मथुरा में दस दिवसीय सांझी उत्सव का हुआ शुभारंभ:स्कूल ,कॉलेज के छात्र छात्राओं ने की सहभागिता, महोत्सव में पाण्डुलिपियों देख लोग हुए अचंभित

मथुरा2 महीने पहले
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सांझी महोत्सव-2022 के उद्घाटन अवसर पर सांझी विवरणिका का लोकार्पण करते अतिथि - Dainik Bhaskar
सांझी महोत्सव-2022 के उद्घाटन अवसर पर सांझी विवरणिका का लोकार्पण करते अतिथि

वृंदावन शोध संस्थान में दस दिवसीय सांझी महोत्सव-2022 का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के अंतर्गत ‘ब्रज-सांझी: विस्तार और विविधतायें’ विषयक प्रदर्शनी एवं साँझी विवरणिका का लोकार्पण आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी, स्वामी महेशानंद सरस्वती, श्रीरंग मंदिर की सीईओ अनघा श्रीनिवासन, मथुरा-वृन्दावन नगर निगम के अपर आयुक्त क्रांति शेखर सिंह, आचार्य मनोज मोहन शास्त्री, सुरेश चन्द्र शर्मा, गोविन्द कृष्ण पाठक आदि अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से किया।

सांझी है ब्रज संस्कृति का अंग

भट्टजी सांझी घराने के आचार्य विभु कृष्ण भट्ट द्वारा रंग, पुष्प, जल सांझी का अंकन किया गया। छात्र-छात्राओं को आचार्य सुमित गोस्वामी द्वारा सांझी बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। डाॅ॰ चन्द्र प्रकाश शर्मा ने सांझी का परिचय देते हुए कहा कि साँझी ब्रज संस्कृति का अंग है, जो कि लोक से निकुंज तक व्याप्त है। अतिथियों का स्वागत शासी परिशद सदस्य राधाकृष्ण पाठक एवं राधाबल्लभ सम्प्रदायाचार्य श्रीहित सुकृतलाल गोस्वामी द्वारा पटुका ओढाकर किया गया।

स्कूल ,कॉलेज के छात्र छात्राओं ने की सहभागिता
मथुरा-वृन्दावन नगर निगम के अपर नगर आयुक्त क्रांति शेखर सिंह द्वारा भगवान बांके बिहारी जी के चित्रपट पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम के दौरान कान्हा माखन पब्लिक स्कूल, वेणु यूनिक जूनियर हाईस्कूल, अमरनाथ गर्ल्स डिग्री काॅलेज, सत्यादेवी गर्ग शिशु मंदिर, हेरिटेज पब्लिक स्कूल, वन महाराज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाॅजी मैनेजमेंट के छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की। आचार्य सुमित गोस्वामी द्वारा छात्र-छात्राओं को साँझी बनाने का प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम का संयोजन डाॅ॰ राजेश शर्मा द्वारा किया गया।

सांझी कला के बारे में जानकारी करते स्कूली बच्चे
सांझी कला के बारे में जानकारी करते स्कूली बच्चे

महोत्सव में दर्शित मूल पाण्डुलिपियों तथा पारंपरिक खाकों को देख लोग अचंभित
वृंदावन शोध संस्थान द्वारा आयोजित सांझी महोत्सव-2022 में प्रदर्शित संस्थान संग्रह की प्राचीन पांडुलिपियों तथा सांझी परंपरा के भट्टजी घराने द्वारा प्रदर्शित किये गये पुराने दाव के खाकों को देख लोग अभिभूत थे। प्राचीन हस्त निर्मित कागज से पारंपरिक बेलों को तैयार करने में प्रयुक्त होेने वाले खाकों के साथ ही लीला प्रसंगों में प्रयुक्त खाकों की कलात्मकता देखते ही बन रही थी।

पुराने दाव के खाकों को देख लोग अभिभूत थे
पुराने दाव के खाकों को देख लोग अभिभूत थे

कार्यक्रम में यह रहे उपस्थित
कार्यक्रम में भागवत निवास के संतों द्वारा सहभागिता की गई। संतों का स्वागत शासी परिषद सदस्य राधाकृष्ण पाठक द्वारा पटुका ओढाकर किया गया। कार्यक्रम के दौरान तुलसी रामानुजदास, गौरचरणदास, विश्वरूपदास, कृष्णदास, फूलडोलदास, शुकदेवदास, दीनबंधुदास, राधाकृष्णदास, जगनंदनदास, गोपालदास, वृंदावनदास, नरहरि बाबा, मुरली, डाॅ कृष्ण मुरारी, महेश भारद्वाज, राजकुमार राना, हिमांशी, सीमा सिंह, शोध छात्रा मनीषा वर्मा, उमेश चंद्र शोध छात्र, अभिनव गोस्वामी, प्रशासनाधिकारी रजत शुक्ला, सुकुमार गोस्वामी, क्यूरेटर ममता कुमारी, प्रगति शर्मा, उमाशंकर पुरोहित, डाॅ करूणेश उपाध्याय, श्रीकृष्ण गौतम, आर.पी. सिंह, कृष्ण कुमार मिश्रा, करवेन्द्र सिंह, अंकुर सिंह, भगवती, हेमंत, ब्रजेश कुमार, अशोक दीक्षित, विनोद झा, राजकुमार शुक्ला आदि संस्थान कर्मी उपस्थित रहे।

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