मथुरा में जुटे 50 हजार से ज्यादा भाई-बहन:एक दिन पहले से पहुंच गए विश्राम घाट, यमुना स्नान कर भाईयों के लिए प्रार्थना कर रहीं हैं बहनें

मथुराएक महीने पहले

भाई दूज पर आज मथुरा में यमुना तट पर भाई-बहनों का मेला लगा है। विश्राम घाट में भाई-बहन हाथ पकड़कर यमुना स्नान कर रहे हैं। स्नान के लिए दूर-दराज से 50 हजार से ज्यादा भाई-बहन एक दिन पहले ही यहां पहुंच गए हैं। सुबह यमुना स्नान कर बहनें भाई का तिलक कर रही हैं। उनकी लंबी आयु की प्रार्थना कर रही हैं।

हिंदू धर्म में भैया दूज का विशेष महत्व है। इस पर्व को 'यम द्वितीया' और 'भ्रातृ द्वितीया' भी कहा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों का तिलक कर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। भाई को यम फांस से मुक्ति दिलाने के लिए बहनें मां यमुना से प्रार्थना कर रही हैं।

विश्राम घाट पर करते हैं भाई-बहन स्नान
द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध करने के बाद यमुना किनारे विश्राम किया। जिस स्थान पर विश्राम किया, उस जगह का नाम पड़ गया विश्राम घाट पड़ गया। इसी विश्राम घाट पर भाई दूज के दिन बड़ी संख्या में भाई-बहन स्नान करते हैं।

क्यों मनाया जाता है भैया दूज?
पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्य भगवान की पत्नी का नाम छाया था। उनकी कोख से यमराज और यमुना का जन्म हुआ था। यमुना अपने भाई यमराज से बड़ा स्नेह करती थीं। यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया। बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया।

यमुना के आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन से वर मांगने के लिए कहा। इस पर यमुना ने कहा कि भाई दूज के दिन अगर इस जगह पर भाई-बहन एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर स्नान करें तो आप उनको यम फांस और नरक से मुक्ति दे दें। इस पर यमराज ने यमुना को ये वरदान दिया। तभी से इस स्थान पर भाई दूज के दिन भाई-बहन एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर स्नान करते हैं।

द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध करने के बाद यमुना किनारे विश्राम किया था। जिसे विश्राम घाट कहते हैं।
द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध करने के बाद यमुना किनारे विश्राम किया था। जिसे विश्राम घाट कहते हैं।

बहनों ने किया भाइयों के तिलक
भाई दूज पर यमुना स्नान करने के लिए दूर-दराज से भाई-बहन मथुरा पहुंचते हैं। सबसे ज्यादा संख्या गुजरातियों की रहती है। पर्व की पूर्व संध्या पर ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मथुरा में डेरा डाल दिया था। अब भाई-बहन स्नान कर रहे हैं। इसके लिए नगर निगम ने काफी तैयारियां की हैं। सफाई के साथ प्रकाश व्यवस्था के खास इंतजाम किए गए हैं। स्नान करने के बाद बहनें भाई का तिलक कर उनकी लंबी उम्र की कामना कर रही हैं।