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बृज में गुरु पूर्णिमा की धूम:आज कई स्थानों पर शिष्यों ने किया गुरुओं का पूजन, कोविड 19 के चलते गोवर्द्धन में केवल निभाई गई परम्परा

मथुरा2 महीने पहले
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गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोवर्द्धन की परिक्रमा लगाने आते हैं। - Dainik Bhaskar
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोवर्द्धन की परिक्रमा लगाने आते हैं।

आज गुरु पूर्णिमा है। बृज भूमि में गुरु पूर्णिमा को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। कई स्थानों पर शिष्यों ने अपने अपने गुरुओं का पूजन कर गुरु शिष्य परम्परा का निर्वाहन किया। हालांकि कोविड 19 के चलते ज्यादातर श्रद्धालु बृज नहीं आ सके। उन्होंने अपने घर पर रहकर ही गुरु का पूजन किया।

वृन्दावन के आश्रमों में भक्तों ने गुरुओं की पूजा की

धर्म नगरी वृन्दावन में बड़ी संख्या में सन्त निवास करते हैं। राधा कृष्ण की भक्ति में लीन रहने वाले इन संतों का पूजन करने के लिए शनिवार को शिष्य आश्रमों में पहुंचे। यहां विधि विधान से शिष्यों ने शुभ मुहूर्त में अपने गुरु का रोली चावल आदि से पूजन किया और उनको फल , मिठाई आदि भेंट की।

वृन्दावन में गुरु का पूजन करते उनके शिष्य।
वृन्दावन में गुरु का पूजन करते उनके शिष्य।

ढोल , मृदंग और परम्परा की आवाज ने तोड़ा गोवर्द्धन का सन्नाटा
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोवर्द्धन की परिक्रमा लगाने आते हैं। गुरु पूर्णिमा मेले को राजकीय मेले का दर्जा मिला हैं। इस बार कोरोना के चलते शाशन ने गुरु पूर्णिमा मेला निरस्त कर दिया। जिसकी बजह से 5 दिन श्रद्धालुओं के शोर गुल से गुलजार रहने वाला गोवर्द्धन इस बार सन्नाटे में नजर आया । शनिवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर जब गौड़िया सम्प्रदाय के सन्त ढोल , मृदंग लेकर निकले तो गोवर्धन भक्ति की धारा बहती नजर आई।

463 साल पुरानी परंपरा का फिर हुआ निर्वाहन

संत श्याम सुंदर दास ने बताया कि यहां सनातन गोस्वामी के 1558 में निधन पर उनके शिष्यों ने सिर मुड़ाकर मानसी गंगा की परिक्रमा लगाई थी। उसी परंपरा का गोवर्धन के चकलेश्वर स्थित श्रीराधा श्याम सुंदर मन्दिर के संत निर्वहन करते चले आ रहे हैं। शुक्रवार को अनुयायी भक्तों ने मंदिर में सिर मुंडन कराकर शनिवार को ढोल, मृदंग और मजीरों के साथ कीर्तन करते हुए गोवर्द्धन की परिक्रमा की।

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