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रंगनाथ मंदिर में हुई हाथी-मगरमच्छ की प्रतीकात्मक लड़ाई:मथुरा में कई साल से चली आ रही परंपरा का हुआ निर्वहन, कोरोना नियमों के तहत भक्तों ने किए दर्शन

मथुरा2 महीने पहले
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वृंदावन में स्थित दक्षिण शैली के रंगनाथ मन्दिर में शनिवार को गज ग्राह मोक्ष लीला का आयोजन किया गया। - Dainik Bhaskar
वृंदावन में स्थित दक्षिण शैली के रंगनाथ मन्दिर में शनिवार को गज ग्राह मोक्ष लीला का आयोजन किया गया।

बृजधाम मथुरा के वृंदावन में स्थित दक्षिण शैली के रंगनाथ मन्दिर में शनिवार को गज ग्राह मोक्ष लीला का आयोजन किया गया। इस लीला में भगवान रंगनाथ (विष्णुजी) गरुड़ वाहन पर विराजमान होकर पुष्करणी पर पहुंचते हैं और गज (हाथी) की रक्षा कर ग्राह (मगरमच्छ) को मुक्ति प्रदान करते हैं ।

लीला में दिखाया भक्त भगवान का संबंध
श्री रंगनाथ मंदिर में शनिवार को बारहद्वारी के पास स्थित पुष्करणी सरोवर में गज ग्राह लीला का आयोजन किया गया। आषाढ़ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को आयोजित होने वाली इस लीला में भक्त और भगवान के संबंध को दिखाया गया है। शाम को पुष्करणी में हाथी जब स्नान करते हैं, इसी दौरान वहां मौजूद मगरमच्छ उनका पैर पकड़ लेता है। मगरमच्छ की पकड़ में आए हाथी ने इस संकट से निपटने के लिए भगवान को याद किया। जिस पर भक्त की पुकार पर सोने से बने गरुड़ जी पर विराजमान होकर भगवान रंगनाथ पुष्करणी पहुंचे ।

मगरमच्छ की पकड़ में आए हाथी ने इस संकट से निपटने के लिए भगवान को याद किया
मगरमच्छ की पकड़ में आए हाथी ने इस संकट से निपटने के लिए भगवान को याद किया

सुदर्शन चक्र से किया मगरमच्छ का वध
पुष्करणी सरोवर पहुंचे भगवान ने अपने सुदर्शन चक्र से मगरमच्छ का वध करके उद्धार किया और हाथी को बचाया। भगवान का सुदर्शन चलते ही भक्त भगवान रंगनाथ के जयकारे लगाने लगे। इस उत्सव के बारे में मंदिर की मुख्य अधिशाषी अधिकारी अनघा श्रीनिवासन ने बताया गजेंद्र मोक्ष भगवान की अद्भुत लीला है, जिसमें भक्त गजेंद्र हैं, जो भगवान की सेवा के लिए पुष्प लेकर पुष्करणी सरोवर से गुजर रहा होता है और ग्राह यानि मगरमच्छ ने इसके पैर को दबोच लिया है, ऐसे में गजेंद्र भगवान के शरणागत होकर भगवान से प्रार्थना करता है।

उत्सव में यह लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर स्वामी रघुनाथ, रंगा स्वामी , चौवी स्वामी, चक्रपाणि मिश्रा, श्रीनिवासन, तिरुपति राव, आनंद राव, श्रीनिवास चित्रकार, पार्थ सारथी, शरद शर्मा, रामनिवास, राजू सक्सेना, अमर सक्सेना, भीम आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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