रंगेश्वर महादेव की आरती के बाद होती है, उसके बाद दोपहर आरती होती, उसके बाद सायंकाल तथा रात्रि साढ़े दस से साढ़े 11 बजे रंगेश्वर महाकाली की आरती होती है। रात्रि की आरती बड़े भावपूर्ण और श्रद्धाभाव से एक चिकित्सक डाक्टर द्वारा की जाती है। इसके बाद रंगेश्वर महाकाली का सोने का पालना रोजाना तैयार किया जाता है, जिसमें मखबली कपड़ा बिछाया जाता है, दूध का भोग लगाया जाता है। डाक्टर रविन्द्र जो पूरे दिन मरीजों का उपचार करने के पश्चात रात्रि नौ बजे मंदिर आते है, बड़े प्रेमभाव से मंदिर की सफाई श्री मां रंगेश्वरी महाकाली देवी भक्त मंडल के साथ करते है, मां का अलौकिक श्रृंगार अपने हाथों से करते है, उनका कहना है कि आज मैं इस मुकाम पर पहुंचा हूं वह रंगेश्वर महाकाली की कृपा है। डाक्टर रविन्द्र ने बताया कि यह सेवा मैं 20 वर्षों से लगातार कर रहा हूं, 20 साल पहले इस मंदिर में पोछा लगाया करता था, उस समय हमारा इकलौता ढाई साल का बेटा लापता हो गया था, रिपोर्ट लिखवाईं कहीं पता नहीं चला, मैं मां रंगेश्वर वाली महाकाली का घर में दीपक जलाया तो एक अंजान महिला मेरे बच्चे को लेकर घर पहुंची, उसके बाद वह महिला कहां चली गई उसका पता नहीं चला लेकिन उसी दिन से मेरा रंगेश्वर वाली महाकाली पर अटूट विश्वास हो गया। उन्होंने मेरे जीवनकाल में कई ऐसे चमत्कार किए हैं उनका मैं बखान नहीं कर सकता हूं।

राज राजेश्वरी मां रंगेश्वरी वाली की शयन की है अनुपम शोभा

मां रंगेश्वरी देवी के मंदिर में मां के भक्त नित्यप्रति रात्रि 11 बजे मातेश्वरी के शयन की सेवा बड़े लाड़ प्यार से करते हैं. इस समय महाकाली की सेवा चिकित्सक डा. रवि, दीपक रोहिला, अशोक खिलौने वाले, जोनी, कान्हा सैनी, गोपी तथा अन्य भक्तगण विधि विधान से मां का अभिषेक करते हैं। इसके पश्चात उनकी सेवा करके उनका रात्रि श्रृंगार करते हैं, इसके बाद स्वर्ण मडित पलंग पर मां की दिव्य अलौकिक छवि रख उसका दिव्य आभूषणों, पुष्पों एवं वस्त्रों से अलंकृत करते हैं। रात्रि में आरती दिव्य भोग जैसे माखन मिश्री दूध, मेवा, मिठाई पानी से सेवा की जाती है। तंत्रोक्त देवी सूक्तम तथा मां की भेटों से उनकी आराधना की जाती है और ‘आ जा आ जा निन्द्रा आ जा, मईया सो जा मईया सो जा’ की लौरी गाकर उनको शयन कराई जाती है।

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